
बाड़मेर रिफाइनरी में रहस्यमयी घटना के बाद NIA की टीम जांच के लिए पचपदरा पहुंची
राजस्थान के बाड़मेर जिले की रिफाइनरी में जो दुर्घटना हुई है उसने देश की सुरक्षा एजेंसियों को चिंता में डाल दिया है। 20 अप्रैल को पचपदरा में स्थित HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) में में हुई इस रहस्यमयी घटना की हर एंगल से जांच की जा रही है।
इस दुर्घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मोर्चा संभाल लिया है।
बाड़मेर रिफाइनरी के भीतर हुई इस अप्रत्याशित घटना को केंद्र सरकार की एजेंसियां हल्के में नहीं ले रही हैं। सूत्रों के अनुसार, जयपुर से NIA की एक विशेष टीम बाड़मेर भेजी गई है, जो इस हादसे के हर संभावित पहलू की बारीकी से छानबीन कर रही है।
इस टीम में केवल जांच अधिकारी ही नहीं, बल्कि फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और साइबर एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं। एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या यह केवल एक तकनीकी विफलता थी या इसके पीछे कोई बाहरी हस्तक्षेप या साजिश थी।
आपको बता दें कि इस रिफाइनरी की सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों के पास है। रिफाइनरी में सुरक्षा के तीन कड़े स्तर (थ्री लेयर सिक्योरिटी) हैं, जहां गेट पर एक्सेस कंट्रोल से लेकर भीतर की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाती है।
रिफाइनरी के भीतर सामान्य वाहनों का प्रवेश वर्जित है। केवल दो से तीन अनिवार्य कार्य वाले वाहनों को ही अंदर जाने की अनुमति होती है, जो उच्च सुरक्षा मानकों और फायर सेफ्टी डिवाइस से लैस होते हैं।
इस दुर्घटना का सबसे बड़ा तात्कालिक प्रभाव देश के बड़े राजनीतिक और विकास कार्यक्रम पर पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल 2026 को इस रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे, जिसे अब सुरक्षा कारणों और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थगित कर दिया गया है।
पीएम मोदी बालोतरा जिले के पचपदरा में देश की पहली ग्रीन फील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी को राष्ट्र को समर्पित करने वाले थे। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, अब उद्घाटन की नई तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी।
रिफाइनरी के भीतर जाने वाले वाहनों में स्पार्क अरेस्टर लगा होना अनिवार्य है। यह एक ऐसा सुरक्षा उपकरण है जो इंजन के साइलेंसर से निकलने वाली गर्म चिंगारियों को ज्वलनशील वातावरण में फैलने से रोकता है।
रिफाइनरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है। स्पार्क अरेस्टर इसे रोकने का काम करता है। जब इंजन की गर्म गैसें इससे गुजरती हैं, तो यह जलते हुए कार्बन कणों को दीवार से टकराकर ठंडा कर देता है, जिससे वे राख बन जाते हैं और बाहर नहीं निकल पाते।
क्रूड डिस्टलेशन यूनिट (सीडीयू) जैसे संवेदनशील हिस्से के पास दुर्घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियां इस बात की भी तहकीकात कर रही हैं कि क्या उस दिन किसी उपकरण में खराबी थी या नियमों की अनदेखी हुई। वर्तमान में रिफाइनरी की सुरक्षा के लिए शिफ्ट के हिसाब से करीब 100 CISF जवान तैनात किए गए हैं। हालांकि, फायर विंग का प्रबंधन HPCL द्वारा किया जाता है।