RSS के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी बोले- नारद मुनि से प्रेरणा लेकर स्वकालीन धर्म की पुनर्स्थापना जरूरी
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RSS के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी बोले- नारद मुनि से प्रेरणा लेकर स्वकालीन धर्म की पुनर्स्थापना जरूरी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी ने विश्व संवाद केंद्र, भुवनेश्वर द्वारा राजधानी में आयोजित नारद जयंती कार्यक्रम और नारद सम्मान प्रदान समारोह में कहा कि नारद मुनि ने जिस प्रकार हमेशा स्वकालीन धर्म का पालन किया, हमें भी उनसे सीख लेकर उसी तरह स्वकालीन धर्म की पुनः स्थापना करनी होगी।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
May 6, 2026, 02:26 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर। भारत को कमजोर करने की साजिश रचने वाले शत्रु विभिन्न प्रकार के नए ब्यूह रचने में लगे हैं। इन शत्रुओं की पहचान कर उन्हें परास्त करना हमारी जिम्मेदारी है। नारद मुनि ने जिस प्रकार हमेशा स्वकालीन धर्म का पालन किया, हमें भी उनसे सीख लेकर उसी तरह स्वकालीन धर्म की पुनः स्थापना करनी होगी। नई पीढ़ी को इसके लिए तैयार करना होगा ताकि वे देश के हित में हमेशा खड़े रहें। यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी ने विश्व संवाद केंद्र,  भुवनेश्वर द्वारा राजधानी में आयोजित नारद जयंती कार्यक्रम और नारद सम्मान प्रदान समारोह में कहीं।

स्थानीय जयदेव भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के संस्कृति, खेल एवं युवा मामलों के मंत्री सूर्यवंशी सूरज की उपस्थिति में वरिष्ठ पत्रकार प्रसन्न पति को उनके जीवनव्यापी साधना के लिए नारद सम्मान से सम्मानित किया गया। अपने उद्बोधन में प्रदीप जोशी ने कहा कि नारद भारत के संवाद के आदर्श हैं। भारत की दृष्टि, विचार और स्वभाव के पुनर्जागरण के लिए नारद मुनि का स्मरण आवश्यक है। नारद सभी का कल्याण चाहने वाले थे; वे सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी और सार्वभौमिक थे। हमें अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित स्वभाव और दृष्टि को फिर से जागृत करना होगा।


उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता भारत का मूल आधार है और यही इसकी विशेषता है। यही कारण है कि भारतीय चिंतन पूरे विश्व का कल्याण चाहता है और पूरे विश्व को परिवार मानता है। इसी धारा को आगे बढ़ाने के लिए आद्य शंकराचार्य से लेकर अनेक संत महात्मा आए हैं। इस धारा को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है।

जोशी ने कहा कि पिछले एक से डेढ़ सौ वर्षों में भारत में एक धारा भी दिखाई दे रही है जो विदेशी विचारों से संचालित हो रही है। उन्होंने 1905 में बंग भंग, 1906 में मुसलिम लीग की स्थापना, खिलाफत आंदोलन और वंदे मातरम के गान के छोटा करने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हमारे आस्था के केंद्रों पर लगातार हमले हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी ओर एक धारा है जो राष्ट्रत्व की भावना को प्रखर करने का प्रयास कर रही है। स्वामी विवेकानंद ने पूरे देश में घूमने के बाद विदेश गये औऐर वहां के लोगों को इस बात को समझाया कि जो कुछ भी गलत हो रहा है, उसके लिए जिम्मेदार आप लोग हैं।
जोशी ने बताया कि हिंदुत्व और राष्ट्रत्व की भावना समाज में अपनापन पैदा करती है। इसी विचार को समाज में और फैलाने की जरूरत है।


उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में हुए अच्छे कार्यों का उल्लेख किया, जैसे धारा 370 का हटना, अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण और नक्सलवाद का अंत। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि कई विषय ऐसे हैं जिन पर हमें अभी भी काम करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत को कमजोर करने के लिए विदेशों से सुनियोजित तरीके से षडयंत्र किए जा रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में अमेरिका में 22 विश्वविद्यालयों ने “डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया था।

भारत को कमजोर करने वाली शक्तियाँ अब विभिन्न तरीकों से अपने कार्यों को अंजाम देने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए वे आक्रमणकारियों का महिमामंडन कर रहे हैं, जिसे “ग्लोरिफिकेशन ऑफ द आड” कहा जाता है। यह सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है, और भारत पर आक्रमण करने वाले आक्रांताओं जैसे औरंगजेब और अकबर को महान बताने का प्रयास किया जा रहा है।


श्री जोशी ने कहा कि साथ ही, ये शक्तियाँ “डिआईकोनाइजेशन ऑफ इंडियन आइकन” का कार्य भी कर रही हैं। भारत के नायकों को खलनायकों के रूप में पेश करने का प्रयास किया जा रहा है। यह कार्य पहले भी होता रहा है; उदाहरण के लिए, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को “तोjo का कुत्ता” कहकर संबोधित किया गया था, और स्वामी विवेकानंद के बारे में भी गलत बातें कही गई थीं।

उन्होंने जापान, जर्मनी, और इस्राइल का उदाहरण देते हुए बताया कि इन देशों की स्थिति कुछ साल पहले अच्छी नहीं थी। लेकिन इन्होंने अपने दृढ़ निश्चय के बल पर आगे बढ़ने में सफलता पाई। इन देशों के लोगों के बीच भी मतभेद होते हैं, लेकिन जब राष्ट्र की बात आती है, तो वे राष्ट्र को पहले रखते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये देश ऐसा कर सकते हैं, तो भारत क्यों नहीं कर सकता? कार्यक्रम में राज्य के उच्च शिक्षा, युवा और खेल मामलों तथा संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि नारद मुनि के पास वाणी और बीणा का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का धर्म देवर्षी नारद से सीखना चाहिए, क्योंकि वे लोक कल्याण के लिए कार्य करते थे। उन्होंने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे जो देखें उसकी जांच कर सच्चाई को निर्भीकता के साथ लिखें। लेकिन अब देखा जा रहा है कि कुछ लोग एजेंडा आधारित पत्रकारिता कर रहे हैं, जिसका विरोध होना चाहिए।

इस कार्यक्रम का संचालन अध्यापक निरंजन पाढ़ी की अध्यक्षता में किया गया। संगठन के संपादक साईप्रसाद दास ने विवरण प्रस्तुत किया, सिंधु सागर महान्ति ने कार्यक्रम का संयोजन किया, जबकि दुश्मन्त कुमार बारिक ने परिचय प्रदान किया, शिव प्रसाद नायक ने मानपत्र का पाठ किया, और जगदानन्द पटनायक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर यूनिट-8 सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। इंजीनियर सुदर्शन दास, ज्ञानेंद्र कुमार नायक, इंजीनियर प्रभाकर बेहरा, बिपिन बेहरा, सौमेंद्र जेना, तपेश दास, भद्रसेन स्वाईं, अच्युत बिश्वाल, नारायणदास माओतावाले, निहार रंजन पति, सूर्यकांत साहू, अंशुमान मार्था, सुमंत कुमार पंडा, मनिंद्र सुंदर दास, निरंजन नायक सहित अन्य ने कार्यक्रम के संचालन में सहयोग किया।

Topics: RSSRashtriya Swayamsevak SanghSanghRSS Pradeep JoshiNarad Jayanti Program in OdishaNarad Samman Presentation Ceremony in OdishaPradeep Joshi
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