केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हाल ही में देश के टैक्सी क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत करते हुए भारत टैक्सी ऐप को लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य पूंजी बढ़ाना नहीं, बल्कि ड्राइवरों (सारथी भाइयों, दीदियों) का मुनाफा बढ़ाना है। बता दें कि इस एप के दस लाख से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं।
दिल्ली में सोमवार (23 फरवरी) को टैक्सी ड्राइवरों के साथ संवाद के दौरान अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों को हटाकर सीधे उन लोगों को लाभ पहुंचाना है जो दिन-रात सड़कों पर पसीना बहाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सहकारी मॉडल की कैब सेवा भारत टैक्सी अपने चालकों के लिए प्रति किलोमीटर न्यूनतम आधार किराया सुनिश्चित करेगी। सरकार का लक्ष्य दो वर्षों में 15 करोड़ ड्राइवरों को जोड़ना और तीन वर्षों के भीतर देश के सभी शहरों में सेवा का विस्तार करना है। फिलहाल यह सेवा दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के राजकोट में संचालित हो रही है।
500 रुपये का करना होगा निवेश?
इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने की प्रक्रिया के लिए ड्राइवरों को केवल 500 रुपये का निवेश करना होगा। ड्राइवरों को उनकी सेवाओं के लिए तत्काल और निश्चित किराया मिलता रहेगा और तीन साल के बाद कंपनी के मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा ड्राइवरों में बांटा जाएगा।
कैसे मिलेगा ड्राइवरों को मुनाफा?
केंद्रीय मंत्री अमित शाह के मुताबिक, अगर भारत टैक्सी 25 करोड़ रुपये कमाती है, तो इस 25 करोड़ का 20 फीसदी यानी 5 करोड़ रुपये भारत टैक्सी के खाते में पूंजी के रूप में जमा होगा और 80 फीसदी ड्राइवरों की टैक्सी ने कितने किलोमीटर चलाए, उसके आधार पर उनके खाते में वापस आएगा। इसका अर्थ है कि निश्चित किराया मिलने के साथ ही ड्राइवरों को मुनाफे में भी हिस्सा मिलेगा। इसके लिए उन्हें पहले तीन साल धैर्य रखना होगा।
महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम
भारत टैक्सी देश का पहला सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है। इसे आठ सहकारी संस्थाओं (राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, इफको, अमूल, कृभको, नेफेड, नाबार्ड, राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड व राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड) के सहयोग से तैयार किया गया है। भारत टैक्सी में महिला यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए ‘सारथी दीदी’ नाम की एक खास सुविधा भी शुरू की गई है। इसके तहत महिलाओं को अपनी यात्रा के लिए महिला ड्राइवरों द्वारा ही पिक-अप और ड्रॉप की सुविधा मिल सकती है। अब तक सैकड़ों महिला ड्राइवर भारत टैक्सी से जुड़ चुकी हैं।
आमतौर पर महिलाएं देर रात ऑफिस से घर आने या कहीं बाहर जाने के लिए पुरुषों के बजाय महिला ड्राइवरों के साथ ज्यादा सुरक्षित और सहज महसूस करती हैं। ऐसे में यह सुविधा महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे टैक्सी के अंदर होने वाले अपराधों में भी कमी आने की उम्मीद है। ऐप में एसओएस अलर्ट बटन, रीयल-टाइम राइड ट्रैकिंग और आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता जैसी सुविधाएं भी हैं। वहीं, भारत टैक्सी का किराया भी निजी कंपनियों की तुलना में बेहद कम है। वर्ष 2030 तक इस पहल के अंतर्गत 15 हजार महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
नागरिकों, पर्यटकों को मिलेगी सुरक्षित टैक्सी सेवा
यह सच है कि पिछले एक दशक में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं ने शहरी परिवहन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ ही सर्ज प्राइसिंग, मांग बढ़ने पर मनमाना किराया और ड्राइवरों के शोषण जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं। ऐसे में भारत टैक्सी प्लेटफॉर्म एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल है। इसके माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अब परिवहन जैसे आवश्यक क्षेत्र में केवल निजी कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय सहकारी और जनहितकारी मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे अनियमित और असंगठित टैक्सी सेवाओं पर निर्भरता कम होगी। नागरिकों और पर्यटकों को सुरक्षित और पारदर्शी टैक्सी सेवा मिल सकेगी।
अतिरिक्त शुल्क से यात्रियों, ड्राइवरों को राहत
ध्यान दें कि निजी कंपनियों की तरह भारत टैक्सी में किसी बाहरी निवेशक का मुनाफा नहीं होगा। निजी कंपनियां जैसे ओला और उबर आमतौर पर ड्राइवरों की कमाई से 20 से 30 फीसदी तक कमीशन वसूलती हैं। इसके उलट, भारत टैक्सी जीरो-कमीशन मॉडल पर काम करेगी। इसमें सर्ज-प्राइसिंग (पीक आवर्स में ज्यादा किराया) का सिस्टम नहीं होगा। यानी मांग बढ़ने पर यात्रियों से मनमाना किराया नहीं वसूला जाएगा। यात्री एक ही ऐप के जरिये कार, ऑटो रिक्शा और दोपहिया वाहन बुक कर सकेंगे। इसके अलावा टोल, पार्किंग और अन्य अतिरिक्त शुल्क से भी यात्रियों और ड्राइवरों को राहत मिलेगी।
भारत टैक्सी: भविष्य की आर्थिक सुरक्षा
यह मॉडल ड्राइवरों को स्थिर आय, सम्मानजनक काम और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा देता है। इससे ड्राइवरों का शोषण नहीं होगा। आधुनिक और भरोसेमंद टैक्सी सेवा मिलने से पर्यटकों के लिए भी भारत में घूमना-फिरना आसान होगा। उनसे कोई मनमाना किराया नहीं वसूल पाएगा। ऐप से आसान बुकिंग, पारदर्शी किराया व्यवस्था और तय सेवा मानकों से पर्यटकों का यात्रा अनुभव बेहतर होगा। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल
कुल मिलाकर भारत टैक्सी से न केवल शहरी परिवहन अधिक समावेशी, सुलभ बनेगा, बल्कि इससे डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे लक्ष्यों को भी बल मिलेगा। वहीं, बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से निजी कंपनियों को अपनी नीतियों में सुधार के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। देश में ड्राइवर और परिवहन क्षेत्र से जुड़े करोड़ों मेहनतकश साथी आज अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। ऐसे में जब मुनाफा देश के भीतर और ड्राइवरों तक सीधा पहुंचेगा, तो इसका सकारात्मक असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। अगर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह मॉडल देश के अन्य सेवा क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।















