बेंगलुरु । कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के कृपानिधि कॉलेज (Krupanidhi College) में ‘कॉमन एंट्रेंस टेस्ट’ (CET) देने आए हिंदू छात्रों को कथित तौर पर अपना ‘जनेऊ’ (पवित्र धागा) उतारने के लिए मजबूर किया गया। जिसके बाद से ही इस पूरी घटना को लेकर लोगों में आक्रोश व्यापत है। सोशल मीडिया के माध्यम से लोग अपना आक्रोश व्यक्त भी कर रहे हैं।
वहीं इस पूरी घटना को लेकर छात्र संगठन ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ (ABVP) ने भी नाराजगी जताते हुए इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर कर इसे धार्मिक भावनाओं और संवैधानिक मूल्यों पर हमला करार दिया है।
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“धार्मिक भावनाओं का अपमान”: ABVP
‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ (ABVP) ने इस पूरी घटना पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस कृत्य को “अस्वीकार्य और असंवैधानिक” बताया है।
विद्यार्थी परिषद का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह का माहौल बनाना छात्रों की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। ABVP ने आरोप लगाया कि यह एक “दुर्भावनापूर्ण और दोहरी मानसिकता” को दर्शाता है, जो शिक्षा के केंद्रों को राजनीतिक और धार्मिक पूर्वाग्रह का अड्डा बना रहा है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
बता दें कि यह घटना 23 अप्रैल को मडिवाला स्थित कृपानिधि कॉलेज में हुई। कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आनंद सुधीर राव नामक छात्र और उनके अन्य साथियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले जनेऊ उतारने को कहा गया।
जिसका छात्रों ने धार्मिक आधार पर विरोध किया, लेकिन अधिकारियों के दबाव और परीक्षा छूटने के डर के कारण उन्हें अंततः इसे उतारना पड़ा।
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“छात्रों की धार्मिक मान्यताओं और प्रतीकों को निशाना बनाना अत्यंत निंदनीय है। जनेऊ हटाने के लिए मजबूर करना न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि एक विशेष विचारधारा को थोपने का प्रयास है।” — डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी, राष्ट्रीय महासचिव, ABVP
कर्नाटक सरकार से जवाबदेही की मांग
वहीं ABVP ने इस पुरु घटना को लेकर कर्नाटक सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि सरकार ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रही है जो समावेशी शिक्षा के खिलाफ हैं। ABVP ने कर्नाटक सरकार से मांग की है कि-
- इस मामले की उच्च स्तरीय जांच (High-level inquiry) की जाए।
- दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय किए जाएं।
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