कोलकाता (हि.स.) । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कटवा में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए नागरिकता, घुसपैठ और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के तहत नागरिकता देने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, विशेषकर मतुआ और नामशूद्र शरणार्थी परिवारों के लिए।
तृणमूल सरकार पर भय का माहौल बनाने का आरोप
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की सरकार लोगों में भय का माहौल बना रही है, जबकि केंद्र सरकार का उद्देश्य शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करना है। उन्होंने कहा, “मतुआ और नामशूद्र समाज के लोग संविधान के संरक्षण में हैं और उन्हें उनका अधिकार जरूर मिलेगा।”
मतुआ समुदाय और नागरिकता पर विशेष जोर
दक्षिण बंगाल में प्रभाव रखने वाले मतुआ समुदाय का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार बनने पर सभी पात्र आवेदकों को शीघ्र नागरिकता दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा “घुसपैठियों को अब अपना सामान बांध लेना चाहिए, भाजपा सरकार बनने पर उन्हें राज्य छोड़ना होगा।”
ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में पश्चिम बंगाल में भय और असुरक्षा का वातावरण बना है। उन्होंने इसे “तृणमूल के डर” का शासन बताते हुए कहा कि यह चुनाव उस माहौल को समाप्त करने का अवसर है।
भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा पर सख्ती का वादा
भाजपा के एजेंडे को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सत्ता में आने पर तृणमूल सरकार के भ्रष्टाचार पर श्वेतपत्र जारी किया जाएगा और राजनीतिक हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आलू किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए राज्य सरकार की नीतियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
महिला मतदाताओं से खास अपील
महिला मतदाताओं से विशेष अपील करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जहां महिलाओं की अधिक भागीदारी होती है, वहां भाजपा को मजबूत समर्थन मिलता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भाजपा सरकार बनने पर पहली कैबिनेट बैठक में ‘आयुष्मान भारत’ योजना लागू की जाएगी और राज्य की मौजूदा योजनाओं को बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि उनमें पारदर्शिता लाई जाएगी।
मतदान और मतगणना की तारीखें
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा, जबकि मतों की गिनती 4 मई को की जाएगी।

















