जागरूक, सक्रिय  और संगठित हिंदू समाज भारत की समस्याओं का समाधान : RSS अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल
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होम भारत ओडिशा

जागरूक, सक्रिय  और संगठित हिंदू समाज भारत की समस्याओं का समाधान : RSS अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल

यह कार्यक्रम संघ के ‘100 वर्ष’ कार्यक्रम श्रृंखला का हिस्सा था और संबलपुर महानगर द्वारा तपस्विनी ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Apr 8, 2026, 03:59 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: “जागरूक, सक्रिय और संगठित हिंदू समाज ही भारत की सभी समस्याओं का समाधान है,” यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख श्री रामलाल,  ने संबलपुर में आयोजित प्रमुख जनसंगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। यह कार्यक्रम संघ के ‘100 वर्ष’ कार्यक्रम श्रृंखला का हिस्सा था और संबलपुर महानगर द्वारा तपस्विनी ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर संघचालक श्री दीपक कुमार पंडा ने की, जिसमें समाज के प्रबुद्ध और प्रभावशाली व्यक्तियों की बड़ी संख्या ने भाग लिया।

कार्यक्रम में संबोधित करते हुए श्री रामलाल ने संघ की शताब्दी वर्ष की अविरल और सतत यात्रा का स्मरण कराया। उन्होंने संघ की कार्यशैली, समाज में उसकी प्रासंगिकता और उसकी व्यापक सामाजिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ ने भारतीय समाज को संगठित करने के लिए प्रेरणा दी और इसके पीछे डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की निस्वार्थ समर्पित नेतृत्व क्षमता थी। श्री रामलाल ने डॉ. हेडगेवार के “वन लाइफ, वन मिशन” के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य भारत को स्वतंत्र और सशक्त बनाना था ताकि देश कभी भी पुनः गुलामी की स्थिति में न आ सके। इसी संदर्भ में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के कार्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिनका मुख्य उद्देश्य आत्म-बोध और समाज के उत्थान का था।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संघ एक छोटे संगठन के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन आज यह राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक संगठन के रूप में विकसित हो चुका है। शताब्दी वर्ष में संघ ने 10 करोड़ से अधिक हिंदू परिवारों से संपर्क स्थापित किया है। उन्होंने संघ के मूल्यों—देशभक्ति, अनुशासन, सांस्कृतिक गौरव, सेवा भाव और सम्मान—को इसके सर्वांगीण स्वरूप के रूप में बताया। श्री रामलाल ने कहा कि संघ ने समाज के कमजोर पहलुओं की पहचान कर उन्हें सुधारने और एक संगठित समाज के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया। संघ परिवार और परंपरा पर आधारित, स्वावलंबी संगठन है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संघ को तीन बार प्रतिबंधित किया गया और आपातकाल हटाने में इसका योगदान सराहनीय रहा। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री सहित संघ के कट्टर आलोचक भी चीन युद्ध के समय दिल्ली परेड में संघ को आमंत्रित कर इसके राष्ट्रप्रेम और सेवाभाव को मान्यता दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय आपदाओं और संकटों में संघ हमेशा धर्म, जाति या संप्रदाय की परवाह किए बिना सहायता के लिए आगे आया है।

 

 

रामलाल ने कहा कि संघ ने राम मंदिर आंदोलन में भी महत्वपूर्ण बलिदान दिए, जो भारतीय समाज के आत्म-सम्मान और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने “सर्वे भवन्तु सुखिन:” के सिद्धांत को अपनाने पर बल दिया और कहा कि एक सशक्त और प्रभावशाली भारत ही विश्व में शांति और समृद्धि सुनिश्चित कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि “अर्बन नक्सल” और “टुकड़े-टुकड़े गैंग” भारत के भविष्य के लिए सबसे खतरनाक तत्व हैं और सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने हिंदुत्व को सुरक्षा की गारंटी बताते हुए कहा कि भारत न केवल अपने लिए, बल्कि विश्व की भलाई के लिए कार्य करता है। भारत की ताकत उसकी आध्यात्मिकता में निहित है।

प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान उन्होंने डेमोग्राफी में बदलाव और राष्ट्रीय जिम्मेदारी पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह सकारात्मक सोच, सकारात्मक बोल और सकारात्मक कर्म के माध्यम से देश के विकास में योगदान करे। उन्होंने बताया कि अलगाववाद और आतंकवाद समाप्त करना भारत का लक्ष्य है और संघ इसके लिए प्रतिबद्ध है। श्री रामलाल ने “पंच परिवर्तन” की संकल्पना समझाते हुए कहा कि भारत को एक विकसित राष्ट्र और वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में पांच महत्वपूर्ण आदतें अपनानी होंगी। पहला, पर्यावरण संरक्षण जिसमें वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक का उपयोग कम करना शामिल है। दूसरा, पारिवारिक जागरूकता, जिसमें कम से कम साप्ताहिक एक साथ भोजन करना, सामूहिक प्रार्थनाएं करना, वार्षिक पारिवारिक भ्रमण करना और जीवनशैली एवं भाषा में भारतीय मूल्यों को अपनाना शामिल है।

तीसरा, सामाजिक समरसता, जिसमें जातिवाद का उन्मूलन करना और सार्वजनिक स्थानों जैसे मंदिर, श्मशान और जलस्रोतों तक सभी के लिए समान पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है। चौथा, आत्म-जागरूकता, जिसमें स्वदेशी को बढ़ावा देना और मातृभाषा का सम्मान करना तथा “वैश्विक सोचें, स्थानीय रूप से कार्य करें” के सिद्धांत का पालन करना शामिल है। पांचवां, नागरिक कर्तव्यबोध, जिसमें संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना, नियमों का पालन करना और जिम्मेदार नागरिक के रूप में कर्तव्यों का पालन करना शामिल है। ये पांच आदतें मिलकर एक मजबूत, अनुशासित और प्रगतिशील समाज का निर्माण करती हैं। इस कार्यक्रम में संबलपुर महानगर के 200 से अधिक प्रबुद्ध नागरिक, समाजसेवी, शिक्षाविद, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी, न्यायिक पेशेवर, कलाकार, उद्यमी और क्रीड़ाविद शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन महानगर प्रचार प्रमुख ज्ञानरंजन पंडा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आशीष पटनायक ने दिया। कार्यक्रम का समापन “वंदे मातरम्” के सामूहिक गायन के साथ हुआ। सभी संघ कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन और संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

Topics: RSS Ramlal statementHindu society unity IndiaRSS on national issues IndiaOrganized Hindu society solution IndiaRSS Akhil Bharatiya Sampark Pramukh speech
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