गाजा में बच्चों के साथ बलात्कार किया जा रहा है और फिर उन बलात्कार की घटनाओं के चलते उन्हें हमास में जुडने के लिए ब्लैकमेल किया जा रहा है या फिर उन्हें यह धमकी दी जा रही है कि उनके यौन उत्पीड़न को सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
उन्हें धमकी दी जाती है कि अगर उन्होनें अपना मुंह खोला तो उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा जाएगा और अगर परिजन शिकायत करने के लिए आते हैं तो पीड़ित बच्चों के परिजनों को धमकाया जाता है कि अगर उन्होनें मुंह खोला तो उन्हें इज़रायल समर्थक बताकर मरवा दिया जाएगा।
हमास का खौफनाक चेहरा : यौन शोषण को बनाया ब्लैकमेलिंग का हथियार
डेली मेल ने बहुत ही चौंकाने वाले खुलासे किये हैं। डेली मेल को गाज़ा स्थित ‘जुसूर न्यूज़’ से एक वीडियो सबूत मिले है, जिसमें बच्चों के परेशान करने वाले आरोप सामने आए हैं। ये आरोप विचलित करने वाले हैं और साथ ही वे यह भी दिखाते हैं कि कैसे बच्चों के साथ यौन शोषण करके पूरे परिवार को निशाना बनाया जाता है।
जो वीडियो डेली मेल के हाथ लगा है उसमें एक 9 साल के बच्चे और एक 10 साल के बच्चे की कहानी है, जो उस हैवानियत को बयान करती है, जो हमास बच्चों के साथ करता है।
मस्जिद की सीढ़ियों पर मासूमियत का कत्ल : 9 और 10 साल के बच्चों की आपबीती
नौ साल का बच्चा बताता है कि वह एक दिन मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए गया था और उस दिन असर की जमाज से पहले वह, जब वह कुरान पढ़ रहा था तो शेख आया। उस बच्चे ने कहा कि वे लोग एकसाथ कुरान पढ़ रहे थे और फिर उसने उससे कहा कि वह उसके साथ आए, वह उसे कुछ बढ़िया देना चाहता है और फिर वह बच्चा उसके साथ चला गया।
वह आदमी उसे रेस्टरूम्स में ले गया और वहाँ पर उसके कपड़े उतारे और उसके साथ गलत काम किया। फिर उस आदमी ने उस बच्चे को धमकी दी कि वह यह सब किसी को न बताए।
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एक और मामला एक दस वर्षीय बच्चे का है। उसमें भी वह यह सब बता रहा है कि कैसे वह बच्चा मस्जिद में सबसे पहले पहुँचने वाला हुआ करता था। और फिर एक दिन उसे एक शेख सीढ़ियों पर मिल गया। वह बच्चा भी सीढ़ियों पर गया और शेख ने उसके पैंट को नीचे खींचा और उसके साथ गलत काम करने लगा।
उस बच्चे के अनुसार उसके साथ लगातार यह हुआ और यह सिलसिला तब टूटा जब मस्जिद में आने वाले एक आदमी ने उन्हें टोका। उस बच्चे ने कहा कि वह डर गया था और फिर उसने भी अपने पैंट को खींचा और भाग गया। उसने यह भी कहा कि उसने मस्जिद जाना बंद कर दिया था, मगर उसने यह भी सुन रखा था कि उस आदमी ने ऐसा कई बच्चों के साथ किया था।
इमाम की हैवानियत और ‘अल कस्सम ब्रिगेड’ की धमकी
इस रिपोर्ट में एक तीसरे पीड़ित के पिता का भी बयान है। खान यूनुस में एक मस्जिद में एक तीसरे पीड़ित के 42 वर्षीय पिता ने बताया कि कैसे उस बच्चे की बदहवास माँ ने उन्हें काम से यह कहते हुए बुलाया था कि आपके बेटे के पूरे शरीर पर घाव हैं और खून आ रहा है।
वह घर भागा और जब उसने बच्चे से पूछा कि उसके ये चोटें कैसे लगीं तो उसने बताया कि मस्जिद के मुख्य इमाम ने उसके साथ ऐसा किया है।
जब उस दुखी पिता ने मस्जिद के इमाम से जाकर यह पूछा कि आखिर उसने यह सब उसके बेटे के साथ क्यों किया, तो पहले तो इमाम ने इनकार किया कि उसने ऐसा कुछ किया भी है।
“इजरायल का जासूस बताकर मार देंगे”: सच दबाने के लिए परिवारों का उत्पीड़न
मगर फिर उस डरे हुए पिता ने बताया कि कैसे इमाम ने उसे यह कहते हुए धमकाना शुरू कर दिया कि वह उसके घर पर अल कस्सम ब्रिगेड को उसके घर भेज देगा और वे उसे मार डालेंगे। और वाब भी ऐसी गोली बारी जो उसने देखी भी नहीं होगी। उस बच्चे के पिता ने बताया कि इमाम ने उससे कहा कि वह उसे इजरायल के सहयोगी के रूप में फंसा देगा।
और फिर उसके घर पर अल कस्सम ब्रिगेड के सदस्य भी ये और सभी को धमकाते हुए चेतावनी दी कि “अगर तुमने एक भी शब्द बाहर निकाला तो तुम्हारे पैर पर गोली मार दी जाएगी और तुम्हें तब तक पीटा जाएगा, जब तक कि तुम कर न जाओ। तुम और तुम्हारे परिवार को इस जमीन से मिटा दिया जाएगा।“
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उस बच्चे के पिता को यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि आखिर हुआ क्या है? एक डेर अल बलह के 39 वर्षीय एक और पिता ने यह बताया कि उनके बेटे का यौन शोषण भी एक इमाम ने किया था। जब उस पिता ने हमास सिक्युरिटी के पास इस घटना की शिकायत दर्ज कराई तो उन्होनें सारे आरोपों को नकारते हुए कहा कि वह अपना मुंह बंद रखे नहीं तो उसे इजरायल के सहयोगी होने के आरोप में मार दिया जाएगा।
कहा जाता है कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं।
‘मस्जिद टेनिस प्लेयर्स’ : हमास के संस्थानों में संस्थागत यौन शोषण का कड़वा सच
इस रिपोर्ट में एक पूर्व फिलिस्तीन सुरक्षा अधिकारी ने यह दावा किया कि हमास के मौलवी बलात्कार को छोटे बच्चों और उनके परिवारों को हमास के प्रति वफादार रहने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
गाजा से भागकर आए लेखक हमज़ा अबू होविदी का भी कहना है कि हमास द्वारा चलाए जा रहे संस्थानों में इस तरह का दुर्व्यवहार इतना ज़्यादा फैला हुआ है कि अरबी में इसके लिए एक खास शब्द भी है ‘Tennis players या Mosque Tennis players और उन्होनें यह भी कहा कि यह बहुत आम है।
परंतु दुर्भाग्य यही है कि ये सब रिपोर्ट्स विमर्श का हिस्सा नहीं बन पाती हैं।

















