गाजियाबाद में पकड़े गए जासूसी नेटवर्क के मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जांच में सामने आया है कि यह कोई छोटा या स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क था, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहा था।
इस नेटवर्क में कुछ लोग मिलकर देश के महत्वपूर्ण और भीड़भाड़ वाले स्थानों की जानकारी जुटाते थे। ये लोग मंदिरों, रेलवे स्टेशन और सुरक्षाबलों के ठिकानों की फोटो और वीडियो बनाकर अपने हैंडलर तक भेजते थे। बताया जा रहा है कि ये जानकारी पाकिस्तान में बैठे लोगों तक पहुंचाई जाती थी। इस मामले में नौशाद अली नाम का एक व्यक्ति मुख्य भूमिका में बताया जा रहा है। वह अपने साथियों से जानकारी इकट्ठा करवाता था और एक खास मोबाइल ऐप के जरिए आगे भेजता था। उसे झारखंड के देवघर मंदिर की वीडियो और लोकेशन भेजने का काम भी दिया गया था, जिससे पता चलता है कि धार्मिक स्थल भी उनके निशाने पर थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में शामिल लोग सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे से जुड़े थे। नौशाद की पहचान मीरा नाम की एक महिला से भी सोशल मीडिया पर ही हुई थी। मीरा पहले से इस नेटवर्क का हिस्सा थी और उसके फोन से कई जगहों की फोटो और वीडियो मिले हैं। उस पर अवैध हथियारों से जुड़े होने का भी शक है। इस नेटवर्क में सुहेल मलिक और समीर नाम के लोग भी शामिल थे। ये सभी अलग-अलग जगहों से जानकारी जुटाकर अपने हैंडलर तक पहुंचाते थे। कहा जा रहा है कि उन्हें बाहर से ट्रेनिंग और निर्देश मिलते थे, जिससे यह नेटवर्क और खतरनाक बन जाता है। अब जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि इन्हें पैसा कहां से मिलता था। शुरुआती जांच में हवाला के जरिए पैसे आने की बात सामने आई है। पुलिस अब इन पैसों के लेन-देन की जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके और इसके पीछे के बड़े लोगों तक पहुंचा जा सके।

















