अक्षरम-2026: हिसार में संस्कृति, साहित्य और राष्ट्रवाद का भव्य महाकुंभ
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अक्षरम-2026: हिसार में संस्कृति, साहित्य और राष्ट्रवाद का भव्य महाकुंभ

‘अक्षरम’ को ‘अक्षरों के आंगन में संस्कृति की रंगोली’ की संकल्पना के साथ आयोजित किया गया, जिसमें साहित्य, संवाद, कला, लोक संस्कृति, संगीत और सिनेमा जैसी 100 से अधिक गतिविधियां शामिल रहीं।

Written byआशीष कुमार 'अंशु'आशीष कुमार 'अंशु' — edited by Mahak Singh
Apr 6, 2026, 04:49 pm IST
in हरियाणा

हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) में 3 से 5 अप्रैल 2026 तक राष्ट्रीय स्तर का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महाकुंभ ‘अक्षरम-2026’ आयोजित किया गया। यह महोत्सव विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों तथा जिल्द-नवाचार, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी और दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (सुपवा), रोहतक के सहयोग से हुआ। इस आयोजन का मीडिया पार्टनर पाञ्चजन्य था।

‘अक्षरम’ को ‘अक्षरों के आंगन में संस्कृति की रंगोली’ की संकल्पना के साथ आयोजित किया गया, जिसमें साहित्य, संवाद, कला, लोक संस्कृति, संगीत और सिनेमा जैसी 100 से अधिक गतिविधियां शामिल रहीं। महाकुंभ ने युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने, रचनात्मकता को निखारने और राष्ट्रवादी विचारों को प्रोत्साहित करने का अनूठा मंच प्रदान किया। कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने इसे युवाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम बताया।

पहला दिन: भव्य उद्घाटन और संगीतात्मक ऊर्जा

महाकुंभ का शुभारंभ 3 अप्रैल को प्रदर्शनी और स्वदेशी मेले के उद्घाटन के साथ हुआ। प्रसिद्ध संगीतकार अनु मलिक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. कमल गुप्ता विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम की शुरुआत में ‘भारत विभाजन विभीषिका’ और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर आधारित प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। स्वदेशी मेले में स्थानीय कारीगरों की हस्तकला और उत्पादों ने सभी का ध्यान खींचा।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उन्हें संस्कृति और साहित्य से जोड़ना है। अनु मलिक ने अपने लोकप्रिय गीतों से माहौल को जीवंत कर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से तीन शब्द “आग, चाय और मोहब्बत” लेकर तुरंत एक गीत रचा और प्रस्तुत किया, जिसने पूरा सभागार झुमा दिया। अनु मलिक ने युवाओं को संदेश दिया कि अपनी प्रतिभा को बाहर निकालें, मेहनत करें और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करें। उन्होंने विश्वविद्यालय की हरियाली की सराहना करते हुए गुरु जम्भेश्वर जी के पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों पर जोर दिया। डॉ. कमल गुप्ता ने स्वदेशी मेला को गौरवशाली अतीत और आत्मनिर्भर भविष्य के बीच सेतु बताया। पहले दिन की सांस्कृतिक संध्या में कवि सम्मेलन और सुपवा बैंड की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हरियाणवी लोकधुनों और आधुनिक संगीत का संगम कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर गया। इस दिन नीलोत्पल मृणाल और विनीत पांडेय जैसे युवा लेखक- कवि भी अपने विचारोत्तेजक वक्तृत्व से उपस्थित रहे।

दूसरा दिन: वैचारिक गहराई और लोक संस्कृति का संगम

4 अप्रैल को महोत्सव ने वैचारिक ऊंचाई प्राप्त की। सेमिनार हॉल में आयोजित सत्रों में इतिहास, राष्ट्रवाद, शिक्षा और संवेदनशीलता पर गहन चर्चा हुई। संत रघुबीर सिंह बाजवा ने जोर दिया कि युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहें तो वे स्वयं और राष्ट्र दोनों को सशक्त बनाएंगे। प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने कहा कि जिस समाज को अपने इतिहास और पहचान का बोध नहीं, वह दीर्घकालिक विकास नहीं कर सकता। प्रो. कोशलेंद्र तिवारी ने शिक्षा को केवल जानकारी देने तक सीमित न रखकर व्यक्ति को संवेदनशील नागरिक बनाने का उद्देश्य बताया।

