मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का एक गांव इन दिनों खासा चर्चा में है। करीब छह हजार की आबादी वाले बोरसर गांव को ‘गाली-गलौच मुक्त’ गांव का दर्जा मिला है। यहां गाली देने वाले पर सख्त कार्रवाई का नियम बनाया गया है। अगर कोई व्यक्ति गलती से भी गाली देता हुआ पकड़ा जाता है तो उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। जुर्माना नहीं भर पाने पर दोषी को गांव में एक घंटे तक साफ-सफाई का काम करना होता है। यह गांव जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है। ग्राम पंचायत का दावा है कि यहां अब कोई भी व्यक्ति गाली-गलौज नहीं करता। अगर कोई ऐसा करता हुआ पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। यह पहल सिर्फ नियम बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव के लोग इसे अपने व्यवहार में भी उतार चुके हैं।
युवाओं को सभ्य बनाने के लिए अनोखी पहल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्राम पंचायत बोरसर के सरपंच अंतरसिंह, उपसरपंच विनोद शिंदे सहित टीवी कलाकार अश्विन पाटिल ने बोरसर को गाली मुक्त गांव का दर्जा दिलाया है। इनकी वजह से पूरे गांव में हर कोई गाली देने से बचता है। यह नियम गरीब और रसूखदार सभी पर लागू होता है। अगर किसी ने लड़ाई झगड़े में गलती से भी गाली दे दी, तो उस पर तुरंत 500 रुपये जुर्माना लगाया जाता है। जुर्माना नहीं देने पर दोषी व्यक्ति से एक घंटे तक गांव में झाड़ू लगवाई जाती है। यह पहल बच्चों से लेकर युवाओं को सभ्य और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूक बनाने के लिए की गई है। साथ ही उनकी पढ़ाई के लिए पुस्तकालय भी खोला गया है। जहां कर्म, धर्म सहित जनरल नॉलेज और स्कूली पाठयक्रम की किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा गांव में चार स्थानों पर फ्री वाईफाई स्थापित किया है, जिससे गांव का प्रत्येक व्यक्ति मुफ्त इंटरनेट का लाभ उठा रहा है। साथ में हर घर हरियाली अभियान के तहत लोगों को पौधे वितरित किए गए हैं, जिससे गांव को हरित क्रांति से भी जोड़ा जा सके।
ग्रामीणों की सहमति के बाद लागू हुआ नियम
ग्रामीणों की सहमति के बाद ही गांव में यह फैसला लागू किया गया। ग्राम पंचायत ने गांव में जगह-जगह पोस्टर लगाकर ‘गाली देना मना है’ का संदेश फैलाया। इसके साथ ही गांव भर में इसकी घोषणा कर लोगों को नियमों की जानकारी दी गई, जिसे ग्रामीणों ने स्वीकार किया।
अनोखी पहल की हो रही सराहना
ग्राम पंचायत की इस अनोखी पहल की पूरे बुरहानपुर जिले में सराहना हो रही है। सरपंच विनोद शिंदे ने कहा कि सभी ग्रामीणों के सहयोग से यह संभव हो पाया और अब बोरसर गांव एक सकारात्मक बदलाव का उदाहरण बन गया है। बोरसर की यह पहल सामाजिक सुधार की दिशा में एक मिसाल है। यदि अन्य गांव भी इसे अपनाते हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव देखा जा सकता है।


















