नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Election 2026) के पहले चरण के मतदान से ठीक 24 घंटे पहले West Bengal की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के आचरण पर बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का जांच में हस्तक्षेप करना ‘लोकतंत्र के लिए खतरा’ है।
‘सोचा नहीं था ऐसा दिन भी आएगा’ – सुप्रीम कोर्ट
यह पूरा विवाद कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के खिलाफ सर्च कार्रवाई से सम्बंधित प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी के इस रुख पर हैरानी जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा- “हमने कभी नहीं सोचा था कि देश में ऐसा दिन भी आएगा जब कोई मुख्यमंत्री खुद जांच के बीच में दखल देगा। यह राज्य बनाम केंद्र का विवाद नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति द्वारा जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का मामला है।”
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी
सिस्टम को खतरा : सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस कृत्य ने पूरे प्रशासनिक और कानूनी सिस्टम को जोखिम में डाल दिया है।
संवैधानिक मर्यादा : उच्चतम न्यायालय ने बाबासाहेब आंबेडकर और सीरवाई जैसे विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कहा कि किसी ने कल्पना नहीं की थी कि एक सिटिंग सीएम जांच के दौरान खुद दफ्तर पहुंच जाएगा।
TMC की मांग सिरे से खारिज
सर्वोच्च अदालत ने TMC की वकील मेनका गुरुस्वामी द्वारा मामले को 5 जजों की बेंच के पास भेजने की दलील को सिरे से खारिज करते हुए पूछा कि आखिर इसमें ऐसा कौन सा बड़ा संवैधानिक सवाल है जिसे बड़ी बेंच को भेजा जाए.? इसके बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि हर अनुच्छेद 32 की याचिका को बड़ी बेंच को नहीं सौंपा जा सकता।
क्या है आई-पैक (I-PAC) विवाद?
यह पूरा मामला कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक (I-PAC) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सर्च कार्रवाई से जुड़ा है। आरोप है कि जब केंद्रीय एजेंसियां अपनी कार्रवाई कर रही थीं, तब मुख्यमंत्री ने प्रक्रिया में बाधा डाली। इसी मामले में ईडी अधिकारियों ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिस पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय में जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी के रुख पर सख्त टिप्पणियां की।
क्या बंगाल चुनाव पर पड़ेगा असर.?
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बंगाल में सत्ता की जंग चरम पर है।
23 अप्रैल : पहले चरण का मतदान।
29 अप्रैल : दूसरे चरण का मतदान।
04 मई : चुनावी नतीजे।
बता दें कि West Bengal Voting के 24 घंटे पहले आई सुप्रीम कोर्ट की इस टिपण्णी ले बाद विपक्ष ने ममता सरकार पर हमला तेज कर दिया है। वहीं अगर राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो है कि ‘लोकतंत्र को खतरे’ वाली कोर्ट की यह टिप्पणी चुनावी विमर्श पर बड़ा असर कर सकती है।

















