AI : भविष्य की दिशा तय करेगा भारत
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होम भारत

AI : भविष्य की दिशा तय करेगा भारत

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब केवल तकनीकी विकास का विषय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का नया आधार बन चुकी है। अमेरिका और चीन के बीच चल रही एआई प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अपनी अलग राह-समावेशी नवाचार और डिजिटल लोकतंत्रीकरण-के साथ उभरने की कोशिश कर रहा है।

Written byराहुल महाजनराहुल महाजन
Mar 1, 2026, 08:46 am IST
inभारत, विज्ञान और तकनीक

नई दिल्ली में 16 से 21 फरवरी तक आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट केवल एक तकनीकी सम्मेलन नहीं था। इसका समापन “नई दिल्ली घोषणा” के साथ हुआ, जिसे 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का समर्थन मिला। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की वैश्विक बहस में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में एआई की प्रतिस्पर्धा मुख्यतः अमेरिका और चीन के बीच केंद्रित है। अमेरिका के पास गहरा शोध आधार, पूंजी और तकनीकी कंपनियों का सशक्त नेटवर्क है। चीन ने राज्य-समर्थित औद्योगिक रणनीति और बड़े पैमाने पर तैनाती के माध्यम से अपनी स्थिति मजबूत की है। ऐसे में भारत की स्थिति इन दोनों से भिन्न है-उसकी ताकत व्यापक डिजिटल प्रसार और मानव संसाधनों में निहित है।

भारत में बैंकिंग, स्वास्थ्य, कृषि और सरकारी सेवाओं में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ा है। परंतु वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए केवल उपयोग पर्याप्त नहीं; उन्नत अनुसंधान, स्वदेशी मॉडल विकास और संगणन क्षमता का विस्तार अनिवार्य है। समिट में गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई ने कहा, “कोई तकनीक मुझे एआई से बड़ा सपना नहीं दिखाती।” उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और विज्ञान में एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर बल देते हुए यह भी संकेत दिया कि भारत जैसे देशों के साथ सहयोग भविष्य की दिशा तय करेगा। यह टिप्पणी भारत को एक संभावित नवाचार भागीदार के रूप में रेखांकित करती है।

नई दिल्ली घोषणा ने समान पहुंच, सुरक्षित और भरोसेमंद एआई, आर्थिक विकास, सामाजिक सशक्तिकरण और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों जैसे सिद्धांतों पर बल दिया। “डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन ऑफ एआई” चार्टर और “ग्लोबल एआई इम्पैक्ट कॉमन्स” जैसी पहलों ने भारत की उस सोच को सामने रखा, जिसमें एआई को समावेशी विकास के उपकरण के रूप में देखा गया है।

चिप से कंप्यूटिंग तक

नीतिगत स्तर पर भी पिछले दशक में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। 2021 में आरंभ सेमीकंडक्टर मिशन के तहत लगभग 76,000 करोड़ का प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया गया। गुजरात के धोलेरा में टाटा समूह की फैब परियोजना, असम के मोरीगांव में असेंबली और टेस्टिंग इकाई, साणंद में माइक्रोन की पैकेजिंग सुविधा तथा सीजी पावर और जापान की रेनेसास के साथ संयुक्त उपक्रम-ये सभी परियोजनाएं भारत को वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में प्रयास हैं। इसी क्रम में संगणन अवसंरचना का विस्तार किया गया है। इंडिया एआई मिशन के तहत लगभग 10,000 उच्च-क्षमता वाले जीपीयू उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है, ताकि आईआईटी, आईआईएससी और स्टार्टअप देश में ही बड़े एआई मॉडल विकसित कर सकें। लगभग 10,371 करोड़ के प्रावधान के साथ एक साझा राष्ट्रीय एआई कंप्यूटिंग मंच विकसित किया जा रहा है। साथ ही, डेटा सेंटर क्षमता को 2026 तक 1700 मेगावाट से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है।

वैश्विक एआई सहयोग के सात प्रमुख स्तंभ

  •  एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण
  • आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई
  • सुरक्षित और भरोसेमंद एआई
  •  विज्ञान के लिए एआई
  •  सामाजिक सशक्तिकरण के लिए पहुंच
  •  मानव पूंजी विकास
  •  लचीला, कुशल और नूतन एआई प्रणाली

