नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल में BJP नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मौत को लेकर हंगामा मचा हुआ है। मृतक चंद्रनाथ रथ की मां हसिरानी रथ बेटे की मौत पर इंसाफ चाहती हैं। उनका कहना है ‘मैं मां हूं। किसी और के लिए मौत नहीं मांगती। लेकिन दोषियों को उम्रकैद जरूर होनी चाहिए। उनका कहना है कि मेरे बेटे को इसलिए मारा गया क्योंकि BJP सूबे में सस्ता में आ गई है। उन्होंने साफ कहा कि मेरे बेटे की हत्या ममता बनर्जी की हार का नतीजा है।
हसिरानी रथ का कहना है कि बीजेपी नेता सूबे में कानून-व्यवस्था कायम करने की गुहार लगा रहे थे। लेकिन TMC के लोगों की ओर से भड़काऊ बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि 4 मई के बाद दिल्ली में तुम्हारा बाप भी तुमको नहीं बचा पाएगा। उन्होंने ऐसा कर दिखाया और मेरे बेटे को मार दिया। उन्होंने कहा कि अगर मेरा बेटा सड़क हादसे में मर गया होता तो मुझे इतना दिख नहीं होता। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे को भवानीपुर और नंदीग्राम सीट की खास जिम्मेदारी दी गई थी। इसलिए उसे TMC के गुंडों ने निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि जहां शुभेंदु अधिकारी और अन्य BJP नेता लगातार शांति की अपील कर रहे थे वहीं TMC नेता खुली बयानबाजी के साथ कह रहे थे कि 4 मई को नतीजों के बाद दिल्ली का कोई नेता बीजेपी कार्यकर्ताओं को बचा नहीं पाएगा।
बंगाल BJP अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य बोले- ये राजनीतिक प्रतिशोध में की गई हत्या है
वहीं चंद्रनाथ रथ के छोटे भाई देव कुमार का कहना है कि उनके भाई की किसी से दुश्मनी नहीं थी। जिसने भी ये साजिश रची है उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। दूसरी तरफ, बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य का कहना है कि ये राजनीतिक प्रतिशोध में की गई हत्या है। उन्होंने कहा कि क्या चंद्र रथ की हत्या कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की गई? क्या इसके पीछे कुछ और मकसद था या बदले की कार्रवाई? उन्होंने कहा कि हत्यारे फर्जी नंबर प्लेट वाली कार लेकर आए थे। रास्ता रोका और फिर बाइक सवारों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। BJP नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी इसे सोची समझी हत्या और सुनियोजित साजिश बताया है।
कौन थे चंद्रनाथ रथ?
शुभेंदु अधिकारी की तरह ही चंद्रनाथ रथ भी पूर्व मेदिनीपुर जिले के निवासी थे। चंद्रनाथ का परिवार चंडीपुर क्षेत्र में रहता है। उनकी शुरुआती पढ़ाई रहरा रामकृष्ण मिशन में हुई थी। बाद में उन्होंने भारतीय वायुसेना में नौकरी जॉइन की। वह अधिक समय वायु सेना में नहीं रहे। वायुसेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने एक कॉर्पोरेट कंपनी में काम शुरू किया। साल 2019 में जब शुभेंदु अधिकारी बंगाल के जल संसाधन विभाग के मंत्री बने तभी से चंद्रनाथ उनके निजी सहायक के रूप में कार्य करने लगे।चंद्रनाथ का परिवार तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हुआ था। चंद्रनाथ की मां हांसी रथ तृणमूल की पंचायत कर्माध्यक्ष रह चुकी हैं। 2020 में जब शुभेंदु अधिकारी तृणमूल छोड़ भाजपा में शामिल हुए तो चंद्रनाथ की मां भी उनके साथ भाजपा में आ गई। हालांकि शुभेंदु के तृणमूल में रहते ही चंद्रनाथ उनके लिये काम करने लगे थे। धीरे-धीरे वह शुभेंदु के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हो गए।परिजनों का कहना है कि बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्मिक जीवन की ओर था, लेकिन परिस्थितियों के कारण वह उस राह पर आगे नहीं बढ़ सके।
















