लोकसभा में सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस को भारत में नक्सलवाद को प्रश्रय देने के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1970 से लेकर मार्च 2026 तक इन्होंने नक्सलवाद और इस प्रकार की हिंसा का समर्थन किया।
राहुल गांधी ने हिडमा के समर्थन में वीडियो पोस्ट किया
अमित शाह ने कहा कि कई जवानों की हत्या के आरोपी हिडमा के मारे जाने के बाद इंडिया गेट पर नारे लगे – “कितने हिडमा मारोगे, हर घर से हिडमा निकलेगा।” राहुल गांधी ने इस वीडियो को स्वयं पोस्ट किया। ये कैसे बच सकते हैं? इन्होंने 1970 से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलवाद और इस प्रकार की हिंसा का समर्थन किया है।
भारत जोड़ो यात्रा में नक्सली संगठनों ने हिस्सा लिया
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी अपने राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलियों और उनके हमदर्दों के साथ देखे गए हैं। भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सली हैंडल्स और संगठनों ने हिस्सा लिया। 2010 में ओडिशा में लाडो सिकोका के साथ मंच साझा किया, जहां सिकोका ने इस मंच से भड़काऊ भाषण दिया और राहुल गांधी को माला भी पहनाई। वर्ष 2018 में हैदराबाद में गुम्माडी विट्टल राव उर्फ ‘गद्दार’ से मुलाकात की, जो इस विचारधारा के करीबी माने जाते हैं।
नक्सलियों पर पी चिदंबरम का बयान
कांग्रेस को आडे़ हाथों लेते हुए अमित शाह ने कहा कि 76 जवानों के मारे जाने के बाद पी. चिदंबरम ने नक्सलियों से कहा कि हम आपसे हथियार डालने के लिए नहीं कह सकते, क्योंकि हम जानते हैं कि आप ऐसा नहीं करेंगे और आप हथियारबंद संघर्ष में विश्वास करते हैं। इनके शासन में देश ऐसे चलता था। साल 2010 में तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम जी ने एक वक्तव्य दिया। छत्तीसगढ़ में एक साथ कई जवानों को मार दिया गया। उसके बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में उत्सव मनाया गया। वहां नृत्य किया गया, जिसमें पुलिस और सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने पर जश्न मनाया गया और जमीन पर भारत का तिरंगा बिछाकर पैरों के नीचे रखा गया।
मनमोहन सिंह की सरकार में बनी एनएसी, सदस्य थे हर्ष मंदर
मनमोहन सिंह की सरकार में एक एनएसी (नेशनल एडवाइजरी काउंसिल) बनाई गई। यह नई एडवाइजरी काउंसिल थी, जिसे एक एक्स्ट्रा-कॉन्स्टीट्यूशनल फोरम के रूप में खड़ा किया गया। इसमें सोनिया गांधी अध्यक्ष थीं और हर्ष मंदर इसके सदस्य थे। उनके एनजीओ अमन वेदिका में एक नक्सली नेता की पत्नी को जिम्मेदारी दी गई थी, और रिकॉर्ड में यह बात दर्ज है कि वह उन नक्सलियों में शामिल थी, जिन्होंने शहरी क्षेत्रों में अपहरण जैसे मामलों में भाग लिया था। अमित शाह ने कहा कि जब देश के सर्वोच्च सत्ता, केंद्र सरकार के ऊपर एक एक्स्ट्रा-कॉन्स्टीट्यूशनल अथॉरिटी खड़ी की जाती है, और उसके सदस्य यदि नक्सलवाद के समर्थक हों, तो फिर नक्सलियों का हौसला कैसे टूटेगा? यह सब कांग्रेस पार्टी के समय में हुआ था।
इंदिरा गांधी को माओवादी पार्टी ने समर्थन दिया
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 1970 में इंदिरा जी ने संजीव रेड्डी के खिलाफ अपना प्रत्याशी उतारा और उस समय आधार तलाश रही माओवादी पार्टी ने इंदिरा गांधी को समर्थन दिया। इंदिरा गांधी ने उस समर्थन को स्वीकार कर लिया। इसके बाद वे माओवादी विचारधारा के प्रभाव में रहीं और माओवाद धीरे-धीरे देश में फैल गया। विशेषज्ञों का कहना
मोदी सरकार ने किया विकास
गृहमंत्री में जोर देकर कहा कि मोदी सरकार में बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम के माध्यम से वहां की संस्कृति और खेल को बढ़ावा दिया जा रहा है। लगभग 1,20,000 कलाकारों ने बस्तर पंडुम में भाग लिया है और करीब 5,50,000 वनवासियों ने खेलों में हिस्सा लिया है। मैं विपक्ष के उन सभी लोगों से निवेदन करता हूं, जो इसे अन्याय की लड़ाई बताते हैं, कि वे एक बार बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक में जरूर जाएं और वास्तविक स्थिति को देखें। जिन्हें नक्सली हिंसा में कोई न्याय दिखाई देता है, उनसे मेरा करबद्ध निवेदन है कि एक बार उन कैंपों में जाकर दो रात बिताकर देखें – तब समझ आएगा कि इन बच्चों के साथ क्या हुआ है।यहां बैठकर फैशनेबल तरीके से यह कहना कि “इनसे बात करो, इनकी सुनो” बहुत आसान है। लेकिन हजारों बच्चों का जो जीवन बर्बाद हुआ है, उसका जवाब किसके पास है
नक्सलियों के पोलित ब्यूरो का ढांचा ध्वस्त
अमित शाह ने बताया कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की स्टेट कमेटियों के सदस्य सरेंडर कर चुके हैं। ओडिशा में जो चार बचे थे, उनमें से एक ने सरेंडर किया और तीन मारे गए। तेलंगाना में छह ने सरेंडर किया, तीन मारे गए – अब वहां एक भी नहीं बचा है। इस प्रकार उनकी पोलित ब्यूरो और सेंट्रल स्ट्रक्चर लगभग समाप्त हो चुका है। हमारा लक्ष्य 31 मार्च तक नक्सल-मुक्त भारत का था। पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद देश को सूचित किया जाएगा, मगर मैं ऐसा बोल सकता हूं कि हम नक्सल मुक्त हो गए हैं।
वर्ष 2014 के बाद हालात बदले
गृहमंत्री ने कहा कि सीएपीएफ और पुलिस पहले भी थे, लेकिन 2014 के बाद क्या बदला? 2014 के बाद एक स्पष्ट नीति और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति इस काम से जुड़ी। मोदी जी ने स्पष्ट कर दिया कि चाहे जम्मू-कश्मीर हो, नॉर्थ ईस्ट हो या वामपंथी उग्रवाद का विस्तार, कोई भी गैरकानूनी गतिविधि नहीं चलेगी और इस पर कड़ाई से प्रहार किया जाएगा।
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