सिर्फ टी.सी.एस. में ही हिंदुओं के साथ अन्याय नहीं हो रहा है। इस सूची में चश्मा उद्योग की एक प्रमुख कंपनी ‘लेंसकार्ट’ का भी नाम जुड़ गया है। पिछले दिनों ‘लेंसकार्ट’ के कर्मचारियों से जुड़े कुछ नियमों को लेकर एक विवाद पैदा हुआ। सोशल मीडिया में वायरल हुए एक दस्तावेज के अनुसार ‘लेंसकार्ट’ में काम करने वाले कर्मचारी मस्तक पर तिलक नहीं लगा सकते और हाथ में कलावा नहीं बांध सकते, वहीं दूसरी ओर उसी नियमावली में हिजाब और पगड़ी को छूट दी गई है। साफ दिखाई देता है कि कंपनी ने यह नियम केवल हिंदू कर्मचारियों के लिए बनाया है। यही कारण है कि जैसे ही इस नियमावली की जानकारी हुई भोपाल, सूरत, मुंबई जैसे अनेक शहरों में हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के लोग ‘लेंसकार्ट’ के विरोध में सड़कों पर उतर पड़े।
इस विरोध को देखते हुए ‘लेंसकार्ट’ के संस्थापक पीयूष बंसल की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि यह दस्तावेज पुराना है और वर्तमान नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता। भले ही पीयूष बंसल सफाई में कुछ भी कहें, लेकिन ‘लेंसकार्ट’ के पुराने कर्मचारी ही उनकी असलियत को बता रहे हैं। सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो में स्वयं को कंपनी का पूर्व कर्मचारी बताने वाले एक व्यक्ति ने दावा किया कि धार्मिक प्रतीकों को न हटाने के कारण उसे प्रशिक्षण कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया और बाद में नौकरी से भी वंचित होना पड़ा। आरोपों के अनुसार, उन्हें शिखा हटाने, तिलक मिटाने और धार्मिक पहचान से जुड़े प्रतीकों को त्यागने के लिए कहा गया था। पीयूष बंसल को बताना चाहिए कि उन्होंने अपने कर्मचारियों के लिए ऐसा नियम क्यों और किसके कहने पर बनाया!
टेक महिंद्रा में हिंदू विरोधी माहौल
महिंद्रा समूह की आई.टी. कंपनी टेक महिंद्रा भी हिंदू विरोधी कार्य के लिए सुर्खियों में है। 12 अप्रैल को सोशल मीडिया में कंपनी की एक महिला कर्मचारी की पोस्ट वायरल हुई है। इसमें महिला ने कंपनी कीे एक बी.पी.ओ. यूनिट में धार्मिक आधार पर पक्षपात और अलग माहौल होने का दावा किया है। उसने पोस्ट में रमजान के दौरान विशेष सुविधाओं और इफ्तार पार्टी का भी जिक्र किया है। यानी टेक महिंद्रा में भी हिंदू विरोधी लोग हैं।
एनजीओ जिहाद
इन दिनों नागपुर में एक एजजीओ से जुड़ा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके संचालक रियाज फाजिल काजी पर गंभीर आरोप लगे हैं। इन दिनों फाजिल पुलिस की गिरफ्त में है और जांच चल रही है। यह मामला मनकापुर पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायतों के बाद सामने आया, जिसमें एक 23 वर्षीय महिला ने उत्पीड़न और शोषण के आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, पीड़िता ने दावा किया है कि वह 2023 से इस एनजीओ में कार्यरत थी और इस दौरान उसे कई बार मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया गया। आरोपों में कहा गया है कि 18 जुलाई, 2024 को, जो उसका जन्मदिन था, आरोपी ने उसे अपने कमरे में बुलाकर अनुचित व्यवहार किया और इस दौरान सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। पीड़िता का कहना है कि नौकरी जाने के डर से वह उस समय खुलकर विरोध नहीं कर सकी।
कोलकाता और चैन्ने में भी गड़बड़ी
