सीमाएं सुलगीं, खजाना खाली
July 14, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

सीमाएं सुलगीं, खजाना खाली

अफगानिस्तान सीमा पर खुला संघर्ष, बलूचिस्तान में तेज होती बगावत और कूटनीतिक दबाव, पाकिस्तान चारों तरफ से घिर चुका है। महंगाई और कर्ज ने उसकी अर्थव्यवस्था को हिला दिया है

Written byमृदुल त्यागीमृदुल त्यागी
Apr 8, 2026, 01:11 pm IST
in विश्व
अफगानिस्तान के काबुल स्थित अस्पताल पर पाकिस्तानी की बमबमारी के बाद का दृश्य

अफगानिस्तान के काबुल स्थित अस्पताल पर पाकिस्तानी की बमबमारी के बाद का दृश्य

पाकिस्तान इस समय हर मोर्चे पर पिट रहा है। वह अफगानिस्तान, बलूचिस्तान और पश्चिम एशिया की जटिलताओं में फंसा हुआ है, जिसने उसकी सुरक्षा और स्थिरता को एक साथ चुनौती दी है। क्या पाकिस्तान अपने पतन की ओर है? ईरान और इस्राइल-अमेरिका युद्ध के बीच यह सवाल विश्व कूटनीतिक हलकों में तैर रहा है। मिसाइलों, ड्रोन और हवाई हमलों की गूंज के बीच भारत के पड़ोसी देश में इतना कुछ हो रहा है, जो आने वाले समय में ईरान से भी बड़ा संकट बन सकता है। पाकिस्तान किस कदर घिरा हुआ है, पहले जरा इन बिंदुओं पर गौर कीजिए,

  •  अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान के साथ खुला युद्ध छिड़ चुका है। पाकिस्तानी फौज और वायुसेना अफगानिस्तान के अंदर हमले कर रही है, तो जवाब में तालिबान ने सीमा चौकियों पर हमले करके और ड्रोन स्ट्राइक से पाकिस्तान के छक्के छुड़ा रखे हैं।
  • पाकिस्तानी फौज का ध्यान अफगानिस्तान सीमा पर लगते ही बलूच लड़ाके और आक्रामक हो गए हैं। पाकिस्तानी फौज पर उन्होंने हमले तेज कर दिए हैं।
  •  कूटनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का रक्षा समझौता है कि किसी एक मुल्क पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। ईरान के हमले के बाद सऊदी अरब का दबाव है कि पाकिस्तान इस युद्ध में कूदे।
  •  पाकिस्तानी फौज के अमेरिका की गोद में बैठ जाने के बाद से चीन भी खिन्न है। वह पाकिस्तान में चाइना-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपैक) परियोजनाओं पर बलूच लड़ाकों के हमलों में भारी नुकसान से भी नाराज है।

इस सबसे अलग, एक मार महंगाई और खाली होते खजाने की है। पेट्रोल 350 रुपए पहुंच गया है। स्कूल बंद कर दिए गए हैं। सरकारी कर्मचारियों को घर बैठा दिया गया है। जरूरी सामान की कीमतों में आग लगी है। पहले पाकिस्तान की बदहाल अंदरूनी और बाहरी सुरक्षा को समझना होगा, क्योंकि हालात लगातार सरकार और सेना के हाथ से निकलते जा रहे हैं। अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव अब खुले संघर्ष में बदल चुका है। फरवरी में शुरू हुआ टकराव मार्च आते-आते और तेज हो गया है। जहां पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर कई हवाई हमले किए और तालिबान ने जवाबी कार्रवाई की।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह अब सिर्फ तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ ऑपरेशन नहीं रहा, बल्कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधा टकराव बन गया है। पाकिस्तान ने 21-22 फरवरी को नंगरहार, पक्तिका और खोस्त प्रांतों में हवाई हमले शुरू किए। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि ये हमले टीटीपी और आईएसआईएस-के के सात ठिकानों पर थे, जहां से पाकिस्तान में हमले हो रहे थे। पाकिस्तान का दावा है कि इन हमलों में 80 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। जबकि अफगानिस्तान का कहना है कि उसके नागरिक ठिकानों पर हमले किए गए। इसमें 18 निर्दोष नागरिक मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। जवाब में 26 और 27 फरवरी को तालिबान ने पाकिस्तान सीमा पर जबरदस्त हमले किए। तालिबान ने मोर्टार, रॉकेटों के साथ पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर जबरदस्त गोलीबारी की।

