राघव चड्ढा का आम आदमी पार्टी से सात राज्यसभा सदस्यों के साथ का भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से पंजाब में भाजपा को राजनितिक तोर पर बड़ा उछाल मिला है. अब भाजपा पंजाब में भी मुख्यधारा की पार्टी बन गई हैं. उत्तर भारत में पंजाब को छोड़कर सभी प्रदेशो में भाजपा मजबूत या दूसरे शब्दों में कहे तो वर्तमान में या पूर्व में सत्ताधारी पार्टी रह चुकी हैं.
2027 विधानसभा चुनाव और भाजपा-अकाली दल समीकरण
आगामी साल 2027 के शुरुआत में पंजाब विधानसभा चुनाव में अब भाजपा अपने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के साथ भाजपा मजबूती और बराबरी के स्तर से बात करेगी.
राजनीतिक असंतोष और भाजपा की ओर झुकाव
वर्तमान में कांग्रेस और अकाली दलों में बढ़ती नाराज़गी बढ़ती जा रही हैं. अतएव अब नेतागण भाजपा की और रूख कर रहे हैं. पंजाब में शहरी मतदाताओं को अपनी और आकर्षित करने के लिए राघव चड्ढा भाजपा के नए चेहरा बन सकते हैं.
दूसरी और सिख किसानों को आकर्षित करने के लिए लिए रवनीत बिट्टू भाजपा का पंजाब में चेहरा के तोर पर स्थापित हो चुके हैं. चड्ढा सहित अन्य सांसदो के भाजपा में शामिल होना दर्शाता हैं की भाजपा को अब सभी विचारधारा वालो लोगो का बड़े पैमाने पर समर्थन मिला शुरू हो गया हैं.
अभी से एक दशक या उससे थोड़ा पूर्व ऐसा कम देखने को मिलता था.
राज्यसभा में भाजपा की स्थिति मजबूत
इस राजनितिक घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में भाजपा की सदस्य संख्या बढ़ने के साथ ही अब सरकार आवश्यक और ज़रूरी बिल्लो को आसानी से पास करवा सकेगी.
कांग्रेस के लिए बढ़ती चुनौती
भाजपा की पंजाब बढ़ती जनाधार कांग्रेस पार्टी के लिए बहुत बड़ी चिंता का सबब बनती जा रही हैं. कांग्रेस पार्टी का पंजाब के शहरी हिंदुओं का परम्परागत मतदाता वर्ग अब भाजपा की ओर रुख कर चुके हैं.
दिल्ली, गुजरात और पंजाब में कांग्रेस की स्थिति
अब पंजाब भी कांग्रेस पार्टी के लिए दिल्ली और गुजरात जैसा प्रदेश बनता जा रहा हैं. दिल्ली जहाँ 1998 से 2013 तक लगातार तीन बार बड़े बहुमत के साथ सरकार बनानेवाली कांग्रेस पार्टी अब विगत तीन विधानसभा चुनाव से शून्य पर निपट रही हैं.
अब कांग्रेस पार्टी मुश्किल से 2020 और 2025 के दिल्ली विधानसभा के चुनावो में तीन सीट और 2015 में आठ सीटों पर अपना जमानत बचा पाती हैं.
गुजरात में 2017 में 77 सीट जीतने वाली कांग्रेस पार्टी 2022 में महज 17 सीटों पर सिमट जाती हैं. पंजाब में भी कांग्रेस पार्टी 2017 में 77 सीट लेकर स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाती हैं और 2022 में महज 18 सीटों पर आकर सिमट जाती हैं.
कांग्रेस पार्टी के 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह कहानी दो विधानसभा सीटों रूपनगर जिले के चमकौर साहिब और बरनाला जिले के भदौर विधानसभा सीट से चुनाव हार जाते हैं.
भदौर में तत्कालीन मुख्यमंत्री कहानी थोड़े मतो के कारण अपनी जमानत बचाने में सफल हुई थे.