एक जानकारी के अनुसार टी.सी.एस. के चैन्ने और कोलकाता कार्यालय के बारे में भी नासिक जैसे कुछ मामले सामने आए हैं। 17 अप्रैल को कोलकाता कार्यालय से संबंधित एक पोस्ट के वायरल होने के बाद यह प्रकरण व्यापक चर्चा में आ गया। इस पोस्ट में एक अज्ञात यूजर ने अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए यह दावा किया कि टी.सी.एस. की गीताांजलि शाखा में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने हाल ही में कथित रूप से कन्वर्जन किया था और उसके बाद वह अचानक लापता हो गई। पोस्ट में आगे यह भी उल्लेख किया गया है कि लगभग उसी समय के आसपास कोलकाता स्थित एक अन्य आई.टी. कंपनी से भी इसी प्रकार की एक घटना सामने आने की बात कही गई है। पोस्ट करने वाले व्यक्ति ने अपनी पहचान उजागर न करने की अपील की है।
सर्फ एक्सल की ‘गंदगी’
11 मार्च, 2019 को हिंदुस्तान यूनिलिवर के डिटर्जेंट ब्रांड ‘सर्फ एक्सल’ का एक विज्ञापन सामने आया था, जिसे देखते ही देखते लोगों के बीच बहस छिड़ गई थी। इस विज्ञापन में एक छोटी बच्ची को दिखाया गया है कि वह होली के दौरान एक मुस्लिम लड़के को रंगों से बचाते हुए उसके साथ चलती है, ताकि वह साफ कपड़ों में नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद पहुंच सके। यानी विज्ञापन बनवाने वाले के मन में कहीं न कहीं यह बात है कि होली के दौरान हिंदू किसी की मजहबी भावनाओं का ध्यान नहीं रखते हैं, जबकि सचाई सब जानते है।
एचडीएफसी बैंक में बिंदी की गलत बनावट 17 अक्तूबर, 2023 को एचडीएफसी बैंक से जुड़ा एक विज्ञापन सार्वजनिक होते ही विवादों के केंद्र में आ गया। बैंक के ‘विजिल आंटी’ अभियान के तहत जारी इस विज्ञापन में एक महिला पात्र को बिंदी के साथ प्रस्तुत किया गया था, किंतु इस बिंदी को जिस रूप में डिजाइन किया गया था, उसने पूरे प्रकरण को विवादित बना दिया। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे “#NoBindi” अभियान से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि यह हिंदू परंपराओं के खिलाफ संदेश देता है।
लोगों का मानना था कि बिंदी केवल एक सजावट नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक है, और उसे ‘निषेध’ के रूप में दिखाना संवेदनशीलता की कमी दर्शाता है। इसी दौरान एच.डी.एफ.सी. बेंक का एक अन्य विज्ञापन भी चर्चा में आया, जो ईद से जुड़ा था। इसमें इबादत और सजदे के जरिए मन्नत पूरी होने का संदेश दिखाया गया था। इन दोनों विज्ञापनों की तुलना करते हुए कुछ लोगों ने बैंक पर वैचारिक पक्षपात के आरोप लगाए। उनका कहना था कि एक ओर हिंदू प्रतीकों को नकारात्मक रूप में दिखाया गया, जबकि दूसरी ओर दूसरे मत-पंथ के प्रतीकों को सकारात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
‘फैबइंडिया’ का कारनामा
20 अक्तूबर, 2021 को ‘फैबइंडिया’ ने दीपावली के अवसर पर अपने परिधान संग्रह को ‘जश्न-ए-रिवाज’ नाम दिया था। यह
नाम सामने आते ही विवाद बढ़ गया। सोशल मीडिया में कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि दीपावली जैसे प्रमुख हिंदू त्योहार के लिए उर्दू-प्रभावित नाम क्यों चुना गया! यह विवाद तेजी से बढ़ा और कंपनी को आलोचना का सामना करना पड़ा। इसके बाद कंपनी को यह नाम वापस लेना पड़ा। इन घटनाओं से साबित होता है कि इन कंपनियों में भी ऐसे तत्व हैं, जिन्हें सनातन विचार पंसद नहीं है।

















