शशांक शाह के निर्देशन में बनी और दिव्या दत्ता ,संजय मिश्रा, सरिता जोशी, फैजल रशीद और सिद्धार्थ द्वारा अभिनीत वेब सीरीज चिरैया लगातार सोशल मीडिया में सुर्खियों में बनी हुई है। 6 एपिसोड्स की यह वेब सीरीज जियो हॉट स्टार पर स्ट्रीम हुई है। इसमें मैरिटल रेप, महिलाओं की इच्छा, पितृसत्ता जैसे विषयों को उठाया गया है। इस वेब सीरीज में दिव्या दत्ता अर्थात कमलेश एक कम पढ़ी-लिखी बहू और जेठानी के रोल में हैं। जिनके बच्चे नहीं थे और उसने अपने देवर को बेटे की तरह पाला। उस देवर की शादी होती है तो कमलेश का सामना उसकी देवरानी द्वारा बताई गई उसकी सुहागरात और शारीरिक रिश्ते से जुड़ी कुछ बातों से होता है जिसके बाद वह अपनी देवरानी को न्याय दिलाने की ठानती है।
चिरैया में हिन्दू समाज का नकारात्मक चित्रण
“चिरैया” सीरीज में हिन्दू विवाह संस्था का नकारात्मक और विकृत रूप में चित्रण किया गया है। हिन्दू समाज में विवाह केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि धार्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का केंद्र भी है जो कर्तव्य, त्याग और पारिवारिक समन्वय पर आधारित है। यह संस्था हमारे समाज की गति, निरंतरता और सांस्कृतिक संरक्षण की आधारशिला है। किन्तु, “चिरैया” में इस आदर्श को बड़े ही व्यवस्थित रूप से तोड़ने का प्रयत्न किया गया है और विवाह को एक बंधन, संघर्ष और स्त्री के जीवन में असंतोष के मुख्य स्रोत के रूप में दिखाया गया है। क्या वैवाहिक संबंधों का यही एक पक्ष है? क्या परंपरा सदैव दमन करती है? क्या आधुनिक होने का अर्थ सिर्फ हर परंपरा,हर मूल्य और सामाजिक संस्थानों जैसे परिवार,विवाह से मुक्ति है?
क्या कहती है फिल्म
इसके एक दृश्य में जब कमलेश और उसकी देवरानी घर छोड़कर जाने के बाद फिर से घर वापस आती है तो दादी सास कहती हैं कि अब चुप्पी को तोड़ना होगा अब चुप नहीं रहना होगा। सदियों तक महिलाओं को परिवार के नाम पर, प्रेम के नाम पर, परंपरा के नाम पर ,संस्कारों के नाम पर बरगलाया गया है। अब समय आ गया है इस इस चुप्पी को तोड़ने का। इस प्रकार संपूर्ण परिवार और विवाह नामक संस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। यह वेब सीरीज एक दो नहीं बल्कि 12 भाषाओं तमिल, मलयालम, कन्नड़, मराठी, बंगाली, गुजराती, हरियाणवी, भोजपुरी आदि में स्ट्रीम हुई है।
कुछ लोग इसे जबरदस्त गंभीर और सेंसिटिव सब्जेक्ट उठाने वाली सीरीज बता रहे हैं और कह रहे हैं कि शादी के बाद रिश्ते में जबरदस्ती ऐसा ही सब्जेक्ट है जिसे समाज के सामने लाना जरूरी है। चिरैया बताती है की शादी कोई लाइसेंस नहीं है और चुप्पी को सहमति नहीं समझना चाहिए। यह वेब सीरीज समाज से सवाल करती है कि औरत के साथ जबरदस्ती शादी के बाद पति करे तो क्या अपराध नहीं बनता है? वहीं कुछ लोग इसे एंटी मेन प्रोपेगेंडा कह कर आलोचना कर रहे हैं। एक्स पर लड़के लिख रहे हैं कि लड़कियों को शादी से पहले 10 बॉयफ्रेंड रखने पर कोई दिक्कत नहीं