31 मार्च की समयसीमा से पहले 96 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण; ओडिशा में अब केवल 15 सक्रिय: मुख्यमंत्री मोहन माझी
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होम भारत ओडिशा

31 मार्च की समयसीमा से पहले 96 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण; ओडिशा में अब केवल 15 सक्रिय: मुख्यमंत्री मोहन माझी

ओडिशा माओवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के करीब पहुंच चुका है। राज्य में अब केवल 15 सक्रिय माओवादी बचे हैं, यह जानकारी मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विधानसभा में दी।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Mar 24, 2026, 05:12 pm IST
in ओडिशा

ओडिशा माओवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के करीब पहुंच चुका है। राज्य में अब केवल 15 सक्रिय माओवादी बचे हैं, यह जानकारी मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विधानसभा में दी। उन्होंने बताया कि यह बड़ी गिरावट लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों और प्रभावी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का परिणाम है।

सीमित क्षेत्रों तक सिमटा माओवादी प्रभाव
मुख्यमंत्री ने विधानसभा को बताया कि शेष माओवादी मुख्य रूप से कंधमाल, कलाहांडी व राय़गडा जिले के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के अन्य किसी हिस्से से माओवादी गतिविधि की कोई सूचना नहीं है। हालांकि, कंधमाल जिला अभी भी केंद्र की सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत माओवादी प्रभावित क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत है। इसका कारण यहां के घने जंगल और अंतर-जिला सीमाओं के पास स्थित होना है, जो माओवादियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।

एक महीने में तेज गिरावट
राज्य में माओवादियों की संख्या में बहुत कम समय में बड़ी गिरावट देखी गई है। विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, सक्रिय माओवादियों की संख्या एक महीने में 40 से घटकर 15 रह गई है। पहले ये अलग-अलग समूहों में बंटकर बौध, बलांगीर और बरगढ़ सहित कई जिलों में सक्रिय थे। कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बाहिनीपति के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य 31 मार्च तक माओवाद मुक्त होने के केंद्र के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


96 माओवादियों का आत्मसमर्पण
इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण आत्मसमर्पण की बढ़ती संख्या है। वर्ष 2024 से लेकर 15 मार्च 2026 तक कुल 96 माओवादी और मिलिशिया सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके हैं। राज्य सरकार का कहना है कि यह सफलता उसकी व्यापक आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का परिणाम है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को आर्थिक सहायता, आवास, मासिक भत्ता और 36 महीनों तक व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा विवाह सहायता, स्वास्थ्य सुविधाएं और राशन कार्ड जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि उनका समाज में स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।

सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती
राज्य में माओवाद के पूरी तरह उन्मूलन और पुनरुत्थान रोकने के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। बीजद विधायक ध्रुब चरण साहू के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 28 कंपनियां, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 12 कंपनियां और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की 38 टीमें तैनात हैं। इसके अलावा जिला स्वैच्छिक बल (DVF) के 487 जवान, इंडिया रिजर्व बटालियन की 37 प्लाटून, स्पेशल सिक्योरिटी बटालियन की 29 प्लाटून और ओडिशा स्पेशल स्ट्राइकिंग फोर्स की 58 प्लाटून भी सक्रिय हैं। ये सभी बल मिलकर माओवादियों पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं। इन अभियानों पर राज्य सरकार ने भारी खर्च भी किया है। 1 अप्रैल 2024 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती पर 298.67 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के लिए अतिरिक्त 21.44 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

31 मार्च से पहले अंतिम अभियान
31 मार्च 2026 की समयसीमा नजदीक आते ही राज्य में माओवाद के पूरी तरह खात्मे के लिए अंतिम अभियान तेज कर दिया गया है। विशेष रूप से कंधमाल, रायगड़ा और कालाहांडी के त्रि-जंक्शन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, जहां शेष माओवादी सक्रिय बताए जा रहे हैं।
ओडिशा के पुलिस महानिदेशक वाई बी खुरानिया ने बताया कि हाल के अभियानों में महत्वपूर्ण सफलता मिली है, जिसमें अवैध हथियारों और निर्माण उपकरणों से भरे माओवादी ठिकानों का पता लगाया गया है।
उन्होंने कहा, “हमारे अभियान जारी हैं और हमें पूरा विश्वास है कि 31 मार्च तक हम लक्ष्य हासिल कर लेंगे। माओवादियों की मौजूदगी अब बहुत छोटे क्षेत्र तक सीमित रह गई है और हम सभी सीमावर्ती इलाकों में कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं।”

सीमा क्षेत्रों में बढ़ाई गई सतर्कता
डीजीपी ने यह भी बताया कि ओडिशा की सीमाएं छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों से लगती हैं, जहां भी माओवाद विरोधी अभियान चल रहे हैं। ऐसे में माओवादियों के एक राज्य से दूसरे राज्य में आने-जाने की संभावना बनी रहती है। इसको देखते हुए सुंदरगढ़, क्योंझर और राउरकेला जैसे सीमावर्ती जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

आत्मसमर्पण नहीं तो कार्रवाई
कंधमाल पुलिस ने कार्रवाई को तेज करते हुए 11 माओवादियों की पहचान करते हुए पोस्टर जारी किए हैं। इनमें जोनल कमेटी सदस्य शुकुरु और डिविजनल कमेटी सदस्य शीला सहित रंजिता, मोंटू, संतोष, संध्या और सुषमा जैसे नाम शामिल हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि आत्मसमर्पण ही एकमात्र विकल्प है। जो माओवादी आत्मसमर्पण करेंगे, उन्हें घोषित इनाम राशि के साथ पुनर्वास योजनाओं का लाभ मिलेगा। वहीं, आत्मसमर्पण नहीं करने पर सुरक्षा अभियानों के दौरान सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

कंधमाल बना मुख्य केंद्र
समयसीमा से कुछ दिन पहले कंधमाल जिला राज्य की रणनीति का केंद्र बन गया है। 19 मार्च से यहां 60 से 70 टीमों को तैनात किया गया है, जिनमें SOG, CRPF और जिला पुलिस शामिल हैं। इन बलों ने पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान तेज कर दिया है। स्थिति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। हाल ही में बरामद हथियारों और उपकरणों से संकेत मिलता है कि माओवादी सीमित क्षेत्र में सिमट गए हैं और उन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

मुख्यधारा में लौटने की अपील
इन अभियानों के बीच कंधमाल के पुलिस अधीक्षक हरीश बिशी ने शेष माओवादियों से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार उन सभी को सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपनाना चाहते हैं।

माओवाद मुक्त ओडिशा की ओर
लगातार सुरक्षा अभियानों, प्रभावी पुनर्वास नीतियों और घटती माओवादी संख्या के साथ ओडिशा अब माओवाद मुक्त राज्य बनने की दहलीज पर खड़ा है। अधिकारियों को भरोसा है कि अंतिम चरण के प्रयासों से जल्द ही राज्य पूरी तरह माओवाद मुक्त हो जाएगा और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होगी।

Topics: Odishachief minister mohan majhiMaoism in OdishaMaoists surrender
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