अफगानिस्तान से खुला युद्ध

पाकिस्तान ने इसे खुला युद्ध बताते हुए अफगानिस्तान के खिलाफ वायुसेना उतार दी। पाकिस्तानी एयर फोर्स ने काबुल, कंधार, पक्तिया और पक्तिका में तालिबान के मिलिट्री मुख्यालय, हथियार डिपो और सीमा चौकियों को निशाना बनाया। तालिबान ने ड्रोन के जरिए इन हमलों का जवाब देना शुरू कर दिया। क्वेटा, कोहाट और रावलपिंडी तक तालिबान के ड्रोन जा पहुंचे। पाकिस्तान का कहना है कि उसके ऑपरेशनों में 500 से ज्यादा अफगान लड़ाके और सैनिक मारे गए, जबकि उसके 12 सैनिक शहीद हुए। अफगान तालिबान का दावा है कि उसके हमलों में 150 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, कई चौकियां तबाह हुईं। 16 मार्च को पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान पर एक रिहैब सेंटर पर हमला किया। इस हमले में 400 से ज्यादा लोग मारे गए। तालिबान का कहना है कि इसमें औरतें और बच्चे भी शामिल हैं। इसके जवाब में तालिबान ने पाकिस्तान की सीमा पर स्थिति चौकियों और ड्रोन से अलग-अलग इलाकों पर हमला किया। हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

बलूच दे रहे चुनौती

उधर, बलूच लिबरेशन आर्मी ने बलूचिस्तान में अलग तबाही मचा रखी है। फरवरी में बहुत समन्वित तरीके से बीएलए ने हमले किए। बीएलए ने फरवरी में बलूचिस्तान के नौ जिलों-जिनमें क्वेटा, ग्वादर, मस्तुंग, नोशकी, पंजगुर शामिल हैं-में एक साथ हमले किए। पुलिस स्टेशन, बैंक, सरकारी इमारतों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के ठिकानों को निशाना बनाया। बीएलए ने इसे ‘ऑपरेशन ब्लैक स्टॉर्म’ का नाम दिया। बीएलए का दावा है कि उसने पाकिस्तान के दो सौ से ज्यादा सैनिकों को इन हमलों में मार गिराया। 24 सैनिकों की मौत की बात खुद पाकिस्तानी सेना स्वीकार कर रही है। इन हमलों में खास बात यह है कि बलूच लड़ाके सीपैक, चीनी हितों और पाकिस्तानी फौज को बहुत निर्धारित तरीके से निशाना बना रहे हैं। सीपैक परियोजनाओं का काम तमाम जगह पूरी तरह से ठप है।

अफगानिस्तान और बलूच मोर्चों पर भारी नुकसान झेलने के बाद पाकिस्तानी सेना के अधिकारी समझ नहीं पा रहे कि फौज की तैनाती कैसे करें। पाकिस्तानी सेना की तैयारी, तैनाती और संसाधन हमेशा से भारत-केंद्रित रहे हैं। लेकिन अफगानिस्तान से लगी 2600 किलोमीटर लंबी दुर्गम सीमा पर अब पाकिस्तानी फौज की भारी तैनाती जरूरी हो गई है। बलूच लड़ाके जैसे-जैसे अपने हमलों का दायरा बढ़ा रहे हैं, यहां भी फौज की तैनाती जरूरी है। वजीरिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा में पहले से ही टीटीपी की वजह से भारी तादाद में फौज तैनात है।

महंगाई की मार

खतरा सिर्फ सीमाओं पर ही नहीं है। ईरान युद्ध के साथ पाकिस्तान में महंगाई की नई लहर आई है। ईरान और इस्राइल-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद मार्च 2026 में ही पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल व डीजल की कीमतों में 55 रुपये की बढ़ोतरी की है। पाकिस्तान में अब पेट्रोल 321 रुपये और डीजल 356 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इस दर पर भी पाकिस्तान सरकार कम से कम पेट्रोल और डीजल की खपत का प्रयास कर रही है। तेल की कीमत बढ़ने से परिवहन, बिजली और खाने-पीने के सामान के दाम में एक हफ्ते में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। एक अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान में महंगाई दर दस फीसदी तक जा सकती है। उधार पर जिंदा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था किसी भी समय वेंटिलेटर पर जा सकती है। पाकिस्तान सरकार तेल बचाने और खर्च कम करने का हर प्रयास कर रही है। सरकारी दफ्तरों में 4 दिन का काम कर दिया गया है। कई जगह दो हफ्तों के लिए स्कूल तक बंद करने पड़े हैं। सरकार ने कुल खर्च में 20 फीसदी तक की कटौती का लक्ष्य रखा है। फिर भी पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल महंगाई और तेल की कीमतों से टक्कर लेने लायक हालत में नहीं है। मार्च अंत आते-आते पाकिस्तान को नए कर्ज की जरूरत पड़ने वाली है।

