भारत के पड़ोसी जिन्ना के कट्टर इस्लामी और आतंकवाद के प्रायोजक देश की ईरान युद्ध के चलते आर्थिक कमर टूट चुकी है। पहले से कंगाल पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली इस हद तक बढ़ गई है कि अब उसकी फौज के अगुआ ने गणतंत्र दिवस तक मनाने और परेड निकालने से मना कर दिया है। मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने पाकिस्तान को ऐसी मार मारी है कि वह घुटनों पर आ गया है। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया, जिसके चलते सेना प्रमुख असीम मुनीर को देश को अपने सबसे गौरव के उत्सव को स्थगित करना पड़ा है। गणतंत्र दिवस पर 23 मार्च को तय परेड अब रद्द कर दी गई है।
तेल ने निकाला जिन्ना के देश का तेल
मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका-इस्राएल युद्ध ने होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई बाधित कर दी है। इससे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, और इससे पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देश सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। पाकिस्तान का मासिक ईंधन आयात बिल 1.7 अरब डॉलर से बढ़कर 3.5-4.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ बन रहा है।
महंगाई का विस्फोटक रूप
जिन्ना के देश की दिसंबर 2025 तक मुद्रास्फीति दर 5.6% थी, लेकिन अब 2026 की शुरुआत में ही तेल संकट फिर से भड़क गया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसका असर हर वस्तु पर पड़ा है—सब्जियां, दालें, कपड़े सब महंगे हो गए हैं। रमजान और ईद के मौके पर यह महंगाई पाकिस्तानी अवाम के होश उड़ाए हुए है, क्योंकि परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य वस्तुओं के दाम 20-30 प्रतिशत
चढ़ चुके हैं।

लगा दीं पाबंदियां
तेल संकट से निपटने के लिए पाकिस्तानी सरकार ने कड़े उपाय अपनाए हुए हैं। सबसे बड़ा फैसला गणतंत्र दिवस परेड और संबंधित समारोह को रद्द करने का है, जिसे प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के कार्यालय ने जनरल मुनीर के फरमान के बाद “तेल संकट और कम खर्च नीति” का हवाला देकर लिया है। स्कूल-कॉलेज काफी हद तक बंद कर दिए गए हैं, सरकारी गाड़ियों का ईंधन आवंटन रोका गया है और मंत्रियों-सांसदों की पगार में कटौती का फरमान जारी हुआ है। एलएनजी की कमी से बिजली कटौती बढ़ गई, जिससे उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने चेतावनी दी है कि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो मासिक तेल बिल 600 मिलियन डॉलर अतिरिक्त तक बढ़ सकता है।
आर्थिक नुकसान का आकलन
आईएमएफ के 7 अरब डॉलर बेलआउट पैकेज के बावजूद 2026 में पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ कम रहने की आशंका है। निक्केई एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक अस्थिरता, विद्रोही गुटों के हमले और जलवायु आपदाओं के साथ तेल संकट ने अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में धकेल दिया है। मध्य पूर्व में तनाव से अगले साल 12-14 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है, जिसमें पेट्रोलियम आयात 25-30 प्रतिशत महंगा हो गया। डॉलर की कमी से 125 विदेशी कंपनियां जिन्ना के देश को छोड़ने को तैयार हैं।
जनजीवन पर प्रभाव
बेशक, इन दिनों आम पाकिस्तानी की जिंदगी नर्क बनी हुई है। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने परिवहन महंगा कर दिया है, जिससे बाजारों में सब्जियों-फलों के दाम आसमान छू रहे हैं। रमजान में रोजे रखने वाली अवाम को दालें-चावल तक लेने भारी पड़ रहे हैं। बिजली-पानी की कटौती से घरेलू जीवन ठप हो गया है। लॉकडाउन जैसे हालात में अफरातफरी जैसे हाल हैं।
सेना का फरमान
सेना प्रमुख सीम मुनीर का गणतंत्र दिवस न मनाने का फरमान ‘बचत’ की जरूरत की तरफ इशारा तो करता है, लेकिन यह सरकार की लाचारी भी दिखाता है। पहले से कर्ज के जाल में फंसा पाकिस्तान अब युद्ध की भेंट चढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस सुधारों के 2027 तक डिफॉल्ट का खतरा मंडराता रहेगा। कुल मिलाकर, यह संकट पाकिस्तान को फेल्ड स्टेट’ के तमगे की ओर ले जा रहा है।
पाकिस्तान में तेल की कीमतों में भारी उछाल ने स्कूलों और सरकारी सेवाओं पर गहरा असर डाला है। मध्य पूर्व युद्ध से उत्पन्न ईंधन संकट के चलते सरकार ने ‘कड़े बचत उपाय’ लागू किए हैं, जिससे शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं को सीधा नुकसान हुआ है।
स्कूलों पर प्रभाव
सरकार ने सभी स्कूलों को दो हफ्तों के लिए बंद कर दिया है, यह बंदी 16 मार्च 2026 से शुरू हुई थी। प्रधानमंत्री शरीफ ने ईंधन बचत के लिए यह फैसला लिया, क्योंकि छात्रों-शिक्षकों के आने-जाने से परिवहन लागत बढ़ रही थी। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को तुरंत ऑनलाइन कक्षाओं पर शिफ्ट करने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमी से पढ़ाई ठप हो गई है।

सरकारी सेवाओं में बदलाव
सरकारी दफ्तरों में काम का सप्ताह चार दिन तक सीमित कर दिया गया है, साथ ही ईंधन कोटे में 50 प्रतिशत कटौती की गई है। कर्मचारियों को वर्क-फ्रॉम-होम का निर्देश जारी हुआ है, जिससे फाइलें लटक गई हैं और सेवाओं में देरी बढ़ी है। मंत्रियों व सांसदों की सैलरी में 25-50 प्रतिशत कटौती हुई है, विदेश दौरे रोके गए हैं और सरकारी वाहनों का उपयोग न्यूनतम किया गया है।
कहना न होगा कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने जहां पूरी दुनिया में कोई न कोई असर डाला है, वहीं जिन्ना के देश को शायद इसने सबसे ज्यादा प्रभावित कया है। भ्रष्ट सरकार, प्रशासन, फौज ने देश को चरमराई हालत में ला छोड़ा है। अवाम को नेतृत्व से कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

















