ममता बनर्जी को SC से झटका : 'जांच में दखल देकर CM ने सिस्टम को खतरे में डाला', बंगाल मतदान से पहले मिली कड़ी फटकार!
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ममता बनर्जी को SC से झटका : ‘जांच में दखल देकर CM ने सिस्टम को खतरे में डाला’, बंगाल मतदान से पहले मिली कड़ी फटकार!

सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को जांच में दखल देने पर फटकार लगाई है। जस्टिस पीके मिश्रा ने कहा कि सीएम के आचरण ने सिस्टम को खतरे में डाला। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Apr 22, 2026, 06:41 pm IST
inभारत, दिल्ली, पश्चिम बंगाल
Mamata Banerjee Supreme Court News

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Election 2026) के पहले चरण के मतदान से ठीक 24 घंटे पहले West Bengal की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के आचरण पर बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का जांच में हस्तक्षेप करना ‘लोकतंत्र के लिए खतरा’ है।

‘सोचा नहीं था ऐसा दिन भी आएगा’ – सुप्रीम कोर्ट

यह पूरा विवाद कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के खिलाफ सर्च कार्रवाई से सम्बंधित प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी के इस रुख पर हैरानी जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा- “हमने कभी नहीं सोचा था कि देश में ऐसा दिन भी आएगा जब कोई मुख्यमंत्री खुद जांच के बीच में दखल देगा। यह राज्य बनाम केंद्र का विवाद नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति द्वारा जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का मामला है।”

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सिस्टम को खतरा : सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस कृत्य ने पूरे प्रशासनिक और कानूनी सिस्टम को जोखिम में डाल दिया है।

संवैधानिक मर्यादा : उच्चतम न्यायालय ने बाबासाहेब आंबेडकर और सीरवाई जैसे विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कहा कि किसी ने कल्पना नहीं की थी कि एक सिटिंग सीएम जांच के दौरान खुद दफ्तर पहुंच जाएगा।

TMC की मांग सिरे से खारिज

सर्वोच्च अदालत ने TMC की वकील मेनका गुरुस्वामी द्वारा मामले को 5 जजों की बेंच के पास भेजने की दलील को सिरे से खारिज करते हुए पूछा कि आखिर इसमें ऐसा कौन सा बड़ा संवैधानिक सवाल है जिसे बड़ी बेंच को भेजा जाए.?  इसके बाद अदालत ने स्पष्ट  किया कि हर अनुच्छेद 32 की याचिका को बड़ी बेंच को नहीं सौंपा जा सकता।

दोषी के वारिस को हक, तो पीड़ित के वारिस को क्यों नहीं? राजस्थान हाईकोर्ट की CRPC की धारा 394 पर गंभीर टिप्पणी

क्या है आई-पैक (I-PAC) विवाद?

यह पूरा मामला कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक (I-PAC) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सर्च कार्रवाई से जुड़ा है। आरोप है कि जब केंद्रीय एजेंसियां अपनी कार्रवाई कर रही थीं, तब मुख्यमंत्री ने प्रक्रिया में बाधा डाली। इसी मामले में ईडी अधिकारियों ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिस पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय में जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी के रुख पर सख्त टिप्पणियां की।

क्या बंगाल चुनाव पर पड़ेगा असर.?

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बंगाल में सत्ता की जंग चरम पर है।

23 अप्रैल : पहले चरण का मतदान।

29 अप्रैल : दूसरे चरण का मतदान।

04 मई : चुनावी नतीजे।

बता दें कि West Bengal Voting के 24 घंटे पहले आई सुप्रीम कोर्ट की इस टिपण्णी ले बाद विपक्ष ने ममता सरकार पर हमला तेज कर दिया है। वहीं अगर राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो है कि ‘लोकतंत्र को खतरे’ वाली कोर्ट की यह टिप्पणी चुनावी विमर्श पर बड़ा असर कर सकती है।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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