पश्चिम बंगाल में त्रिपुरा, असम, ओडिशा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में अपने प्रदर्शन के बल पर राज्य में अपनी सरकार बनाने की तैयारी में दिख रही है. भाजपा ने 2021 में पश्चिम बंगाल में काफी अच्छा प्रदर्शन किया था मगर सरकार बनाने से चूक गई थी क्योंकि जनता के मन में भाजपा के प्रति दुविधा का भाव था. पश्चिम बंगाल की जनता ने 2021 में यह तय नहीं कर सकी की भाजपा अपने बूते सरकार बना सकती हैं क्योंकि इसके पिछले चुनाव 2016 में भाजपा जहां 3 सीट जीती थी वहीं सात सीटों पर दूसरे पायदान पर रही थी. 2016 में भाजपा कुल 10 सीटों पर ही सीधे मुकाबले में रही थी. दूसरे शब्दों में भाजपा 2021 में पहली बार पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव लड़ रही थी.
जनता का विश्वास और 2021 का प्रदर्शन
इस बार भाजपा को जनता का पूरा विश्वास प्राप्त हैं. विगत 2021 में भाजपा 77 सीट जीतने के साथ ही 201 सीटों पर दूसरे पायदान पर रही थी. भाजपा 2021 में कुल 278 सीटों पर सीधे मुकाबले में रही थी. अतएव इस बार जनता को भाजपा में अगला सत्तारूढ़ दल दिख रहा है और जनता पूरे मन से भाजपा का समर्थन कर रही है. पहले चरण के 152 सीटों पर चुनाव में रिकॉर्ड मतदान यह बताने के लिए काफी है कि भाजपा को जनता का पूर्ण समर्थन प्राप्त हो चुका है और जनता भाजपा को सरकार चलने के लिए अगला मौका देने जा रही है.
अन्य राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन
भाजपा ने भूतकाल में कई राज्यों में अविश्वसनीय प्रदर्शन करते हुए सीधे सरकार बनायी है. त्रिपुरा में भाजपा का 2018 से पूर्व कभी भी कोई विधायक निर्वाचित नहीं हुआ था. 2013 में भाजपा महज एक सीट पर अपनी जमानत बचा सकी थी. मगर 2018 में भाजपा ने 36 सीट जीतकर अपने बूते सरकार बनाई. पश्चिम बंगाल की सीमावर्ती राज्य ओडिशा में भाजपा 2019 के विधानसभा चुनाव में 23 सीट जीती थी मगर 2024 में भाजपा 78 सीट जीतकर अपनी सरकार स्पष्ट बहुमत के साथ बनाई थी.
असम में 2011 में भाजपा पांच सीट जीती थी मगर 2016 में 60 सीट जीतकर सरकार बनाई थी. हरियाणा में 2009 में भाजपा 4 सीट जीती थी मगर 2014 में 47 सीट जीतकर सीधे सरकार बनाने में सफलता प्राप्त किया था.
मणिपुर में भाजपा ने 2012 में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी मगर 2017 में 21 सीट जीतकर अपनी सरकार बनाने में कामयाब हुई थी. अरुणाचल प्रदेश में भाजपा ने 2014 में 11 सीट जीती थी मगर 2019 में भाजपा 41 सीट जीतकर स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब हुई.
अतएव भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल में 77 सीट के 2021 के प्रदर्शन के आधार पर वर्तमान चुनाव में भाजपा स्पष्ट बहुमत से अधिक सीट लेकर आसानी से सरकार बनाने की और अग्रसर दिख रही है.
राज्यों के प्रदर्शन का आंकड़ा
| प्रदेश | सीटें | प्रथम चुनाव | अगला चुनाव |
|---|---|---|---|
| त्रिपुरा | 60 | 0 | 36 |
| असम | 126 | 5 | 60 |
| हरियाणा | 90 | 4 | 47 |
| मणिपुर | 60 | 0 | 21 |
| ओडिशा | 147 | 23 | 78 |
| अरुणाचल प्रदेश | 60 | 11 | 41 |
| दिल्ली | 70 | 8 | 48 |
| कुल सीटें | 613 | 51 | 331 |
दिल्ली मॉडल और पश्चिम बंगाल में संभावना
भाजपा को पश्चिम बंगाल में आम आदमी पार्टी के दिल्ली में 2015 में मिली जीत के की तरह ही इस बार भाजपा को जीत मिलने जा रही है. 2013 में आप को दिल्ली की जनता के एक बड़े वर्ग का मत इस कारण नहीं मिला था कि उस वर्ग को इसका आभास ही नहीं था कि आप सरकार बनाने की स्थिति में है. मगर 2013 में 28 सीट जीतने और नई दिल्ली विधानसभा सीट पर केजरीवाल के द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को चुनाव में मात दी गई थी. इन दोनों वजहों से 2015 में आप को दिल्ली के 70 सीटों में 67 सीट मिली और कांग्रेस पार्टी शून्य पर आ गई थी. भाजपा भी 2015 में आप के दिल्ली वाला प्रदर्शन पश्चिम बंगाल में दोहराने की स्थिति में है.
निष्कर्ष : बंगाल में भाजपा की बढ़ती संभावनाएं
भाजपा ने 2021 में 77 सीट जीतकर और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी द्वारा नंदीग्राम सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनाव हराकर जनता को पूरी तरह से यह विश्वास जगा दिया है कि भाजपा तृणमूल कांग्रेस को चुनाव हरा सकती है और यह चुनाव इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और प्रथम चरण का मतदान इसकी तस्दीक कर रहा है.