‘ देश के लिए परिवर्तनकारी एआई ’

धर्म प्रकाश वाजपेयी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भारत के लिए सबसे परिवर्तनकारी तकनीक साबित होने वाली है। हम एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं, जो हमारे भविष्य को आकार देगा। ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ ने वैश्विक मंच पर भारत के उदय का शंखनाद किया है। यह एआई क्रांति 19वीं सदी की औद्योगिक क्रांति और 20वीं सदी की आईटी क्रांति के समान है।

अमेरिका और चीन ने पहले ही अपने ‘सॉवरेन एआई स्टैक’ विकसित कर लिए हैं। ऐसे में भारत, फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों के लिए अपनी तकनीकी संप्रभुता सुरक्षित करना अनिवार्य हो गया है। एआई के ‘गॉडफादर’ कहे जाने वाले नोबेल विजेता प्रो. जेफ्री हिंटन के अनुसार, ये ऐसी प्रणालियाँ हैं जो डेटा से जटिल पैटर्न सीखती हैं।

अब तक एआई अनुसंधान पर टोरंटो विश्वविद्यालय, स्टैनफोर्ड और एमआईटी जैसे कुछ संस्थानों का दबदबा था, लेकिन अब भारत इस अग्रिम पंक्ति में अपनी जगह बना रहा है। अंततः यह शिखर सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व मंच पर भारत के ‘टेक सुपरपावर’ के रूप में उभरने की घोषणा है।
(लेखक‘डायस टेक्नोलॉजीज इंडिया’ के संस्थापक और अध्यक्ष हैं)

नीति और वैश्विक विश्वास

हाल के वर्षों में भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुसंधान और अवसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। देश ने मानस-1 नामक एक उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसे 60,000 घंटे से अधिक मस्तिष्क तरंग आंकड़ों पर प्रशिक्षित किया गया है और जिसका उद्देश्य तंत्रिका तथा मानसिक स्वास्थ्य विकारों की प्रारंभिक पहचान करना है।

इसी प्रकार, लखनऊ में स्थापित कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र के माध्यम से प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सार्वजनिक सेवाओं में एआई के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इंडिया एआई मिशन के तहत लगभग 38,000 ग्राफिक्स प्रसंस्करण इकाइयों (जीपीयू) को एकीकृत किया गया है। एआईकोष जैसे राष्ट्रीय आंकड़ा एवं मॉडल भंडार के माध्यम से भाषा, स्वास्थ्य, कृषि और शासन क्षेत्रों में अनुसंधान को समर्थन मिल रहा है।

ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने कहा, “यहां की ऊर्जा और एआई को पूरे तकनीकी ढांचे में अपनाने का उत्साह अद्भुत है।” एंथ्रॉपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोडेई के अनुसार, “भारत दुनिया के कुछ ही स्थानों में से एक है जहां 20–25% आर्थिक वृद्धि एआई के कारण संभव हो सकती है।” बजट 2026-27 में इंडिया एआई मिशन और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को आगे बढ़ाते हुए शोध, डिजाइन-आधारित प्रोत्साहन और आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण पर बल दिया गया है। माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ ने कहा, “भारत जैसे देश तकनीकी सहयोग और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करते हुए अपनी डिजिटल सार्वभौमिकता को भी सुरक्षित रख सकते हैं।” अंततः, एआई की वैश्विक प्रतिस्पर्धा केवल तकनीकी क्षमता की नहीं, बल्कि दृष्टिकोण और संस्थागत तैयारी की भी है। एआई इम्पैक्ट समिट ने यह दर्शाया है कि भारत अपनी भूमिका को व्यापक विकास, साझेदारी और रणनीतिक आत्मनिर्भरता के संदर्भ में परिभाषित कर रहा है।

 

Topics: तकनीकीएआईसेमीकंडक्टरमानसडिजिटल लोकतंत्रीकरणसॉवरेन एआई स्टैकजीपीयू (GPUएआईकोष
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