अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर हमले कर रहा है, लेकिन फिर भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल नहीं पा रहे हैं। ऐसे में अब ट्रंप प्रशासन मध्य पूर्व में अपने अभियान को मजबूत करने के लिए हजारों अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने पर विचार कर रहा है। यह बात एक अमेरिकी अधिकारी और तीन सूत्रों ने बताई, जो सैन्य योजना से वाकिफ हैं। ईरान के साथ यह जंग अब तीसरे हफ्ते में दाखिल हो चुकी है।
ये चर्चाएं अगले हफ्ते मध्य पूर्व पहुंच रहे जल-थल सेना वहां भेजने की तैयारी की है। इस समूह में 2,000 से ज्यादा मरीन्स वाली एक मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट शामिल है। अमेरिकी सेना को एक बड़ा झटका भी लगा है—USS जेराल्ड आर फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर में आग लगने के बाद उसे ग्रीस में रखरखाव के लिए भेज दिया गया है, जिससे क्षेत्र में उपलब्ध ताकत कम हो गई है। अमेरिका अब तक 28 फरवरी से शुरू हुए इस अभियान में 7,800 से ज्यादा हमले कर चुका है। इनमें ईरान की नेवी के 120 से अधिक जहाज क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके हैं। अमेरिकी सेना ईरान की नेवी, बैलिस्टिक मिसाइलों के स्टॉक, ड्रोन और डिफेंस इंडस्ट्री पर लगातार हमले कर रही है।
अभी तक के नुकसान
इस जंग में 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और करीब 200 घायल हुए हैं। ज्यादातर घाव हल्के हैं। मध्य पूर्व में कुल 50,000 अमेरिकी सैनिक पहले से तैनात हैं, जो यूएस सेंट्रल कमांड के अधीन काम कर रहे हैं।
होर्मुज और खार्ग द्वीप पर चर्चा
इसके अलावा प्रशासन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों के सुरक्षित गुजरने को सुनिश्चित करने के विकल्प तलाश रहा है। इसमें मुख्य रूप से हवाई और नौसेना ताकत का इस्तेमाल होगा, लेकिन कुछ मामलों में ईरान के किनारे पर ग्राउंड फोर्स भी लगाने की बात चल रही है। दूसरा बड़ा विकल्प खार्ग द्वीप है, जहां से ईरान के 90 प्रतिशत तेल निर्यात होते हैं। 13 मार्च को वहां हमले हो चुके हैं। ट्रंप ने पहले ही महत्वपूर्ण तेल सुविधाओं पर हमले की धमकी दे रखी है। सूत्रों के मुताबिक, खार्ग पर ग्राउंड फोर्स भेजना बहुत जोखिम भरा माना जा रहा है क्योंकि ईरान के पास मिसाइल और ड्रोन की अच्छी क्षमता है।
इसके अलावा ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को सुरक्षित करने के लिए फोर्स भेजने की भी चर्चा हुई है। यह काम विशेष अभियानों के लिए भी बेहद जटिल और खतरनाक बताया गया है। फिलहाल ईरान में कहीं भी ग्राउंड फोर्स भेजने का कोई तत्काल फैसला नहीं लिया गया है।
अमेरिकी लक्ष्य
अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य स्पष्ट है। वो ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और उसकी नेवी को पूरी तरह से खत्म करना चाहता है। साथ ही अमेरिका की कोशिश ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की है।
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा, “फिलहाल ग्राउंड ट्रूप्स भेजने का कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप सभी विकल्प खुले रखे हुए हैं। वे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के सभी तय लक्ष्यों को हासिल करने पर फोकस हैं।”
















