म्यांमार: आंग सान सू की को जेल से हाउस अरेस्ट में भेजा गया, सजा में दो बार छूट
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म्यांमार: आंग सान सू की को जेल से हाउस अरेस्ट में भेजा गया, सजा में दो बार छूट

म्यांमार में सैन्य सरकार ने आंग सान सू की को जेल से हाउस अरेस्ट में भेज दिया है। 80 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता की सजा में दो बार छूट दी गई।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
May 1, 2026, 06:32 am IST
inविश्व

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद पहली बार देश की पूर्व नेता आंग सान सू की को जेल से हाउस अरेस्ट में भेज दिया गया है। सू की पहले भी सैन्य शासन के दौरान कुल 15 साल तक नजरबंद रही थीं। सू की 80 साल की हैं और 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से हिरासत में हैं।

2021 में हुआ था तख्तापलट

फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया। आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को हटा दिया गया। इसके बाद देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन गई, जिसमें कई लोग मारे गए। सू की को तुरंत हिरासत में ले लिया गया। उनके ठिकाने लंबे समय तक स्पष्ट नहीं थे। उन पर भ्रष्टाचार, चुनावी धांधली भड़काने और राज्य के रहस्यों का उल्लंघन जैसे कई आरोप लगाए गए। अदालत ने उन्हें कुल 33 साल की सजा सुनाई, जिसे बाद में 27 साल कर दिया गया। उनके समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक बताते हैं, ताकि उन्हें सत्ता से दूर रखा जा सके।

सजा में कमी और हाउस अरेस्ट

बहरहाल, बीते 17 अप्रैल को आम माफी में उनकी सजा का छठा हिस्सा कम किया गया। उसी समय उनके सहयोगी और पूर्व राष्ट्रपति विन म्यिंत को रिहा कर दिया गया। गुरुवार को फिर एक और माफी में सजा का एक और छठा हिस्सा कम किया गया। राज्य टीवी MRTV ने बताया कि सू की की बाकी सजा अब किसी निर्धारित आवास पर पूरी की जाएगी। इसे बौद्ध दिवस मनाने, मानवीय संवेदना दिखाने और राज्य की दया के रूप में बताया गया। उन्होंने नायप्यीडॉ की मुख्य जेल से उन्हें हाउस अरेस्ट में शिफ्ट करने की घोषणा की।

मीडिया ने उनकी एक तस्वीर भी दिखाई। उसमें वे लकड़ी की बेंच पर बैठी हैं और दो वर्दीधारी व्यक्ति उनके दोनों तरफ हैं। यह कई सालों में उनकी पहली सार्वजनिक तस्वीर है।

पहले भी हाउस अरेस्ट

सू की पहले भी सैन्य शासन के दौरान कुल 15 साल हाउस अरेस्ट में रही थीं। उस समय वे यांगून के इन्या झील किनारे अपने परिवार के घर में रहती थीं। अब फिर उन्हें इसी तरह के आवास पर रखा जाएगा, लेकिन जगह अभी साफ नहीं बताई गई।

परिवार और कानूनी टीम की प्रतिक्रिया

सू की के बेटे किम आरिस ने कहा कि उन्हें अभी भी नहीं पता कि उनकी मां कहां हैं और उनकी सेहत कैसी है। उन्होंने कहा, “मुझे यह भी नहीं पता कि वे जिंदा हैं या नहीं। अगर जिंदा हैं तो जिंदगी का प्रमाण दें।” उन्होंने बताया कि सालों से मां से कोई सीधा संपर्क नहीं हुआ। सिर्फ कभी-कभी दूसरों के जरिए उनके दिल, हड्डी और मसूड़ों की समस्या की खबर मिलती रही। उनकी कानूनी टीम ने कहा कि यह अच्छी खबर है कि हाउस अरेस्ट की पुष्टि हुई, लेकिन उन्हें सीधे कोई सूचना नहीं मिली। वे सिर्फ मीडिया से ही जान पाए।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफान डुजारिक ने कहा कि सजा को हाउस अरेस्ट में बदलना एक सार्थक कदम है। इससे सही राजनीतिक प्रक्रिया के लिए माहौल बन सकता है। उन्होंने जोर दिया कि म्यांमार में हिंसा तुरंत बंद होनी चाहिए और सबको शामिल करने वाला संवाद शुरू होना चाहिए।

सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग ने हाल ही में थाई विदेश मंत्री से कहा था कि सू की की देखभाल अच्छे से हो रही है और सरकार कुछ अच्छे कदम सोच रही है। आंग सान सू की म्यांमार की आजादी के नायक जनरल आंग सान की बेटी हैं। वे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हैं और लंबे समय से लोकतंत्र की आवाज रही हैं। अभी उनकी सजा का बाकी हिस्सा हाउस अरेस्ट में पूरा होगा।

Topics: म्यांमारजेलआंग सान सू की हाउस अरेस्टजुंटा शासन
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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