भुवनेश्वर । भुवनेश्वर की एक अदालत ने ओटीपी आधारित साइबर फ्रॉड नेटवर्क के जरिए एक संदिग्ध पाकिस्तानी एजेंट को संवेदनशील जानकारी साझा करने के मामले में सात व्यक्तियों को दोषी ठहराया है। उप-विभागीय न्यायिक दंडाधिकारी (एसडीजेएम) अदालत द्वारा 15 अप्रैल को यह सजा सुनाया गया।
तीन साल की सजा और जुर्माना
अदालत ने सभी सात दोषियों को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास (आरआई) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक आरोपी पर ₹32,000 का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई दोषी जुर्माना अदा करने में विफल रहता है, तो उसे अतिरिक्त तीन महीने का कठोर कारावास भुगतना होगा।
मजबूत साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनमें 56 दस्तावेजी प्रमाण और 11 गवाहों के बयान शामिल थे। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पाया कि सभी आरोपी अवैध गतिविधियों में शामिल थे, जिनका संबंध अनधिकृत डिजिटल पहुंच और विदेशी संचालकों से संपर्क स्थापित करने से था।
सिम कार्ड और ओटीपी के जरिए चल रहा था नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला भारतीय सिम कार्डों के दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोपियों ने कई सिम कार्ड हासिल किए और उनके जरिए प्राप्त वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) विदेशी हैंडलरों के साथ साझा किए। इससे उन्हें संचार प्रणालियों तक पहुंच मिल गई और उन्होंने अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की गतिविधियां देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
दोषियों की पहचान और भूमिका
दोषियों में पठाणी सामंत लेंका, सरोज कुमार नायक, सौम्य पटनायक, प्रद्युम्न कुमार साहू, प्रीतम कर, महाराष्ट्र के अभिजीत संज्या और असम के मोहम्मद इकबाल शामिल हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, राज्य के बाहर के दो आरोपियों ने कथित पाकिस्तानी एजेंट के साथ समन्वय स्थापित करने और इस नेटवर्क को संचालित करने में अहम भूमिका निभाई।
एसटीएफ की जांच में हुआ खुलासा
इस मामले का खुलासा स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने किया था। एसटीएफ ने 12 मई 2023 को नयागढ़ जिले से मुख्य आरोपी पठाणी सामंत लेंका को गिरफ्तार किया था। इसके बाद की जांच में वित्तीय लेनदेन और विदेशी संपर्कों के सुराग मिले, जिसके आधार पर अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।
आईपीसी और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं—419, 420, 465, 467, 468, 471, 120(बी) और 34—के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66-सी और 66-डी के तहत भी कार्रवाई की गई, जो पहचान की चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी से संबंधित हैं।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी “फ्री रिचार्ज बॉक्स” और “एफआरबी ट्रोल्स” जैसे सोशल मीडिया समूहों के माध्यम से सक्रिय थे, जिनमें लगभग एक लाख सदस्य जुड़े हुए थे। इन समूहों का उपयोग मोबाइल नंबर और ओटीपी साझा कर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए किया जाता था।
ई-कॉमर्स और पेमेंट ऐप्स का इस्तेमाल
अधिकारियों ने बताया कि इस नेटवर्क ने फेसबुक , ह्वाट्सएप और इनस्टैग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के अलावा फोन पे, पेटीएम और आमाजन पे जैसी भुगतान सेवाओं का भी दुरुपयोग किया। वहीं आमाजन , फ्लिपकैट और मेशो जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल धोखाधड़ी से सामान खरीदने के लिए किया गया।
छापेमारी में बरामदगी और चार्जशीट
एसटीएफ द्वारा की गई छापेमारी के दौरान 19 महंगे मोबाइल फोन, 47 प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड, 61 एटीएम कार्ड, 23 सिम कवर और एक लैपटॉप जब्त किया गया। विस्तृत जांच के बाद 10 जनवरी 2024 को आरोप पत्र दाखिल किया गया।
साइबर अपराध पर सख्ती और भविष्य की रणनीति
अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष ऐसे पांच मामलों का ट्रायल पूरा हो चुका है और सभी में दोषसिद्धि हुई है, जो साइबर अपराध पर नियंत्रण में एसटीएफ की सफलता को दर्शाता है। प्रशासन ने भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सिम कार्ड के उपयोग की कड़ी निगरानी और जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।

















