तमिलनाडु में चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है एनडीए अपने को मजबूत करता जा रहा है। इस चुनाव में सबसे अहम मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का अपने विधानसभा सीट कोलाथुर सीट पर संकट में घिरना है। इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी के मतदाता भी मनोयोग से उनके साथ नहीं हैं। 2023 में जैसे कामारेड्डी विधानसभा सीट पर तत्कालीन तेलंगाना के मुख्यमंत्री चुनाव हार गए थे वैसा ही कोलाथुर में भी होता दिख रहा है। चुनाव नजदीक होने के साथ धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन गठबंधन में दलों का आपसी अविश्वास बढ़ता जा रहा है। एनडीए के मुख्यमंत्री पद के दावेदार एडप्पादी के. पलानीस्वामी का लोगों के बीच ज्यादा स्वीकार्यता बढ़ती जा रही है। द्रमुक सरकार के खिलाफ सत्ताविरोधी रुख भी इस गठबंधन के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा हैं। वहीं एनडीए का रास्ता आसान करता जा रहा है।
अभिनेता विजय अपनी पार्टी बनाकर पहली बार चुनाव मैदान में हैं। वो शहरी क्षेत्रों में ज्यादा प्रभावी हैं। पूर्व से शहरी क्षेत्र द्रमुक का मजबूत गढ़ रहा है। अतएव अभिनेता विजय डीएमके गठबंधन को ही ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में स्थिति अच्छी नहीं है। राज्य में कृषि संकट में है और किसान परेशान हैं। द्रमुक उम्मीदवारों को गांव वालों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है और ग्रामीण रास्ता रोक दे रहे हैं। द्रमुक के बहुत सारे विधायक दूसरे बार के विधायक हैं और इस कारण उनके लिए ज्यादा मुसीबत हो रही है।
एनडीए का बढ़ता जनाधार
एनडीए के लिए इस चुनाव में संभावना अच्छी है और इस गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार एडप्पादी के. पलानीस्वामी भारी भीड़ खींच रहे हैं। यह भी आश्चर्यजनक है कि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेतागण अन्नामलाई को अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए अनुरोध कर रहे हैं। यह एनडीए में बढ़ती आपसी संबध को दर्शाता है। इस गठबंधन के सभी घटक दलों के मतदाता एक दूसरे को बढ़चढ़कर मदद कर रहे हैं।
एनडीए का आपसी सामंजस्य
एनडीए के गठबंधन दलों के आपसी सामंजस्य है। वहीं द्रमुक नीत धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन में आपसी खींचतान चरम पर है। सबसे पहले कांग्रेस पार्टी ने काफी अनमने ढंग से इस गठबंधन में शामिल हुई है। कांग्रेस पार्टी का एक बड़ा वर्ग अभिनेता विजय की पार्टी के साथ गठबंधन करना चाह रहा था। तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम भी कांग्रेस पार्टी के साथ वही सलूक कर रही है जो केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस उसके साथ कर रही है। नेशनल कांफ्रेंस ने कांग्रेस पार्टी के साथ चुनाव लड़कर सरकार बनाने के बाद निर्दलीय विधायक को मंत्रिमंडल में स्थान दिया है।
मगर कांग्रेस पार्टी के साथ चुनाव बाद किसी प्रकार का कोई भी संबंध नहीं रखा है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने कांग्रेस पार्टी को सरकार में कोई भी भूमिका नहीं दिया है और ना ही चुनाव बाद के लिए ऐसा करने का वादा किया है। इससे कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं में द्रमुक के प्रति गहरी नाराज़गी का भाव है। कांग्रेस के जमीनी मतदाता न सिर्फ द्रमुक उम्मीदवारों को मत देने से दूरी बनाते दिख रहे हैं, बल्कि उसे हराने के लिए अंदर से प्रयत्नशील है।

















