कांग्रेस पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव (उत्तर प्रदेश 2027) की तैयारी कर ली है. कांग्रेस ने 2021 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में वाम दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और पार्टी शून्य पर आ गई थी. 1952 के बाद प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ जब कांग्रेस पश्चिम बंगाल में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही थी.
शून्य से शिखर की चुनौती : 2021 की हार
कांग्रेस पार्टी के लिए 2021 का परिणाम बहुत ही पीड़ादायक था क्योंकि उसके पिछले विधानसभा चुनाव में वह मुख्य विपक्षी दल थी. कांग्रेस पार्टी के अब्दुल मन्नान पिछले विधानसभा में पार्टी के विपक्ष के नेता थे मगर उसके बाद कांग्रेस पार्टी शून्य सीट पर आ गई थी. कांग्रेस ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में किसी भी दल के साथ गठबंधन करने की कोशिश नहीं की और शुरुआत से ही अपने बूते चुनाव लड़ने पर आमादा थी.
2024 का लोकसभा का चुनाव कांग्रेस पार्टी ने धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गठबंधन में वाम दलों के साथ लड़ा था. मगर इस बार कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश को निशाने पर रखकर 2024 के गठबंधन को जीवित रखने का कोई प्रयास नहीं किया था. क्या कांग्रेस वास्तव में गठबंधन धर्म निभा रही है?
बंगाल में ममता पर हमला, यूपी में अखिलेश को संदेश?
क्योंकि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने वर्तमान के पांच प्रदेशों के चुनाव में सबसे संजीदा होकर पश्चिम बंगाल में ही चुनाव लड़ा जबकि उसे इस तरह की तैयारी केरल और पुडुचेरी में दिखानी चाहिए थी. कांग्रेस ने ममता बनर्जी के खिलाफ विषवमन में कोई कमी नहीं की है.
सवाल है कि आखिर पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी कौन सा निशाना साध रही थी?
कांग्रेस का असल निशाना 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर है. उसने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी पर निशाना साधकर उत्तर प्रदेश में अपने सहयोगी अखिलेश यादव को संदेश दे दिया है कि पार्टी को सम्मानजनक सीट और व्यवहार नहीं मिलने पर पार्टी पश्चिम बंगाल की तरह ही अकेले भी चुनाव में उतर सकती है.
मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर फोकस : क्या सपा के वोट बैंक में होगी सेंधमारी?
कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बाहुल्य जिलों जैसे मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जिलों में ही अपना मुख्य चुनावी क्षेत्र बनाया था. ममता बनर्जी के मुस्लिम वोटबेंक में सेंधमारी करने का कोई भी प्रयास और मौका नहीं छोड़ा है.
कांग्रेस ने असल में यह संदेश अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को दिया है कि अगर वो ममता बनर्जी की तरह कांग्रेस पार्टी का अनदेखी करते रहे तो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी एकला चलो की नीति पर चलते हुए मुस्लिम बाहुल्य इलाको में सपा के मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी करने की योजना पर काम कर सकती है.
2024 की दोस्ती और 2026 की दूरी : इंडी गठबंधन का भविष्य क्या है?
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में अच्छे प्रदर्शन के बाद सपा ने कांग्रेस पार्टी की काफी अनदेखी की है. 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के बदले आम आदमी पार्टी को समर्थन किया था. वर्तमान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी सपा ने कांग्रेस पार्टी के बदले तृणमूल कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया है.
अखिलेश यादव के कारण तेजस्वी यादव भी ममता बनर्जी के समर्थन में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचार किया है.
विदित हो कि 2024 के लोकसभा के चुनाव में सपा और कांग्रेस ने अपने गठबंधन में भदोही लोकसभा की सीट तृणमूल कांग्रेस पार्टी को लड़ने के लिए गठबंधन में आवंटित किया था मगर लोकसभा चुनाव के बाद इन दलों ने लगभग कांग्रेस पार्टी से दूरी बना ली है.
















