गत 15 मार्च को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एन.एस.डी.) में काकोरी प्रतिरोध शताब्दी वर्ष के अवसर पर ऐतिहासिक नाटक ‘काकोरी क्रांति गाथा’ का भव्य और प्रभावशाली मंचन हुआ। यह नाट्य प्रस्तुति केवल काकोरी की घटना तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध प्रारंभिक प्रतिरोध की व्यापक परंपरा को भी दर्शाया गया है।
‘काकोरी क्रांति गाथा’ केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के उस क्रांतिकारी अध्याय को पुनः राष्ट्रीय चेतना में स्थापित करने का एक सशक्त प्रयास है। मंचन में तिलका मांझी, रामजी गोंड, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जैसे अन्य ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के संघर्ष और योगदान की झलक भी प्रस्तुत की गई।
बता दें कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 9 अगस्त, 1925 को घटित काकोरी प्रतिरोध एक ऐतिहासिक घटना थी, जब भारतीय क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार के खजाने से भरी ट्रेन को काकोरी के निकट रोककर उसे अपने कब्जे में लिया। इस साहसिक कार्रवाई में पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, मन्मथनाथ गुप्त जैसे क्रांतिकारियों ने भाग लिया था।
नाटक का आलेख सभ्यता अध्ययन केंद्र के निदेशक रवि शंकर ने गहन ऐतिहासिक अध्ययन के आधार पर लिखा है, जबकि इसका निर्देशन प्रियंका शर्मा ने किया है। कलाकारों के ओजपूर्ण संवाद, क्रांतिकारी गीतों और प्रभावी मंच सज्जा ने दर्शकों को पूरे समय बांधे रखा। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों से बड़ी संख्या में बौद्धिक वर्ग, नीति-निर्माता, शिक्षाविद्, सांस्कृतिकर्मी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में गुजरात के पूर्व मंत्री नरेश रावल, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य वागीश पाठक, आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह शामिल थे। कार्यक्रम का आयोजन साहित्य कला परिषद (दिल्ली सरकार) एवं सभ्यता अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस नाट्य प्रस्तुति का निर्माण ‘सिल्ली सोल्स फाउंडेशन’ द्वारा किया गया है।

