आंतरिक राजनीतिक स्थिति भी इस सुरक्षा संकट को और जटिल बना रही है। पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है। 2022 में तत्कालीन प्रधानमंत्री के सत्ता से हटने के बाद बड़े पैमाने पर राजनीतिक विरोध प्रदर्शन हुए। कई शहरों में हिंसक झड़पें हुईं और सुरक्षा बलों को बड़े पैमाने पर तैनात करना पड़ा। मई 2023 में राजनीतिक विरोध के दौरान कई सरकारी भवनों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले हुए, जो पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में असाधारण घटनाएं मानी गईं। इन घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों को देश के भीतर बड़े पैमाने पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में संसाधन लगाने पड़े। आर्थिक दबाव भी सुरक्षा संकट को गहरा करता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों से गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसमें उच्च महंगाई, मुद्रा संकट और बाहरी ऋण शामिल हैं। आर्थिक कमजोरी के कारण सरकार के लिए सुरक्षा अभियानों पर खर्च करना और प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यक्रम लागू करना कठिन हो जाता है। उदाहरण के लिए, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में बेरोजगारी और गरीबी का स्तर राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है, जो उग्रवादी संगठनों के लिए भर्ती का आधार बन सकता है।

इन सभी कारकों को मिलाकर देखा जाए तो पाकिस्तान एक बहु-आयामी सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है। अफगानिस्तान सीमा से आने वाला आतंकवाद, बलूचिस्तान में बढ़ती अलगाववादी गतिविधियां और देश की राजनीतिक अस्थिरता—ये तीनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। जब सीमा पर तनाव बढ़ता है तो सेना को वहां अधिक संसाधन लगाने पड़ते हैं, जिससे आंतरिक सुरक्षा अभियानों पर असर पड़ता है। इसी तरह राजनीतिक संकट के समय सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान आंतरिक व्यवस्था बनाए रखने में लग जाता है, जिसका फायदा उग्रवादी समूह उठाने की कोशिश करते हैं। इन परिस्थितियों में पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसे एक साथ कई सुरक्षा मोर्चों को संभालना पड़ रहा है।

विकास के लिए चुनौती

यदि अफगान सीमा पर तनाव, बलूचिस्तान में हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता एक साथ जारी रहती है, तो यह स्थिति पाकिस्तान की दीर्घकालिक स्थिरता और आर्थिक विकास दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। एक अलग आफत सऊदी अरब के साथ उसका साझा रणनीतिक सहयोग समझौता बनकर आई है। इसके तहत दोनों देशों ने तय किया कि किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे दोनों पर हमला माना जाएगा। समस्या यह है कि पाकिस्तान की ईरान के साथ नौ सौ किलोमीटर लंबी सीमा है। अगर वह खुलकर सऊदी अरब के समर्थन में आता है, तो ईरान से उसका टकराव तय है। वहीं पाकिस्तान में 4 करोड़ शिया मुसलमान हैं, जो दिल से ईरान के करीब हैं। ऐसे में देश के अंदर ही एक नए टकराव का खतरा पैदा हो जाएगा। लेकिन उधर सऊदी अरब तो पाकिस्तान के अस्तित्व का सवाल है। पाकिस्तान को सऊदी अरब से उधार तेल मिलता है। लाखों डॉलर की सहायता मिलती है। इसके अलावा 40 लाख पाकिस्तानी खाड़ी देशों में काम करते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि इन प्रवासियों की रेमिटेंस (भेजी गई रकम) पर ही पाकिस्तान जिंदा है।

सऊदी भी नाराज

पाकिस्तान जिंदा है। लेकिन इस तरह के कूटनीतिक संकेत मिलने लगे हैं कि सऊदी अरब पाकिस्तान के रुख से नाराज है। सऊदी अरब की ओर से सार्वजनिक रूप से कहा गया कि हमने पाकिस्तान के साथ अपने साझा रक्षा सहयोग समझौते पर बात की है। सऊदी की नाराजगी इस बात से समझी जा सकती है कि उन्होंने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख को रियाद तलब कर लिया था। दोनों देशों की भाषा भी अलग थी। सऊदी ने ईरान के हमलों को संप्रभुता पर हमला कहा और तत्काल रोकने की मांग की, जबकि पाकिस्तान की भाषा शांति और संयम वाली थी। जाहिर है, ईरान युद्ध का मामला ठंडा पड़ते ही सऊदी अरब भी पाकिस्तान को अपना रंग दिखाएगा।

