आज के समय में इंटरनेट ने लोगों की जिंदगी को काफी आसान बना दिया है। अब लोग घर बैठे ऑनलाइन शॉपिंग, पढ़ाई, बैंकिंग और नौकरी तक कर रहे हैं। सोशल मीडिया भी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
रील्स से कमाई का लालच बना साइबर ठगी का नया तरीका
आजकल सोशल मीडिया पर “रील्स देखो और घर बैठे पैसे कमाओ” जैसे विज्ञापन खूब दिखाई देते हैं। ये विज्ञापन देखने में आकर्षक लगते हैं, लेकिन कई बार ये साइबर ठगी का हिस्सा होते हैं। साइबर अपराधी लोगों को आसान कमाई का लालच देकर अपने जाल में फंसा लेते हैं। खासकर युवा और घर बैठे काम ढूंढ रहे लोग जल्दी इनके शिकार बन जाते हैं। ठग सोशल मीडिया पर ऐसे ऐप्स का प्रचार करते हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि वीडियो देखने या पोस्ट लाइक करने पर पैसे मिलेंगे। जब कोई व्यक्ति इन विज्ञापनों पर क्लिक करता है, तो उसे एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। कई बार यह ऐप किसी आधिकारिक ऐप स्टोर पर मौजूद नहीं होता, बल्कि लिंक के जरिए एपीके फाइल डाउनलोड करवाई जाती है।
ऐप डाउनलोड करने के बाद वह फोन से कई तरह की परमिशन मांगता है, जैसे एसएमएस पढ़ने की अनुमति, स्क्रीन एक्सेस और फोन कंट्रोल। लोग बिना सोचे-समझे “Allow” पर क्लिक कर देते हैं। इसके बाद साइबर ठग फोन की जानकारी तक पहुंच बना लेते हैं। शुरुआत में यूजर को कुछ नकली पैसे भी दिखाए जाते हैं ताकि उसे भरोसा हो जाए कि वह सच में कमाई कर रहा है। लेकिन जब व्यक्ति पैसे निकालने की कोशिश करता है, तो असली धोखाधड़ी शुरू होती है। एक फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही फोन का कंट्रोल ठगों के पास पहुंच जाता है। इसके बाद वे बैंकिंग मैसेज और ओटीपी देखकर खाते से पैसे निकाल लेते हैं। ऐसे फ्रॉड से बचने के लिए लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ऐप स्टोर के बाहर से कोई ऐप डाउनलोड न करें। ऐप इंस्टॉल करते समय उसकी परमिशन जरूर जांचें। अगर कोई साधारण ऐप ज्यादा एक्सेस मांग रहा है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। अगर किसी के साथ साइबर ठगी हो जाए, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करें। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। जागरूकता और सावधानी ही साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा तरीका है।
















