अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आदत है कि वो हर किसी चीज का श्रेय लेने की कोशिश करते हैं। इसी क्रम में उन्होंने ईरान में 8 महिलाओं की फांसी को रोके जाने को लेकर हास्यास्पद दावा करते हुए कहा है कि उन्होंने ईरान से अनुरोध किया और उसकी वजह से इन महिलाओं की फांसी रुक गई। लेकिन ईरान ने इस बात को पूरी तरह झूठा बताया है।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि ट्रंप ने 22 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि ईरान के नेता उनके अनुरोध का सम्मान करते हुए आठ महिलाओं को फांसी देने का फैसला वापस ले लिया। उन्होंने लिखा कि बहुत अच्छी खबर है। चार महिलाओं को तुरंत रिहा कर दिया जाएगा और बाकी चार को सिर्फ एक महीने की सजा दी जाएगी। ट्रंप ने इसे अपना कूटनीतिक प्रयास बताया और कहा कि अगर ईरान इन महिलाओं पर राहत दे तो दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए अच्छा माहौल बन सकता है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी ट्रंप के इस दावे को उनकी कूटनीतिक सफलता बताया। ट्रंप ने पहले भी ईरान से इन महिलाओं की रिहाई की अपील की थी।
ट्रंप के दावे को ईरान ने खारिज किया
ईरान की न्यायपालिका ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। मिजान न्यूज एजेंसी ने कहा कि ऐसी कोई फांसी की योजना ही नहीं थी। उन्होंने ट्रंप पर आरोप लगाया कि वे फेक न्यूज पर भरोसा करके अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने कहा कि ट्रंप पहले भी ऐसी गलत सूचनाओं पर भरोसा कर चुके हैं। ईरानी अदालत के अनुसार, इनमें से कुछ महिलाओं को पहले ही रिहा कर दिया गया है। बाकी महिलाओं के मामले अभी चल रहे हैं, लेकिन किसी की भी फांसी की सजा पर अमल नहीं हो रहा है। ईरान का कहना है कि ट्रंप ने आठ काल्पनिक महिलाओं को बचाने का दावा किया है।
क्या है इन महिलाओं पर आरोप
इन आठ महिलाओं में कुछ का नाम सामने आया है। बिता हम्माती पर जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लेने का आरोप है। 16 साल की डायना ताहेराबादी को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। महबूबेह शबानी पर घायल प्रदर्शनकारियों की मदद करने का आरोप है। एंसिएह नेजाती कुर्द महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं, जिन्हें 2025 की शुरुआत में मौत की सजा सुनाई गई थी। इनमें से कम से कम पांच महिलाएं सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पकड़ी गई थीं। एक महिला पर इजराइल से जुड़े नेटवर्क में शामिल होने का आरोप भी लगाया गया।
ये महिलाएं ईरान में चले लंबे समय से सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ी हुई हैं। मानवाधिकार संगठनों ने पहले भी ईरान में महिलाओं और प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। ट्रंप का दावा अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच आया है। दोनों देशों के बीच सीजफायर बढ़ाया गया है, लेकिन पाकिस्तान में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हुई बातचीत पहले दिन ही फेल हो गई थी।















