नैनीताल: घोड़ाखाल का गोल्ज्यू देवता मंदिर अपनी हज़ारों घंटियों के लिए खास तौर पर जाना जाता है। हर घंटी अपने आप में एक कहानी समेटे हुए है, किसी की इच्छा, किसी की शिकायत, और किसी का इंसाफ। यहां विराजमान गोल्ज्यू देवता को कुमाऊं इलाके में इंसाफ के देवता के तौर पर पूजा जाता है। पारंपरिक तौर पर, लोग अपनी परेशानियां या रिक्वेस्ट कागज पर लिखकर मंदिर में टांग देते हैं।
जब उनकी इच्छाएं पूरी होती हैं या उन्हें इंसाफ मिलता है, तो वे आकर घंटी चढ़ाते हैं। यही वजह है कि आज पूरा मंदिर हज़ारों घंटियों से सजा हुआ है, जो लगातार बजती रहती हैं, और आस्था से गूंजती रहती हैं। इस मंदिर का पूरे इलाके में गहरा असर है। आज भी कई लोग यहां अपनी अर्जी लगाते हैं, साथ ही कोर्ट-कचहरी भी। लोकल कम्युनिटी में यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का सेंटर नहीं है, बल्कि नैतिक इंसाफ और विश्वास का सिंबल है।
जब पहाड़ों की शांति के बीच ये हज़ारों घंटियां एक साथ बजती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हर आवाज़ इंसाफ की कहानी कह रही हो। इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत कहते हैं कि भगवान कृष्ण ने गोल्ज्यू दको न्याय का देवता और कुमाऊं का रक्षक नियुक्त किया था। इसी वजह से घोड़ाखाल मंदिर न्याय के देवता के मंदिर के रूप में मशहूर है।

















