ईरान में चल रहे युद्ध के बीच अब एक दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले होने शुरू हो गए हैं। इसी क्रम में इजरायल ने ईरान के पार्स गैस फील्ड में हमले कर दिए, जिसके बाद ईरान ने भी कतर, सऊदी समेत कई देशों के तेल ठिकानों पर हमले कर दिया। इसके बाद तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 10 प्रतिशत बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। वहीं गैस की कीमतों में भी उछाल आया है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
गौरतलब है कि मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ गए हैं। इज़रायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड है। इसके जवाब में ईरान ने कतर के रास लफ्फान गैस फील्ड पर अटैक किया। रास लफ्फान से कतर एनर्जी की 17% एलएनजी निर्यात होती है। अब इसकी मरम्मत में 3 से 5 साल लग सकते हैं। इसके अलावा अबू धाबी के हबशान गैस फैसिलिटी और बब ऑयल फील्ड पर भी ईरान के हमले से काम बंद हो गया। ये सब तब हो रहा है जब अमेरिका और इज़रायल की तरफ से ईरान के साथ जंग फरवरी 2025 के आखिर से चल रही है, और अब एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर डायरेक्ट अटैक हो रहे हैं। इससे सप्लाई में दिक्कत का डर बढ़ गया है।
तेल की कीमतों में क्या हुआ?
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत एक समय 10% बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, फिर थोड़ी गिरकर 110 डॉलर पर बंद हुई कुल मिलाकर 3.3% की बढ़ोतरी। फरवरी 28, 2026 से अब तक क्रूड की कीमत में 60% का उछाल आ चुका है।
गैस की कीमतें
यूरोप में डच होलसेल गैस प्राइस 24% बढ़कर 68 यूरो प्रति मेगावाट आवर हो गई, जो दिसंबर 2022 के बाद सबसे ऊंची है। जंग शुरू होने से पहले की तुलना में अब कीमत दोगुनी से ज्यादा हो गई है। यूके में गैस की महीने भर की होलसेल कीमत 23% बढ़कर 172 पेंस प्रति थर्म पहुंच गई, जो अगस्त 2022 के बाद सबसे ज्यादा है। लेकिन ये मार्च 2022 के 800 पेंस के पीक से अभी भी कम है।
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क्या कहते हैं बाजार विशेषज्ञ
खाड़ी में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक शेयर मार्केट में जबर्दस्त गिरावट आई है। जापान का निक्केई 3.4% गिरा, साउथ कोरिया का कोस्पी 2.7%, हांगकांग का हैंग सेंग 2%, यूके का FTSE 100 2.35% गिरकर 10,063 पर बंद हुआ, जर्मनी का डैक्स 2.3% और फ्रांस का CAC 2.2% नीचे आया। वॉल स्ट्रीट भी कम खुला।
तेल की कीमतों में हो रहे इस बदलाव को लेकर वेल्थ क्लब की चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट सुसानाह स्ट्रीटर कहती हैं कि ईरान जंग में ऊर्जा ठिकानों पर बढ़ने के बाद से एनर्जी शॉक का डर फिर से जीवित हो गया है। दोनों तरफ से हमले बढ़ रहे हैं, लंबी जंग की आशंका है। 150 डॉलर प्रति बैरल तक तेल जाने की बातें फिर से शुरू हो गई हैं। इज़रायल के साउथ पार्स पर हमले के बाद कतर पर हमला हुआ। यूरोप कतर के एलएनजी पर बहुत निर्भर है क्योंकि रूस से दूर हो रहा है। ये जंग सिर्फ इलाके की इकोनॉमी को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में ऊंची एनर्जी कीमतों से नुकसान पहुंचा रही है।
आरएसएम यूके के चीफ इकोनॉमिस्ट थॉमस पुग ने कहा कि ऊंची एनर्जी कीमतें महंगाई को फिर से बढ़ा सकती हैं। अगर गर्मियों तक कीमतें ऊंची रहीं तो महंगाई 5% तक पहुंच सकती है, और बैंक ऑफ इंग्लैंड को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। मनी मार्केट अब जुलाई तक 0.25% बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।
लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के एडिटर-इन-चीफ रिचर्ड मीड ने कहा कि इज़राइल का ऑपरेशनल गैस फील्ड पर पहला कन्फर्म्ड अटैक बड़ा बदलाव है। अब पूरा मिडिल ईस्ट गल्फ का एनर्जी और लॉजिस्टिक्स सिस्टम – एक्सपोर्ट टर्मिनल, ऑफशोर इंफ्रा, पोर्ट – खतरे में है। जहाजों के लिए भी सुरक्षित नहीं रहा।

















