पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और 23 अप्रैल को पहले चरण के लिए मतदान होने वाला है। मगर इससे ठीक पहले वहां से एक वीडियो जिससे मतदाता खौफ और दशहत के साए में जीते दिख रहे हैं। दरअसल, पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने न केवल आम जनता बल्कि चुनाव आयोग की भी चिंता बढ़ा दी है।
इस वीडियो में सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता को खुलेआम मतदाताओं को डराते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो लाभपुर विधानसभा क्षेत्र के सौग्राम का है। यहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के स्थानीय नेता दालिम शेख एक वीडियो में मतदाताओं को बेहद हिंसक अंदाज में धमकाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
वोट कहीं और पड़ा तो…
वीडियो में दालिम शेख को यह कहते सुना जा सकता है कि “अगर वोट कहीं और पड़ा, तो टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाओगे।” साथ ही वह वीडियो में चेतावनी भरे अंदाज में कह रहे हैं कि उनके पास उन मतदाताओं की सूची होगी जिन्होंने मतदान किया है और यह भी पता चल जाएगा कि किस पार्टी को वोट दिया गया है। इस वीडियो को अनामिका रे नाम की यूजर ने ट्विटर यानी एक्स पर पोस्ट किया है। यह वीडियो इस बात का गवाह है कि कैसे पश्चिम बंगाल में आज भी बाहुबल के दम पर मतदाओं को प्रभावित किया जाता है।
दहशत में हैं इलाके के मतदाता
मतदान से ठीक दो दिन पहले इस तरह की धमकी ने सौग्राम और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीणों को डर है कि अगर उन्होंने अपनी पसंद की पार्टी को वोट दिया, तो चुनाव के बाद उनके साथ हिंसा हो सकती है। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ लोगों ने इसकी कड़ी निंदा की और चुनाव आयोग से तुरंत कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना है कि लोकतंत्र में इस तरह की गुंडागर्दी के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
बीजेपी ने उठाए निष्पक्ष मतदान पर सवाल
इस वीडियो के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मोर्चा खोल दिया है। लाभपुर से बीजेपी उम्मीदवार देबाशीष ओझा ने इस घटना को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। देबाशीष ओझा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल पुलिस अब केवल सत्ताधारी दल के लिए काम कर रही है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा, “ऐसी धमकी मिलने के बाद आम आदमी बिना किसी डर के वोट डालने कैसे जाएगा? इस माहौल में निष्पक्ष चुनाव कराना लगभग असंभव है।”
बीजेपी ने निर्वाचन आयोग में दर्ज करवाई शिकायत
बीजेपी ने इस मामले में निर्वाचन आयोग के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई है और मांग की है कि दालिम शेख को तुरंत गिरफ्तार किया जाए ताकि मतदाता खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। पश्चिम बंगाल में चुनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए इस बार रिकॉर्ड संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पहले चरण के लिए 2400 कंपनियां यानी करीब 2.4 लाख CAPF कर्मी तैनात किए गए हैं। इसका मतलब है कि पहले चरण में हर 140 मतदाताओं पर एक सुरक्षाकर्मी तैनात रहेगा।
बीरभूम और हिंसा का है पुराना नाता
बीरभूम जिला राजनीतिक हिंसा के लिए लंबे समय से सुर्खियों में रहा है। यहां बमबाजी और राजनीतिक झड़पें आम बात रही हैं। चुनाव आयोग ने भी इस जिले को ‘अति संवेदनशील’ की श्रेणी में रखा है। दालिम शेख जैसे नेताओं के बयान आयोग की उन कोशिशों को चुनौती दे रहे हैं, जिनका मकसद भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करना है। इससे मतादाओं को पोलिंग बूथ तक लाने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
बता दें कि, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत किसी भी मतदाता को डराना या धमकाना एक गंभीर अपराध है। यदि दालिम शेख पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं, तो उन्हें चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने के साथ-साथ जेल की सजा भी हो सकती है।
















