गांधी और विजयन परिवारों के गुप्त समझौते के लपेटे में केरल
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गांधी और विजयन परिवारों के गुप्त समझौते के लपेटे में केरल

राहुल गांधी ने रायबरेली रखकर वायनाड क्यों छोड़ा? 2021 में कांग्रेस की जानबूझकर कमजोर लड़ाई और पी. विजयन के दामाद मोहम्मद रियास की भारी जीत के पीछे गांधी-विजयन परिवार का गुप्त डील? पूरी डिटेल पढ़ें।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
Apr 6, 2026, 02:29 pm IST
in विश्लेषण, केरल
Rahul Gandhi P Vijayan

2019 के बाद केरल  में एक गुप्त समझौता राज्य की राजनीति को प्रभावित कर रहा है। यह समझौता दो दलों का नहीं वरन दो परिवारों का है। कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो सोनिया गांधी और केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन के परिवारों बीच गुप्त समझोता है, जिसके तहत गांधी परिवार विधानसभा का चुनाव कमजोरी से लड़कर पी विजयन को मुख्यमंत्री बने रहने में मदद करेगी। वहीं पी. विजयन गांधी परिवार को वायनाड लोकसभा सीट जीतने के साथ-साथ केरल से कांग्रेस पार्टी को ज़्यादा से ज़्यादा सीटें जिताकर दिल्ली में गाँधी परिवार को मजबूत करेंगे। गाँधी परिवार को अपना राजनीतिक वजूद बनाये रखने के लिए सुरक्षित लोकसभा सीटों की जरूरत है। वहीं दूसरी ओर केरल के मुख्यमंत्री का एकमात्र उद्देश्य अपने दामाद मोहम्मद रियास को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपना है।

कांग्रेस ने केरल से ही जीती थी सबसे अधिक लोकसभा सीट

कांग्रेस पार्टी ने केरल से ही 2019 और 2024 के लोकसभा के चुनावों में सबसे अधिक लोकसभा सीटें जीती थीं। कांग्रेस पार्टी ने केरल की कुल 20 लोकसभा सीटों में से 2019 में 15 और 2024 में 14 लोकसभा की सीटें जीती है। 2024 लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने दो लोकसभा सीटों रायबरेली और वायनाड से लोकसभा चुनाव जीता था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि राहुल गांधी वायनाड सीट से अपनी सदस्य्ता बनाये रखेंगे और रायबरेली सीट अपनी बहन प्रियंका गांधी के लिए खाली करेंगे। क्योंकि यह सीट लंबे समय से गांधी परिवार का गढ़ रही है। 1967 से यह सीट गाँधी परिवार का मजबूत गढ़ रहा है और इंदिरा गाँधी, अरुण नेहरू, सोनिया गाँधी  2024 से पूर्व इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था।

अतएव 2024 में इस सीट को जीतने के बाद यह उम्मीद थी कि गाँधी परिवार यह सीट खाली करके प्रियंका गाँधी वढेरा को इस सीट से चुनावी मैदान में उतारेगी। 1980 में इंदिरा गांधी ने दो सीटों रायबरेली और तात्कालिक आंध्र प्रदेश के मेडक से चुनाव जीतने के बाद रायबरेली की सीट खाली करके अपने परिवार के अन्य सदस्य अरुण नेहरू की राजनीतिक पारी का शुरुआत करवाई थी।

गांधी-विजयन परिवार के बीच साठगांठ का एक और उदाहरण

लेकिन उम्मीदों के उल्टा राहुल गांधी ने वायनाड सीट खाली कर दी और रायबरेली सीट अपने पास बनाये रखी इसका एकमात्र कारण गांधी परिवार और पी विजयन परिवार के बीच आपसी सांठगांठ हैं। वायनाड लोकसभा सीट पर विगत तीन लोकसभा चुनाव 2019 और 2024 में आमचुनाव और उपचुनाव में गाँधी परिवार को मुख्य विपक्षी गठबंधन एलडीए से कोई गंभीर चुनौती मिलती नहीं दिखी। इसके  बदले गाँधी परिवार केरल में बिना गंभीरता से 2021 का विधानसभा चुनाव लड़कर पी विजयन को मुख्यमंत्री बने रहने में मदद की थी। केरल में 1982 से 2016 तक कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और माकपा नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट में सत्ता के अद्ल बदल की परम्परा रही थी और 2021 में कांग्रेस पार्टी नीत यूडीएफ के सत्ता में वापसी की बारी थी।