लोक संस्कृति, संगीत और सिनेमा पर केंद्रित विशेष विचार-विमर्श सत्र में प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी और फिल्म निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भाग लिया। डॉ. द्विवेदी ने भगवान राम और अयोध्या के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला तथा भारतीय परंपराओं को पहचान की आधारशिला बताया। मालिनी अवस्थी ने हरियाणा की मिट्टी से जुड़ाव पर जोर देते हुए लोक संगीत को संस्कृति की आत्मा करार दिया। उन्होंने ‘रंगीला बैरन बिहारी’ और ‘चुनरिया गुलाबी’ जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए, जिन पर दर्शक झूम उठे। इस दिन प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंद कुमार, हितेश शंकर और अन्य वक्ताओं ने साहित्य की शक्ति और उसके सही दृष्टिकोण पर चर्चा की। दीनबंधु छोटूराम के योगदान को याद किया गया। सुपवा रोहतक के कुलपति प्रो. अमित आर्य ने आयोजन की सराहना की और अपने 150 से अधिक विद्यार्थियों-शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी का उल्लेख किया। एचएयू कुलपति प्रो. बी.आर. कम्बोज ने संस्कार, साक्षरता और संस्कृति के तीन ‘स’ को देश को आत्मनिर्भर बनाने वाले तत्व बताया।

तीसरा दिन: सांस्कृतिक उत्सव और समापन की झलक

5 अप्रैल को महाकुंभ के अंतिम दिन का शुभारंभ वंदे मातरम् और जीजेयू कुलगीत से हुआ। कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने ‘अक्षरम-2026’ को विचारों का विराट उत्सव बताया, जहां देशभर से बुद्धिजीवी और विद्यार्थी संवाद कर रहे हैं। उन्होंने इसे महानगरों की तर्ज पर विश्वविद्यालय स्तर की नई पहचान बताया। प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने पुनः भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर दिया और कहा कि कोई अक्षर ऐसा नहीं जिससे श्लोक न बने और कोई वनस्पति ऐसी नहीं जिससे औषधि न बनाई जा सके।

इस अवसर पर स्व. रोहित सरदाना के पिता रत्न चंद्र सरदाना को विशेष सम्मानित किया गया। हितेश शंकर ने ‘अक्षरम्’ थीम की टी-शर्ट लॉन्च की और अतिथियों को वितरित की। हरियाणवी लोक गायक बिंदर दनोदा और विनु गौड़ के भक्ति गीत “ओ नाथ जी चेला बना ले” ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। सुपवा रोहतक के 140 छात्र-छात्राओं ने महोत्सव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मेन ऑडिटोरियम में उनके फैशन शो ने रैंप का माहौल बना दिया। छात्रों ने पारंपरिक और आधुनिक भारतीय परिधानों में प्रोफेशनल वॉक किए। डेढ़ घंटे के इस शो में रंग-बिरंगी रोशनियां और म्यूजिक की धुनों पर सधे कदमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुपवा के विद्यार्थी आर्ट एग्जीबिशन, डिजाइन शो, नाटक प्रस्तुतियों, बैंड परफॉर्मेंस, हरियाणवी डांस और अवार्ड विनिंग फिल्मों की स्क्रीनिंग में भी सक्रिय रहे। राष्ट्रवादी कवि विनीत चौहान, कवयित्री भारती दीक्षित और अन्य साहित्यकारों की उपस्थिति ने साहित्यिक आयाम को मजबूत किया।

मुख्य आकर्षण और योगदान

‘अक्षरम-2026’ में ओपन माइक, पुस्तक विमोचन, हास्य-व्यंग्य, भजन संध्या, कवि सम्मेलन और समसामयिक विमर्श जैसे कार्यक्रम शामिल थे। महाकुंभ ने साहित्य को मात्र मनोरंजन न मानकर समाज और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया।

तीन दिवसीय ‘अक्षरम-2026’ ने जीजेयू परिसर को साहित्य और संस्कृति के उत्सव में बदल दिया। यह आयोजन युवाओं में रचनात्मकता, राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक जागरूकता जगाने में सफल रहा। अनु मलिक, मालिनी अवस्थी, डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी, सुपवा के छात्रों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने इसे यादगार बनाया। ऐसे महाकुंभ न केवल विश्वविद्यालय की पहचान बढ़ाते हैं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। ‘अक्षरम-2026’ युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जो उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य की ओर अग्रसर करता है।

Topics: Anu MalikCultural HeritageKavi SammelanYouth EmpowermentMusic and DanceAksharam 2026Haryanvi CultureGuru Jambheshwar University of Science and TechnologyArt and Culture FestivalGJU HisarNational Literary MahakumbhCultural FestivalHaryana LiteratureFolk CultureCulture ProgramIndian knowledge traditionSwadeshi MelaNationalism
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार अंशु पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों तक मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान STEP से जुड़े रहे हैं। [Read more]
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