Suvendu Adhikari West Bengal New CM : पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज वह क्षण आ गया है, जिसकी पटकथा 2021 के नंदीग्राम चुनाव के साथ ही लिखी जाने लगी थी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। वे न केवल भाजपा के पहले मुख्यमंत्री होंगे, बल्कि बंगाल में दशकों पुरानी ‘व्यक्ति-केंद्रित’ सत्ता को खत्म कर उसे एक नई दिशा देने की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
शुक्रवार को आयोजित हुई BJP विधायक दल की बैठक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी के सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद वे अब शनिवार को पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।
अमित शाह की मौजूदगी में हुआ निर्णय
कोलकाता के न्यू टाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में हुई बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सहायक पर्यवेक्षक के तौर पर उपस्थित थे। भाजपा के सभी 207 विजयी विधायकों ने शुभेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लगाई।
शुभेंदु आज ही लोकभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
“सोनार बंगाल का लक्ष्य होगा पूरा” : अमित शाह
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा-
“बंगाल की जनता ने पीएम मोदी और भाजपा पर जो भरोसा दिखाया है, हम उसे टूटने नहीं देंगे। अब बंगाल में घुसपैठ और गौ-तस्करी का अंत होगा। यह जीत उन 321 कार्यकर्ताओं को समर्पित है जिन्होंने राजनीतिक हिंसा में अपनी जान गंवाई। हम सोनार बंगाल के लक्ष्य को जारी रखेंगे।” – अमित शाह
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नंदीग्राम से भवानीपुर: ममता के ‘अभेद्य किलों’ का ढहना
शुभेंदु अधिकारी की इस जीत को ‘महाविजय’ माना जा रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने ममता बनर्जी को नंदीग्राम में शिकस्त दी थी। वहीं, इस बार के चुनाव में शुभेंदु ने ममता के गढ़ भवानीपुर में उन्हें चुनौती दी और भारी मतों से कामयाबी हासिल की। शुभेंदु अधिकारी की यह उपलब्धि केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि बंगाल के राजनीतिक भूगोल में आए बड़े बदलाव का संकेत थी।
2021 में नंदीग्राम के बाद इस बार ममता के ‘घर’ कहे जाने वाले भवानीपुर में सेंध लगाकर शुभेंदु ने न केवल अपनी पारंपरिक सीट जीती, बल्कि भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराकर यह सिद्ध कर दिया कि बंगाल की जनता अब ‘विकल्प’ को स्वीकार कर चुकी है।
इन्ही दोनों सीटों पर मिली जीत ने मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी को सबसे मजबूत बना दिया था।
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शुभेंदु अधिकारी: एक नज़र में (Profile)
| विवरण | जानकारी |
| जन्म | 15 दिसंबर 1970, कांथी (पूर्वी मेदिनीपुर) |
| शिक्षा | BA (विद्यासागर यूनिवर्सिटी), MA (रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी) |
| राजनीतिक अनुभव | पूर्व सांसद, पूर्व परिवहन एवं सिंचाई मंत्री |
| भाजपा में शामिल | दिसंबर 2020 (TMC छोड़ने के बाद) |
एक्सक्लूसिव : शुभेंदु सरकार के सामने 3 बड़ी चुनौतियां
राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उनके सामने तीन प्रमुख चुनौतियां होंगी-
- प्रशासनिक शुद्धिकरण : पिछले एक दशक से व्याप्त कथित ‘कट मनी’ और ‘सिंडिकेट राज’ को जड़ से उखाड़ना।
- कानून-व्यवस्था का पुनर्निर्माण: अमित शाह ने जिन 321 कार्यकर्ताओं की शहादत का जिक्र किया, उसके बाद राज्य में राजनीतिक हिंसा को शून्य पर लाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
- आर्थिक पुनरुद्धार: बंगाल को फिर से औद्योगिक केंद्र (Industrial Hub) बनाना, जिससे युवाओं का पलायन रुक सके।
“यह जीत केवल भाजपा की नहीं, बल्कि बंगाल की उस मिट्टी की है जो वर्षों से लहूलुहान थी। हम बदला नहीं, बदलाव के संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगे।” – शुभेंदु अधिकारी (विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद)
शुभेंदु अधिकारी का सफरनामा | मुख्य पड़ाव |
| 1989-1995 | छात्र राजनीति और पार्षद से करियर की शुरुआत |
| 2009-2020 | टीएमसी के रणनीतिकार और कैबिनेट मंत्री |
| दिसंबर 2020 | भाजपा में शामिल होकर ममता को खुली चुनौती दी |
| 2026 | भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों से जीतकर मुख्यमंत्री पद तक |
मुख्यमंत्री पदनाम हटाने को तैयार नहीं ममता बनर्जी
एक ओर जहाँ नई सरकार के गठन की तैयारी है, वहीं ममता बनर्जी के सोशल मीडिया प्रोफाइल को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विधानसभा भंग होने के बावजूद उनके प्रोफाइल पर अब भी “मुख्यमंत्री” दर्ज है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।

हालांकि, राज्यपाल आर.एन. रवि पहले ही विधानसभा भंग करने का आदेश जारी कर चुके हैं।
कल ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण
नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा। इस भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की पूरी संभावना है।
शनिवार को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि बंगाल में भाजपा की आने वाली सरकार का शक्ति प्रदर्शन होगा। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल में उत्तर बंगाल, मतुआ समुदाय और जंगलमहल के चेहरों को विशेष प्राथमिकता दी जा सकती है, ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे।
बरहाल कल का दिन पश्चिम बंगाल के इतिहास में ‘सोनार बंगाल’ की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। अब देखना यह है कि शुभेंदु अधिकारी अपनी ‘विकासवादी’ छवि से बंगाल के मानस पटल पर कितनी गहरी छाप छोड़ पाते हैं।
