मगर कांग्रेस पार्टी की 2021 में विधानसभा 2016 के अपेक्षा कम हो गई और यही हश्र कांग्रेस पार्टी नीत यूडीएफ का भी हुआ और इस गठबंधन की सीट घट गई। 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में ऐसा कभी भी महसूस नहीं हुआ कि कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापसी के लिए संघर्ष कर रही है, बल्कि वो गाहे बगाहे पी विजयन की सत्ता में बने रहने की राह आसान करती नज़र आई। वर्तमान 2026 के चुनाव की तरह ही 2021 में भी कांग्रेस पार्टी केरल विधानसभा चुनाव में चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बस रही थी। 2021 में कांग्रेस पार्टी की सहयोगी और यूडीएफ की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने गठबंधन में अपने कोटे की 25 सीटों पर सत्तारूढ़ एलडीएफ  को ज़्यादा कड़ी टक्कर दी थी।

इसे भी पढ़ें: केरल में कांग्रेस की सांप्रदायिक राजनीति का अंत निकट

2019 में हुई गुप्त समझौते की शुरुआत

गांधी परिवार और पी. विजयन के बीच एक गुप्त समझौते की शुरुआत 2019 में हुई जब राहुल गांधी ने अमेठी लोकसभा सीट के अलावा केरल की वायनाड को अपनी दूसरी सीट के तौर पर चुना था। इससे पहले गांधी परिवार के किसी भी सदस्य ने केरल से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था। इंदिरा गांधी 1978 में कर्नाटक के चिकमगलूर से लोकसभा उपचुनाव लड़ने वाली गांधी परिवार की पहली सदस्य थीं। इसके अलावा गांधी परिवार के किसी भी सदस्य ने 2024 तक किसी भी दक्षिणी राज्य से किसी भी सीट से दोबारा चुनाव नहीं लड़ा था।

1980 में, इंदिरा गांधी ने चिकमंगलूर के बजाय तात्कालिक आंध्र प्रदेश के मेंढ़क से चुनाव लड़ी थी। हालांकि, हैरानी की बात है कि इंदिरा गांधी की मौत के बाद हुए 1984 के लोकसभा चुनावों में पूरे देश में जीत हासिल करने वाली कांग्रेस पार्टी मेडक लोकसभा सीट हार गई लड़ी थी। सोनिया गांधी ने 1999 में अमेठी लोकसभा सीट के अलावा कर्नाटक के बेल्लारी से भी चुनाव लड़ी थी। हालांकि, बेल्लारी में सोनिया गांधी के चुनाव लड़ने के बाद कांग्रेस पार्टी 2004, 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में यह सीट हार गई। ऐसा चुनावी इतिहास होने के बावजूद, राहुल गांधी का वायनाड से लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला बहुत हैरान करने वाला था।

केरल के मुख्‍यमंत्री पी. विजयन के दामाद मोहम्मद रियास ने 2021 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कोझिकोड जिले की बेपोर विधानसभा सीट का चयन किया। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में, कांग्रेस पार्टी बेपोर विधानसभा सीट पर क्रमशः 10,423 और 19,561 वोटों के माकपा नीत एलडीएफ से आगे थी, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में माकपा उम्मीदवार और मुख्यमंत्री के दामाद मोहम्मद रियास ने कांग्रेस उम्मीदवार को 28,747 वोटों के अंतर से हराया, जो चौंकाने वाला था।

केरल की कुल  140 विधानसभा सीटों में से 60 वैसे सीट जिन पर 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी नीट यूडीएफ की बढ़त थी  2021 के विधानसभा चुनावों में एलडीएफ जित जाती हैं। इस तरह के चौंकानेवाले नतीजे भारतीय राजनीति में देखने को नहीं मिलता है। इतने कम समय में राज्य की 43 प्रतिशत सीटों का दूसरे पक्ष में चला जाना गुप्त साठगाठ को पुख्ता करता हैं।

 

Topics: केरल राजनीति षड्यंत्रवायनाड लोकसभा सीटRahul Gandhi WayanadWayanad Lok Sabha seatGandhi-Vijayan Nexusकेरल चुनाव 2026Kerala Congress 2021 ElectionsMohammed RiyasKerala Electionsकेरल चुनावPinarayi Vijayan's Son-in-Lawराहुल गांधी वायनाड छोड़ागांधी विजयन साठगांठकेरल कांग्रेस 2021 चुनावमोहम्मद रियास बेपोरपिनारायी विजयन दामाद
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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