बेंगलुरु के मडिवाला स्थित कृपानिधि कॉलेज में संयुक्त प्रवेश परीक्षा (CET) के दौरान पांच ब्राह्मण छात्रों के जनेऊ उतरवाने का मामला सामने आया है। छात्रों ने शुक्रवार (24 अप्रैल) को आरोप लगाया कि कॉलेज के परीक्षा कक्ष में मौजूद निरीक्षकों ने उनसे कहा कि यदि वे परीक्षा देना चाहते हैं, तो जनेऊ उतारें। बिना जनेऊ उतारे उन्हें परीक्षा कक्ष में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस मामले में माता-पिता की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री एम.सी. सुधाकर ने कहा, “मैं इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा हूं और विभागीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं।”
कांग्रेस हिंदू विरोधी: भाजपा
इस घटना पर राजनीतिक विवाद बढ़ने के बाद संबंधित निरीक्षकों को निलंबित कर दिया गया है और जांच पूरी होने तक तीन कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है। इसको लेकर भाजपा ने सत्ताधारी कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और इसे हिंदू विरोधी करार दिया। वहीं कुछ अन्य स्थानों से इसी तरह का विवाद सामने आने के बाद राज्य सरकार ने अभिभावकों को आश्वासन दिया कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
छात्र का भावुक वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर एक छात्र का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। उसने बताया, “मैं सुबह करीब 9:40 बजे एग्जाम सेंटर पर पहुंचा। मैंने अपना बैग कमरे में रख दिया, लेकिन उन्होंने मुझे अंदर जाने की अनुमति नहीं दी क्योंकि उन्होंने मेरा जनेऊ देख लिया था। वे कहने लगे कि तुम्हें इसे उतारना होगा। अगर तुम इसे नहीं उतारोगे, तो हम तुम्हें परीक्षा देने की इजाजत नहीं दे सकते। करीब सात और छात्रों से जनेऊ उतारने को कहा गया। हमारे पास उनका कहना मानने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था, इसलिए हमने उसे उतार दिया। मुझे बहुत दुख हुआ। मैं सीईटी की परीक्षा ठीक से नहीं दे पाया।” कुछ अन्य छात्रों ने आरोप लगाया कि कलाई पर बंधा लाल और पीला कलावा भी निरीक्षकों ने हटवा दिया था।
एक अन्य छात्र ने बताया, ”मैं परीक्षा केंद्र गया, तो शिक्षकों ने मेरी बाली उतरवा दी। मैं यह समझ सकता हूं, क्योंकि वहां धातु की कोई वस्तु पहनने की अनुमति नहीं है, लेकिन उन्होंने मुझे जनेऊ उतारने के लिए मजबूर किया। कोई और विकल्प न होने के कारण छात्र ने निरीक्षकों के आदेश का पालन किया।”
जनेऊ उतारने के पीछे का मकसद साफ करे सरकार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्रों के अभिभावकों परीक्षा स्थल पर पहुंचे। उन्होंने परीक्षा देने के लिए छात्रों को जनेऊ उतारने के लिए मजबूर करने पर सवाल उठाए। अभिभावकों ने कहा कि जब जनेऊ न हटाने के संबंध में स्पष्ट निर्देश थे, तो फिर ये सब करने के पीछे क्या मकसद था? दरअसल, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए छात्रों का चयन करने सीईटी परीक्षा आयोजित की जाती है। पिछले साल भी कर्नाटक में कई जगहों पर इस तरह का विवाद होने पर सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि सीईटी परीक्षा के दौरान छात्रों को जनेऊ उतारने के लिए नहीं कहा जाएगा। हालांकि उसके बावजूद इस साल भी छात्रों को इसी तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ा।
हिंदू धर्म में जनेऊ संस्कार का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में जनेऊ संस्कार का विशेष महत्व है। इसे 16 संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार माना जाता है। यह पवित्र धागा (जनेऊ) ज्ञान, अनुशासन और आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। एक बार जनेऊ धारण करने के बाद इसे शरीर से अलग नहीं किया जाता, क्योंकि यह व्यक्ति का अभिन्न अंग बन जाता है। इसे अशुद्ध होने या खंडित होने के बाद ही बदला जाता है, न कि अपनी इच्छा से उतारा जाता है।
















