इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने पहली बार गाजा युद्ध में मारे गए गाजावासियों की संख्या के बारे में आंकड़े दिए हैं। इजरायली सेना के आंकड़ों के मुताबिक 70,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। इसमें कुल मौतों का आंकड़ा है, जिसमें लड़ाके और आम नागरिक दोनों शामिल हैं। हालांकि, आईडीएफ ने स्पष्ट किया कि इसमें किसी स्वस्थ व्यक्ति की भुखमरी से मौत नहीं हुई है।
भुखमरी से मौत नहीं हुई
आईडीएफ ने साफ कहा कि युद्ध के दौरान किसी भी स्वस्थ व्यक्ति की मौत भुखमरी से नहीं हुई। उनका दावा है कि गाजा में भुखमरी नहीं हुई और कोई भी मौत सिर्फ भूख से नहीं हुई। उन्होंने कहा कि हमास ने कुछ समय के लिए सहायता ट्रकों को रोकने की कोशिश की थी। लेकिन उसके बावजूद कोई स्वस्थ इंसान भूख से नहीं मरा।
मानवीय सहायता के आंकड़े
आईडीएफ ने युद्ध के दौरान गाजा में पहुंचाई गई मदद के बारे में भी जानकारी दी। पूरे युद्ध में 1,12,000 सहायता ट्रक गाजा में भेजे गए। इनमें 17 लाख टन खाना और 18 लाख टन अन्य सामान शामिल था। आईडीएफ का कहना है कि यह मदद काफी थी और इससे भुखमरी जैसी स्थिति नहीं बनी।
संयुक्त राष्ट्र के दावों पर विवाद
आईडीएफ ने संयुक्त राष्ट्र के उन दावों को खारिज किया है जिसमें नागरिक मौतों का प्रतिशत ज्यादा बताया गया था। आईडीएफ का कहना है कि उनके आंकड़े अलग हैं और वे नागरिक मौतों के अनुपात को लेकर यूएन के नंबरों से सहमत नहीं हैं। उनका जोर इस बात पर है कि कुल मौतों में से काफी संख्या हमास के लड़ाकों की है, हालांकि उन्होंने सटीक ब्रेकडाउन नहीं दिया।
क्या है पूरा मामला
यह युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें इजरायल पर बड़ा अटैक हुआ था। आईडीएफ ने गाजा में ऑपरेशन चलाकर हमास को निशाना बनाया, लेकिन इसमें भारी तबाही हुई और मौतों की संख्या बहुत बढ़ गई। आईडीएफ अब इन आंकड़ों के जरिए अपनी पोजीशन क्लियर कर रहा है कि मौतें ज्यादातर लड़ाई से हुईं, न कि भुखमरी या अन्य वजहों से।












