रोहिंग्या: शरणार्थी हैं या घुसपैठिए? सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई
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होम भारत

रोहिंग्या: शरणार्थी हैं या घुसपैठिए? सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या समुदाय की स्थिति पर अहम सुनवाई शुरू। क्या वे शरणार्थी हैं या अवैध प्रवासी? कोर्ट ने चार बड़े सवाल उठाए, जो उनकी नियति तय करेंगे।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 1, 2025, 08:05 am IST
inभारत
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

भारत में रोहिंग्या समुदाय के लोगों की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई शुरू हुई है। म्यांमार से आए रोहिंग्या, जो दशकों से हिंसा और उत्पीड़न से बचने के लिए भारत में शरण लिए हुए हैं, अब एक बड़े सवाल के केंद्र में हैं: क्या वे शरणार्थी हैं, जिन्हें सुरक्षा और अधिकार मिलने चाहिए, या अवैध घुसपैठिए, जिन्हें देश से बाहर किया जाना चाहिए? गुरुवार, 31 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चार बड़े सवालों को चिह्नित किया, जिनका जवाब उनकी नियति तय करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने उठाए ये चार सवाल

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनवाई के दौरान इस मामले को व्यवस्थित करने के लिए चार मुख्य सवालों पर ध्यान केंद्रित किया। पहला और सबसे बड़ा सवाल है: क्या रोहिंग्या को शरणार्थी माना जाए या अवैध प्रवासी? कोर्ट ने कहा कि यह तय होने के बाद ही बाकी मुद्दों पर विचार होगा। अगर वे शरणार्थी हैं, तो दूसरा सवाल है कि उन्हें भारत में कौन से अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए। तीसरा, अगर वे अवैध प्रवासी साबित हुए, तो क्या केंद्र और राज्य सरकारें उन्हें कानून के तहत वापस भेजने के लिए बाध्य हैं? और चौथा, अगर वे अवैध हैं, तो क्या उन्हें अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखा जा सकता है, या उन्हें कुछ शर्तों के साथ रिहा करने का अधिकार है?

रोहिंग्या की स्थिति और दावे

रोहिंग्या म्यांमार के राखाइन प्रांत से ताल्लुक रखने वाला एक अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय है, जिसे वहां भारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। मानवाधिकार संगठन उन्हें दुनिया के सबसे सताए गए समुदायों में से एक मानते हैं। भारत में करीब 40,000 रोहिंग्या बिना दस्तावेज़ों के रह रहे हैं, जबकि 14,000 संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR) के साथ पंजीकृत हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि रोहिंग्या को गैर-वापसी (नॉन-रिफाउलमेंट) के सिद्धांत के तहत म्यांमार नहीं भेजा जा सकता, जहां उनकी जान को खतरा है।

शरणार्थी शिविरों की स्थिति

सुनवाई में कोर्ट ने यह भी पूछा कि जो रोहिंग्या हिरासत में नहीं हैं और शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं, क्या उन्हें बुनियादी सुविधाएं जैसे पीने का पानी, स्वच्छता और शिक्षा मिल रही है? वकीलों ने बताया कि कई शिविरों में हालात बदतर हैं, जहां भोजन, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है।

इसे भी पढ़ें: विपक्ष का प्रोपागेंडा फेल! EVM-VVPAT टेस्ट में कोई गड़बड़ी नहीं, चुनाव आयोग का दावा

कानूनी और नीतिगत जटिलताएं

केंद्र सरकार का कहना है कि भारत 1951 के शरणार्थी सम्मेलन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, इसलिए रोहिंग्या को शरणार्थी मानने की बाध्यता नहीं है। सरकार उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानती है और विदेशी अधिनियम 1946 के तहत कार्रवाई की बात करती है। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सभी को जीवन का अधिकार है, चाहे वे नागरिक हों या नहीं।

Topics: शरणार्थीSupreme Courtअवैध प्रवासीhuman rightsillegal migrantsरोहिंग्यासंविधान अनुच्छेद 21Rohingyarefugee campsभारतnon-refoulement principleसुप्रीम कोर्टConstitution Article 21म्यांमारmyanmarIndiaशरणार्थी शिविरrefugees
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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