खाड़ी युद्ध के चलते दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो रही हैं। ऐसे में केंद्र सरकार पश्चिम एशिया संघर्ष से प्रभावित सेक्टरों के लिए कोरोना काल के जैसी नीतिगत मदद देने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ये बातें मुंबई में ईटी अवॉर्ड्स फॉर कॉर्पोरेट एक्सीलेंस के मौके पर कही हैं। इसके साथ ही उन्होंने इंडस्ट्री से अधिक निवेश और आयात की जगह घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर देने की अपील की है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि कच्चे माल की सप्लाई में रुकावट, कीमतों में बढ़ोतरी और बीमा जोखिम से जूझ रही यूनिट्स के लिए कोविड के समय वाली इमरजेंसी लिक्विडिटी क्रेडिट गारंटी स्कीम जैसी राहत पर चर्चा चल रही है। सरकार उन सेक्टरों को सपोर्ट देना चाहती है जहां इन समस्याओं से उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
एफडीआई और टैक्स पर बात
वित्त मंत्री ने हाल के एफडीआई आउटफ्लो और इनफ्लो में कुछ कमजोरी को स्वीकार किया। लेकिन उन्होंने जोर दिया कि निवेश के फैसले सिर्फ आर्थिक आंकड़ों पर नहीं, बल्कि ग्लोबल और स्ट्रैटेजिक फैक्टर्स पर भी निर्भर करते हैं। फिर भी भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसके आर्थिक संकेतक स्थिर हैं।
कैपिटल गेंस टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स में बदलाव की मांग पर सीतारमण ने कहा कि इन टैक्सों के बावजूद पहले भी मजबूत इनफ्लो आए हैं। उन्होंने न तो हां कहा और न ही ना, बस इतना कहा कि यह मुद्दा रिव्यू के अधीन है।
उर्वरक और ऊर्जा की उपलब्धता पर जोर
सरकार ने साफ किया कि ऊर्जा और उर्वरक जैसे जरूरी इनपुट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जरूरत पड़ी तो फिस्कल प्रेशर भी झेलेगी। कोविड के समय जैसा ही तरीका अपनाया जाएगा। उन्होंने उदाहरण दिया कि जब विदेश में उर्वरक की कीमतें बहुत बढ़ गई थीं, तब भी भारत ने उन्हें उसी दाम पर खरीदा ताकि सप्लाई न रुके। किसानों पर इसका बोझ नहीं डाला गया—वे पहले जैसी ही कीमत चुकाते रहे।
ऊर्जा सुरक्षा के बारे में उन्होंने कहा, “जो भारत के हित में होगा, वही हमारी प्राथमिकता रहेगी। जहां से सस्ता मिले, समय पर मिले और जरूरत पूरी हो, वहीं से क्रूड ऑयल लेंगे।”
आयात को घरेलू उत्पादन का मौका मानें
सीतारमण ने इंडस्ट्री से सीधे कहा कि भारत का घरेलू बाजार अभी भी बहुत सारी चीजें मांग रहा है जो देश में ही बनाई जा सकती हैं। हर आयात एक मौका है घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने का। उन्होंने पूछा, “जब भारत की इंडस्ट्री ये सामान बना सकती है तो आयात क्यों करें? क्या आप भारतीय उपभोक्ताओं के लिए नहीं बनाना चाहेंगे? ये बहुत बड़ा बाजार है।”
उन्होंने कंपनियों से ज्यादा चुस्ती, नई टेक्नोलॉजी में निवेश और घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रोडक्शन बढ़ाने की अपील की। सरकार का रुख है कि ग्रोथ, महंगाई और स्थिरता के बीच कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इन तीनों पर एक साथ नजर रखी जाएगी। साथ ही साइबर थ्रेट्स जैसे नए जोखिमों से वित्तीय सिस्टम को बचाने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

