पर पति रिलेशन बनाएं तो मैरिटल रेप। आज इस बात पर भी चिंता जरुर करनी चाहिए की विवाह, परिवार और रिश्तों को लेकर हम कितने कमजोर हो गए हैं। इस विषय पर कानून बनाना चाहिए को पुश करती यह सीरीज विवाह संस्था को जिस तरह से प्रस्तुत कर रही है उससे तो युवा लड़के और लड़कियां अपने मन में एक अलग ही छवि बना लेंगे। हमारे देश के विवाह नामक संस्था और वैवाहिक संबंधों पर कठोराघात करते हुए मैरिटल रेप को स्थापित करने के लिए गलत आंकड़े प्रस्तुत करके यह सीरीज वाह वाही लूट रही है।
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वामपंथी एजेंडे से भरी है चिरैया
गाजियाबाद में महाकाली वाहिनी की सदस्य डॉ. उदिता त्यागी ने इस पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि वेब सीरीज चिरैया में वामपंथी एजेंडे को दिखाया गया है। मैरिटल रेप को सोसाइटी में पुश करने की कोशिश की जा रही है, जो कि किसी विशेष धर्म से नहीं है। ये हरेक धर्म की महिलाओं के लिए है। पर, इसमें सनातनी विवाह दिखाया गया है और सनातनी कैरेक्टर दिखाए गए हैं। इस वेब सीरीज में जिस तरह से संपूर्ण घटनाक्रम को प्रस्तुत करके समाज, विवाह, पुरुषों को कटघरे में खड़ा किया गया है। ऐसा हर एक घर में नहीं होता ना ही हर एक घर में पुरुषों के लिए औरत सिर्फ शारीरिक सुख देने का खिलौना ही होती है। वह अपनी सहमति, जिम्मेदारी के साथ अनेक भूमिकाओ को निभाते हुए खुश भी रहती है और सम्मान भी प्राप्त करती है।
परिवार को महिला उत्पीड़न का केंद्र बताती सीरीज
कहने का तात्पर्य है कि सीरीज परिवार को महिलाओं के उत्पीड़न का केंद्र बताती है। जो दृश्य है यौन हिंसा के उनमें सच्चाई कितनी है इस पर बात करने की आवश्यकता है। ये सीरीज वैवाहिक संबंधों का विकृत सामान्यीकरण प्रस्तुत करती है। ऐसा भी नहीं है कि यह बिल्कुल भी संभव नहीं होता है । कुछ घरों या महिलाओं के जीवन में ये त्रासदी हो सकती है लेकिन जिस तरह से इसका सामान्यीकरण करके पुरुषों,विवाह,परिवार को कटघरे में किया गया है इस कारण से इस संपूर्ण सीरीज में वामपंथी एजेंडा दिख रहा है जो पुनः फेमिनिज्म की आड़ में देश के युवा को संस्कृति और समाज से विवाह और परिवार से दूर करने हेतु खड़ा किया गया है। यह सीरीज परिवार संस्था का अवमूल्यन प्रदर्शित करती है। पारिवारिक मूल्यों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के विरोधी के रूप में प्रस्तुत करती है।
नकारात्मक चित्रण से विवाह के प्रति बढ़ता अविश्वास
लगातार नकारात्मक चित्रण से समाज के युवा वर्ग में विवाह के प्रति अविश्वास बढ़ सकता है। सीरीज पर जो विवाद हुआ है उसका इसे फायदा भी मिला है क्योंकि आज विवाद मार्केटिंग टूल बन गया है। आज यह सोचने और चिंतन करने की जरूरत है कि जो कंटेंट इस तरह के ओटीटी प्लेटफॉर्म्स द्वारा परोसा जा रहा है वह हमारे देश के सामाजिक ताने-बाने को, संस्कृति को, सोच को संवेदनशीलता को कितनी गहराई तक खोखला कर रहे हैं।














