कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा की पत्नी रिनकी सरमा भुइयां पर झूठे आरोप लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी है। हालांकि, इसके साथ ही शीर्ष अदालत सख्त शर्त पर ये जमानत दी है कि अगर पुलिस उन्हें बुलाती है तो उन्हें थाने में पेश होना होगा। खेड़ा विदेश भी नहीं जा सकेंगे।
क्या है पूरा मामला?
मामला कुछ यूं है कि 4 अप्रैल 2025 को पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिनकी सरमा पर गंभीर आरोप लगाया था कि सरमा के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं, वे कुछ अवैध गतिविधियों में शामिल हैं और दुबई में उनके नाम पर लग्जरी प्रॉपर्टी है, जो एक अमेरिकी राज्य की कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है। खेड़ा ने कुछ दस्तावेज और फोटो भी दिखाए थे।
रिंकी सरमा ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया। उनके परिवार का कहना था कि ये दस्तावेज AI से बने फर्जी हैं और पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप्स ने इन्हें फैलाया है। इसके बाद गुवाहाटी पुलिस में FIR दर्ज हुई। FIR में मानहानि, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे आरोप लगे। इस मामले में विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया था कि खेड़ा के आरोप बेबुनियाद थे।
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
उल्लेखनीय है कि FIR दर्ज होने के बाद पवन खेड़ा ने पहले तेलंगाना हाईकोर्ट से ट्रांजिट अग्रिम जमानत ली थी। असम पुलिस उनके दिल्ली स्थित घर पहुंची थी, लेकिन वे वहां नहीं मिले। बाद में उन्होंने गुवाहाटी हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत मांगी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि खेड़ा फ्लाइट रिस्क हैं और मामले में गंभीर आरोप हैं, इसलिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
इसके बाद खेड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 17 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट की ट्रांजिट बेल पर स्टे लगा दिया था। गुरुवार को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज, 1 मई 2026 को फैसला सुना दिया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या बहस हुई?
खेड़ा की तरफ से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह मामला ज्यादातर मानहानि से जुड़ा है। उन्होंने तर्क दिया कि गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है। अगर अंत में सजा भी होती है तो भी अरेस्ट क्यों? सिंघवी ने कहा कि बिना अरेस्ट के भी जांच हो सकती है। उन्होंने असम सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पर कुछ तीखी टिप्पणियां भी कीं।
असम सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि खेड़ा को हिरासत में पूछताछ की जरूरत है ताकि पता चले कि उन्होंने जो दस्तावेज दिखाए, वे कहां से आए। क्या वे फर्जी हैं? क्या कोई विदेशी तत्व इसमें शामिल है? उन्होंने चुनाव के समय इस मामले को उठाने का भी जिक्र किया। बहरहाल, खेड़ा को कड़ी शर्तों के साथ अग्रिम जमानत मिल गई है।