चीन भी अब दोस्ती से रणनीतिक सतर्कता वाली श्रेणी में आ रहा है। पिछले एक साल में, और खास तौर पर भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बुरी तरह शिकस्त खाने के बाद, पाकिस्तानी सेना के जनरल अमेरिका की गोद में जा बैठे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बिजनेसमैन की तरह रेअर अर्थ मिनरल का जाल बिछाया और पाकिस्तानी सेना प्रमुख बार-बार वॉशिंगटन की मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाने लगे। इससे चीन सतर्क हो गया है। सीपैक परियोजनाओं में चीन के हितों और नागरिकों पर लगातार पाकिस्तान में हमले हो रहे हैं। पाकिस्तानी सेना इन पर लगाम लगाने में पूरी तरह नाकाम रही है। साथ ही पाकिस्तान के रोज नए कर्ज से चीन को पाकिस्तान में अपने अरबों डॉलर के निवेश की चिंता सताने लगी है। ऐसे में पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के पूरी तरह अमेरिका के पाले में जा बैठने से बीजिंग में निराशा है। लेकिन चीन अरबों डॉलर पाकिस्तान में झोंक चुका है, ऐसे में उसकी निराशा स्वाभाविक है।

Topics: पाञ्चजन्य  विशेषईरान युद्धतहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तानआर्थिक बदहालीसऊदी अरबचीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियाराईरानसऊदी-पाक रक्षा समझौतामहंगाई दरसैन्य विफलतापाकिस्तानी फौज"सऊदी अरब और पाकिस्तानबलूच विद्रोहपाकिस्तान संकटकूटनीतिक दबावपाक अफगान संघर्ष
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

'अंतिम दर्शन' के लिए तेहरान की ग्रेंड मोसल्ला मस्जिद में रखे खामेनेई और मारे गए परिवार के अन्य सदस्यों के ताबूत

खामेनेई के जनाजे की आड़ में क्या Iran दे रहा दुनिया को मजहबी-राजनीतिक संकेत! हमास और हिज्बुल्लाह के नेता भी पहुंचे ईरान

बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री, इजरायल

ईरान, हमास, हिजबुल्लाह से लड़ाई कभी खत्म नहीं होगी, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का बड़ा बयान

अयातुल्ला अली खामेनेई (फाइल फोटो)

ईरान: खामेनेई के जनाजे में शामिल होंगे बिहार के राज्यपाल हसनैन, विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्का रूबियो (File Photo)

US-Iran समझौता और Marco Rubio का Middle East दौरा, क्या निकलेगी Hormuz की फांस! क्यों चिंता में हैं UAE, Qatar, Bahrin

Newzeland to declear IRGC A terrorist orgnisation

न्यूजीलैंड ईरानी IRGC को घोषित करेगा आतंकवादी संगठन

जयशंकर (बाएं) ने रूबियो को फोन पर सुनाई खरी खरी (File Photo)

अमेरिकी झूठ पर Jaishankar का तीखा वार, अमेरिकी हमले में 3 भारतीयों के मारे जाने पर Rubio को फोन पर सुनाई खरी खरी

Load More

ताज़ा समाचार

होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी ब्लॉकेड: ईरान पर तीसरी रात हमला, ट्रंप का 20% टैरिफ ऐलान; तेल की कीमतें 7.8% बढ़ी

Donald trump marco rubio cuba president

ट्रंप प्रशासन ने ICC को पूरी तरह खत्म करने की मुहिम शुरू की, मार्को रुबियो बोले- अमेरिकी संप्रभुता पर खतरा

trump Administration returns 81 billian dollor tarrifs

ट्रंप के टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध करार देने के बाद, अमेरिका को 81 अरब डॉलर वापस करने पड़े

आज का श्लोक : वरं पर्वत-दुर्गेषु भ्रन्तं वनचरैः सह।

समान नागरिक संहिता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रतिवेदन सौंपा।

MP में लिव-इन का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य, समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपा UCC का फाइनल प्रतिवेदन

सुधांशु त्रिवेदी, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाजपा

मुंबई आतंकी हमले को कांग्रेस हिंदू टेरर का रंग देना चाहती थी, ISI और कांग्रेस के बीच फिक्स्ड मैच था : सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु त्रिवेदी और राहुल गांधी

वायनाड में आपदा और सांसद देश से गायब, घोर असंवेदनशीलता दर्शाने वाला गांधी परिवार माफी मांगे : भाजपा

प्रतीकात्मक चित्र

पाकिस्तानी आतंकी नेटवर्क से जुड़ा मोहम्मद अहद गिरफ्तार, शहजाद भट्टी कनेक्शन सामने आया

अश्लील सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर इंस्टाग्राम ने भारत सरकार को दिया जवाब, जानिये क्या है मामला?

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति

US-Iran War: ट्रंप ने कहा-होर्मुज को अपने कंट्रोल में लेगा अमेरिका, जहाजों से वसूलेगा 20 फीसदी शुल्क

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies