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बिहार से मुसलमान नाबालिग बच्चों की बड़े पैमाने पर शिफ्टिंग, कटक में प्रशासन द्वारा गंभीरता से हो रही है जांच

पिछले कुछ दिनों में बिहार से बड़ी संख्या में मुस्लिम नाबालिग बच्चों को विभिन्न राज्यों में भेजे जाने का मामला सामने आने के बाद ओडिशा में हड़कंप मच गया है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद
Apr 17, 2026, 02:40 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर : पिछले कुछ दिनों में बिहार से बड़ी संख्या में मुस्लिम नाबालिग बच्चों को विभिन्न राज्यों में भेजे जाने का मामला सामने आने के बाद ओडिशा में हड़कंप मच गया है। महज 16 दिनों के भीतर ओडिशा में 85 और मध्यप्रदेश में 163 बच्चों को लाए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक तौर पर दावा किया जा रहा है कि इन बच्चों को मदरसों में मजहबी शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से लाया जा रहा था, लेकिन एक ही क्षेत्र से लगातार इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का अलग-अलग राज्यों में स्थानांतरण और आवश्यक वैध दस्तावेजों की अनुपस्थिति ने इस पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।

इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए ओडिशा पुलिस ने जांच तेज कर दी है। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय की खुफिया टीम भी कटक पहुंच चुकी है और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडबलूसी ) के साथ मिलकर मामले की गहन जांच कर रही है। इसके अलावा कटक (ग्रामीण) पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष टीम तथा जिला प्रशासन की टीम संयुक्त रूप से जिले के विभिन्न मदरसों में जांच और सत्यापन अभियान चला रही है। मामले की शुरुआत 1 अप्रैल को हुई, जब कटक रेलवे स्टेशन से 14 नाबालिग बच्चों को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने संदिग्ध परिस्थितियों में छुड़ाया।

जांच में सामने आया कि कटक जिले के सालेपुर थाना क्षेत्र के पिकोल गांव के एक मौलाना इन बच्चों को बिहार के अररिया से ट्रेन के माध्यम से अपने मदरसे में लाए थे। आरपीएफ ने इन बच्चों को किशनगंज से कटक आते समय रोका और बाद में उन्हें संरक्षण में लिया। इसके बाद 10 अप्रैल को मध्यप्रदेश के जबलपुर और कटनी रेलवे स्टेशनों से 163 बच्चों को बचाया गया। इनकी उम्र 10 से 14 वर्ष के बीच बताई गई है। ये सभी बच्चे अररिया जिले के जोकीहाट क्षेत्र के निवासी थे और उन्हें पटना से मध्यप्रदेश के एक मदरसे में ले जाया जा रहा था। इस घटना ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया।

11 अप्रैल को एक बार फिर कटक रेलवे स्टेशन से 12 नाबालिग बच्चों को अमृत भारत एक्सप्रेस से उतारकर बचाया गया। ये सभी भी अररिया जिले के ही रहने वाले थे। इसके बाद 14 अप्रैल को हावड़ा–पुरी धौली एक्सप्रेस से कटक लाए जा रहे 59 बच्चों को भी आरपीएफ ने बचा लिया। इन 59 बच्चों के मामले में जांच के दौरान जो जानकारी सामने आई, उसने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों ने बताया कि उनके इलाके के 4 से 5 लोग उन्हें अररिया से पहले कटिहार, फिर हावड़ा लेकर आए। हावड़ा में ओडिशा के एक मौलाना उनसे मिले और उन्होंने बच्चों को कटक स्थित एक मदरसे में दाखिला दिलाने का भरोसा दिया। बच्चों को मुफ्त शिक्षा, भोजन और आवास का लालच दिया गया था, जिसके बाद वे कटक आने के लिए तैयार हुए। आरपीएफ निरीक्षक प्रबीन कुमार के अनुसार, प्लेटफॉर्म संख्या 4 पर बच्चों के अकेले उतरने से संदेह हुआ, जिसके बाद उन्हें रोककर पूछताछ की गई। पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि सभी बच्चे गरीब परिवारों से आते हैं और बेहतर शिक्षा व सुविधाओं के लालच में उनके अभिभावकों ने उन्हें भेजा था।
इस दौरान रघुनाथपुर-चांदापुर निवासी मौलाना महमद अखलाद कटक स्टेशन पहुंचे और बच्चों को अपने साथ ले जाने का प्रयास किया।

उन्होंने दावा किया कि वे जगतसिंहपुर जिले के देउली ग्रामेश्वर स्थित एक मदरसे में बच्चों का दाखिला कराएंगे। हालांकि, वे अपने दावे के समर्थन में कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे संदेह और गहरा गया। इसके बाद आरपीएफ ने तुरंत सरकारी रेलवे पुलिस (GRP), स्थानीय पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सूचित किया। बच्चों को आरपीएफ और चाइल्डलाइन की मदद से भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। बाद में सीडबलूसी की टीम ने विस्तृत जांच कर सभी 59 बच्चों को “ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” के तहत औपचारिक रूप से रेस्क्यू किया और उन्हें देखभाल, सुरक्षा तथा पुनर्वास के लिए अपने संरक्षण में लिया। सीडबलूसी के अध्यक्ष मानस रंजन बिश्वाल ने बताया कि बच्चों को फिलहाल दो अलग-अलग आश्रय गृहों में रखा गया है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को बिना किसी वैध कानूनी प्रक्रिया का पालन किए एक राज्य से दूसरे राज्य लाया जा रहा था, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित मौलाना अब तक आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहे हैं। बिश्वाल के अनुसार, एक ही क्षेत्र से बार-बार बड़ी संख्या में बच्चों को कटक लाए जाने के कारण केंद्रीय एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। खुफिया टीम मौलाना से पूछताछ कर रही है और यह भी जांच की जा रही है कि संबंधित मदरसों को मिलने वाला आर्थिक अनुदान किन स्रोतों से आ रहा है। दूसरी ओर, कटक ग्रामीण एसपी विनीत अग्रवाल ने कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस मामले में सक्रिय रूप से जांच कर रहे हैं और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाएगी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने न केवल प्रशासन बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को भी चिंतित कर दिया है। एक ही जिले से इतनी बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चों का विभिन्न राज्यों में स्थानांतरण, वह भी बिना उचित दस्तावेजों के, कई गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल, सभी एजेंसियां इस मामले की तह तक जाने के लिए जुटी हुई हैं और आने वाले दिनों में जांच के बाद ही पूरे नेटवर्क और इसके वास्तविक उद्देश्य का खुलासा हो सकेगा।

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