महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ में हिंदू महिलाओं के यौन शोषण और जबरन कन्वर्जन मामले में मुख्य आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। नासिक की विशेष अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता वास्तव में बहुआयामी है। पीड़िता को सुनियोजित तरीके से बहला-फुसलाकर उसका ब्रेन वॉश करना और उसे मलेशिया भेजने की साजिश प्रतीत होती है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी ने सोमवार (4 मई) को अपने आदेश कहा कि इस मामले की तह तक जाने के लिए हिरासत में लेकर पूछताछ करना आवश्यक है। रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से पता चलता है कि पीड़िता का नाम हानिया बदलने के बाद निदा खान उसे मलेशिया भेजना चाहती थी।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में इस बात का भी उल्लेख किया कि पीड़िता को किसी भी धर्म को मानने और अपनी पसंद का नाम रखने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उसे इसके लिए बहकाया जाए और वह भी एक सुनियोजित साजिश के तहत।
एफआईआर में मुख्य आरोपित निदा खान पर गंभीर आरोप
नासिक टीसीएस यौन शोषण और जबरन कन्वर्जन के आरोप में आठ लोगों पर एफआईआर दर्ज होने के करीब 30 दिन बाद भी इस मामले की मुख्य आरोपित निदा खान फरार है। निदा खान ने पीड़िता को बुर्का पहनने, कलमा पढ़ने, रोजा रखने और नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया। इसके लिए उसने पीड़िता के फोन में इस्लामिक एप्स इंस्टॉल किए और उसे मजहबी रील के लिंक भी भेजे थे। विशेष जांच दल (SIT) ने निदा खान को इस पूरे कन्वर्जन सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार बताया है। उस पर 18 से 25 वर्ष की युवतियों को टारगेट कर उन्हें कन्वर्जन के लिए उकसाने का आरोप है। निदा खान ने इस मामले में पुलिस का सहयोग करने के बजाय गर्भवती होने का कारण देते हुए नासिक सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी।
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दानिश शेख, तौसीफ के साथ मिलकर पीड़िता को धमकाया
पुलिस के अनुसार, दानिश शेख ने शादी का झूठा वादा कर पीड़िता का यौन उत्पीड़न किया। तौसीफ ने बार-बार उससे यौन संबंध बनाने का दवाब बनाया और उसे धमकी दी कि वह शेख के साथ संबंध को उसके परिवारवालों के सामने उजागर कर देगा। देवलाली पुलिस स्टेशन में निदा खान और उसके दो अन्य सह-आरोपितों दानिश शेख, तौसीफ पर विवाह का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया है।
पीड़िता का हिंदू नाम बदलकर हानिया रखा
एफआईआर के अनुसार, निदा खान ने अपने दोनों सह-आरोपितों के साथ मिलकर पीड़िता को डरा-धमकाकर और बार-बार उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाकर उसका कन्वर्जन कराने का प्रयास किया। यही नहीं उसने पीड़िता का हिंदू नाम बदलकर हानिया रख दिया और उसे मलेशिया भेजने की भी योजना थी। इन परिस्थितियों में यह पता लगाने के लिए हिरासत में लेकर पूछताछ करना आवश्यक है कि निदा खान के मलेशिया और मालेगांव से कैसे लिंक हैं? क्या कोई अंतरराष्ट्रीय गिरोह भी इसमें शामिल है और क्या आवेदक निदा खान इससे जुड़ी हुई है?
कन्वर्जन की बड़ी साजिश का खुलासा
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नासिक की टीसीएस मामले की जांच में यह भी पाया गया है कि कंपनी में नौकरी छोड़ने के बाद भी निदा खान इस मामले के दूसरे आरोपियों के संपर्क में थी। मोबाइल कॉलिंग डिटेल्स (CDR) के मुताबिक, निदा खान लगातार आरोपियों से बातचीत कर रही थी। इस बातचीत से यह संदेह और पक्का हो गया कि कंपनी में कन्वर्जन की बड़ी साजिश रची जा रही थी। एसआईटी को आरोपी दानिश शेख के मोबाइल फोन से भी अहम सुराग मिले थे। उन्हें दानिश के फोन में कई संदिग्ध फोटो और वीडियो मिले हैं, जिसका गहराई से विश्लेषण किया जा रहा है।
पीड़िता पर अजमेर के मौलाना से मिलने का दवाब बनाया
एक पीड़िता ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि उसे न केवल प्रताड़ित किया गया, बल्कि आरोपी तौसीफ ने उस पर अजमेर के एक खास मौलाना से मिलने के लिए लगातार दबाव बनाया। पीड़िता को उसने भरोसा दिलाया था कि मौलाना से मिलने पर उसे संतान की प्राप्ति होगी। तौसीफ पर आरोप है कि उसने पहले भी हिंदू महिला पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाया था। वह मुस्लिम लड़कियों के साथ अच्छे से पेश आता था। लेकिन ऑफिस मीटिंग के दौरान वह हिंदू लड़कियों को जानबूझकर छूता था। यही नहीं लड़कियों की शादीशुदा जिंदगी में क्या चल रहा है, आरोपी इस पर भी ध्यान देता था और उन पर कमेंट करता था।















