ओडिशा की पायल नाग ने बैंकॉक में रचा इतिहास, चारों अंग गंवाने के बाद भी जीता 'स्वर्ण'
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ओडिशा की पायल नाग ने बैंकॉक में रचा इतिहास, चारों अंग गंवाने के बाद भी जीता ‘स्वर्ण’

फाइनल मुकाबले में पायल ने भारत की ही विश्व नंबर-1 तीरंदाज शीतल देवी को 139-136 के स्कोर से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Apr 6, 2026, 11:59 am IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: साहस, दृढ़ता और आत्मविश्वास की अद्वितीय मिसाल पेश करते हुए, ओडिशा की पायल नाग ने बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। सभी चार अंगों से वंचित होकर प्रतिस्पर्धा करने वाली पायल इस स्तर पर यह उपलब्धि हासिल करने वाली दुनिया की पहली तीरंदाज बन गई हैं। फाइनल मुकाबले में पायल ने भारत की ही विश्व नंबर-1 तीरंदाज शीतल देवी को 139-136 के स्कोर से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ पायल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान मजबूत करते हुए भारत के पैरा आर्चरी इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।

पायल की कहानी संघर्ष, साहस और संकल्प की मिसाल है। बलांगीर जिले के मुरिबहाल ब्लॉक के जमुनाबहाल गांव में एक गरीब परिवार में जन्मी पायल बचपन में पूरी तरह सामान्य थीं। उनके माता-पिता, विजय नाग और जनता नाग, मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। वर्ष 2015 में आर्थिक तंगी के कारण परिवार को छत्तीसगढ़ के रायपुर पलायन करना पड़ा।

इसी दौरान एक दिन खेलते समय आठ वर्षीय पायल एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गईं। वह गलती से एक जिंदा बिजली के तार के संपर्क में आ गईं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए उनके दोनों हाथ और दोनों पैर काटने पड़े। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। गांव लौटने के बाद जिला प्रशासन ने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया और मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता प्रदान की। बाद में पायल को कृत्रिम पैर लगाए गए, जिससे उनके जीवन में फिर से उम्मीद की किरण जगी। उन्होंने बलांगीर के बाहरी क्षेत्र स्थित पार्वती गिरि बाल निकेतन में रहकर पढ़ाई शुरू की और सडेइपाली पल्लिश्री हाई स्कूल में दाखिला लिया।

शारीरिक चुनौतियों के बावजूद पायल ने अपनी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। स्कूल के प्रधानाध्यापक वृंदाबन महाकुड के अनुसार, “दिव्यांग होने के बावजूद पायल साहस, लगन और ईमानदारी की मिसाल थीं। वह नियमित रूप से स्कूल आती थीं और अपने साथियों के साथ बिना किसी हीन भावना के खेलती-कूदती थीं।” पायल के जीवन में निर्णायक मोड़ वर्ष 2023 में आया, जब उनके कोच कुलदीप बेधवान ने उन्हें सोशल मीडिया पर देखा और जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रशिक्षण के लिए बुलाया। वहां उन्होंने शीतल देवी के साथ प्रशिक्षण लिया, जिसके बाद उन्होंने हरियाणा के सोनीपत में अपना प्रशिक्षण जारी रखा।

वर्ष 2025 में दुबई में आयोजित एशियन यूथ पैरा गेम्स में पायल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया। वर्ल्ड आर्चरी द्वारा उनके लिए विशेष उपकरणों को मंजूरी मिलने के बाद वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाली दुनिया की पहली चारों अंगों से वंचित तीरंदाज बनीं। अपने शुरुआती राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। जयपुर नेशनल्स 2025 में उन्होंने शीतल देवी को हराकर डबल गोल्ड जीता। इसके बाद उन्होंने खेलो इंडिया पैरा गेम्स और पटियाला में आयोजित नेशनल्स में रजत पदक हासिल किया, हालांकि दोनों बार वह शीतल से पीछे रहीं। बैंकॉक में मिली यह जीत शीतल के खिलाफ उनका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय विजय है।

पायल नाग बताती हैं कि हादसे के बाद कई लोगों ने उनके माता-पिता से कहा था कि वह जीवन में कुछ नहीं कर पाएंगी और उनका जीवित रहना बेकार है। ऐसे शब्दों से उनके माता-पिता टूट गए थे और अक्सर रोते रहते थे। लेकिन उनके कोच कुलदीप वेधवान ने उन्हें न केवल ढूंढा, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी जगाया कि वे कुछ कर सकती हैं। पायल का कहना है कि आज उनकी सफलता का श्रेय उनके कोच को जाता है, जिनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उनकी यह उपलब्धि न केवल ओडिशा बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है और यह उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखते हैं।

पायल नाग को ओडिशा के मुख्यमंत्री व अन्य नेताओं की बधाई
बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य और देश का गौरव बढ़ाने वाली पैरा तीरंदाज पायल नाग को ओडिशा के मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने बधाई दी है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पायल की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता राज्य के लिए गर्व का विषय है और यह अनगिनत खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने आशा जताई कि पायल की यह जीत का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा और वह अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर ओडिशा का नाम और ऊंचा करेंगी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने भी पायल नाग को बधाई देते हुए इसे ओडिशा और देश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने पायल की दृढ़ इच्छाशक्ति, कड़ी मेहनत और संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। वहीं, नेता प्रतिपक्ष नवीन ने महिला पैरा कंपाउंड फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने पर पायल नाग को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल खेल भविष्य की कामना की। पायल नाग की यात्रा यह दिखाती है कि आत्मविश्वास और दृढ़ता से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। जीवन-धमकाने वाली दुर्घटना से लेकर अंतरराष्ट्रीय चैंपियन बनने तक की उनकी कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी उपलब्धियां यह प्रमाणित करती हैं कि शारीरिक सीमाएं किसी व्यक्ति की क्षमताओं को परिभाषित नहीं करतीं। जैसे ही विश्व पायल की गोल्ड जीत का जश्न मनाता है, उनका उदाहरण खेलों से परे भी प्रभाव डालता है। पायल यह संदेश देती हैं कि सही मार्गदर्शन, साहस और लगन से सबसे बड़ी चुनौतियों को भी पार किया जा सकता है।

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