लोकसभा में सोमवार को नक्सलवाद पर चर्चा हुई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भारत को नक्सलवाद (वामपंथ उग्रवाद ) से मुक्त कराने के प्रयासों पर चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की सबसे बड़ी सिद्धि नक्सल-मुक्त भारत है; यह कोई भी रिसर्चर स्वीकार करेगा। उन्होंने कहा कि इसका पूरा श्रेय सीएपीएफ के जवानों, विशेष कर कोबरा और सीआरपीएफ के बहादुर जवानों, सुरक्षा एजेंसियों, छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी के जवानों और वनवासी (आदिवासी) बाशिंदों को जाता है।
बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है। नक्सलवाद के जो लोग यहाँ वकालत कर रहे थे, उनसे पूछना चाहता हूँ कि मोदी सरकार में वहाँ के लोगों को जो सुविधाएँ मिलीं, वे 1970 से अब तक क्यों नहीं मिलीं? बस्तर में विकास इसलिए रुक गया था क्योंकि वहाँ लाल आतंक की परछाई थी। विकास नहीं होने के कारण वह परछाई नहीं आई, उस परछाई के कारण विकास नहीं हुआ। अब यह परछाई हट रही है और बस्तर विकसित हो रहा है। यह मोदी सरकार है – जो हथियार उठाएगा, उसका हिसाब होगा।
नक्सलवाद के लिए जिम्मेदार कौन?
अमित शाह ने लाल आतंक के खात्मे पर चर्चा में कहा कि 12 राज्यों को रेड कॉरिडोर बना दिया गया था और वहां कानून का शासन समाप्त कर दिया गया। 12 करोड़ लोग गरीबी के अंदर सालों तक जीते रहे। दोनों तरफ़ से 20 हजार युवा मारे गए, कई दिव्यांग बन गए, आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
नक्सलवाद के खात्मे के लिए कांग्रेस ने कुछ नहीं किया
उन्होंने यहा भी कहा कि तत्कालीन यूपीए सरकार में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने देश के सामने स्वीकार किया था कि कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट से भी बड़ी चुनौती देश के सामने नक्सलवाद है, लेकिन कांग्रेस ने कुछ नहीं किया। मोदी सरकार की सबसे बड़ी सिद्धि नक्सल-मुक्त भारत है। उन्होंने इसका श्रेय देश के जांबाजों और जनता को दिया।
















