भुवनेश्वर: ओडिशा के भावी विकास मार्ग पर व्यापक विमर्श के उद्देश्य से “विकास मंथन 1.0 : गवर्नेंस इन एक्शन” नामक दो दिवसीय राज्य स्तरीय नीति परामर्श 27 व 28 फरवरी से लोकसेवा भवन के कनवेंशन सेंटर में होगा। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासक, शिक्षाविद, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र होकर राज्य की विकास दिशा पर विचार-विमर्श करेंगे। पहल का उद्देश्य दीर्घकालिक नीति दृष्टि को संरचित संवाद और सहभागी शासन के माध्यम से व्यवहारिक कार्ययोजना में परिवर्तित करना है।
यह कार्यक्रम ओडिशा सेंटर फार इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसमें शासन सुधार, सामाजिक समावेशन, आर्थिक वृद्धि तथा संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा होगी, जो राज्य की दीर्घकालिक विकास दृष्टि से जुड़े हैं।

विज़न ओडिशा 2036 एवं 2047 : खाका से क्रियान्वयन तक
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘विज़न ओडिशा 2036 एवं 2047’ रूपरेखा समावेशी विकास, जलवायु लचीलापन, मानव विकास और आर्थिक परिवर्तन का व्यापक मार्ग प्रस्तुत करती है। यह दस्तावेज़ 20 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी किया गया था। राज्य को विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य में प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य इसमें रखा गया है ।
उद्घाटन सत्र
उद्घाटन सत्र में विकास आयुक्त-सह-अतिरिक्त मुख्य सचिव देवरंजन कुमार सिंह स्वागत भाषण देंगे। इसके बाद योजना एवं समन्वय विभाग राज्य की विज़न रूपरेखा पर वीडियो प्रस्तुति देगा।
मुख्य सचिव अनु गर्ग प्रारंभिक मुख्य वक्तव्य देंगी, जबकि ऑर्गेनाइज़ के संपादक प्रफुल्ल केतकर विशेष मुख्य संबोधन देंगे। सत्र में सहभागी नीति-निर्माण और जनभागीदारी के महत्व पर बल दिया जाएगा।
सात विषयगत सत्र
इस दो दिवसीय कार्यक्रम में राज्य की विकास प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सात विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रथम सत्र शैक्षणिक एवं ज्ञान सहयोग पर केंद्रित होगा, जिसमें विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और थिंक टैंकों की नीति क्रियान्वयन एवं निगरानी में भूमिका पर चर्चा होगी। द्वितीय सत्र अंत्योदय ओडिशा: समावेशी स्वास्थ्य व सामाजिक कल्याण पर आधारित रहेगा, जिसमें महिला नेतृत्वित विकास, स्वास्थ्य सुधार, पोषण सुरक्षा और वंचित समुदायों के उत्थान के उपायों पर विचार किया जाएगा। तृतीय सत्र सुजल-सुफल व सस्य-समला ओडिशा के अंतर्गत कृषि, मत्स्य, पशुपालन, जल प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे।
चतुर्थ सत्र समृद्ध ओडिशा – अवसंरचना, उद्योग व नवाचार पर केंद्रित होगा, जिसमें रोजगार सृजन, शहरीकरण, कनेक्टिविटी, स्टार्ट-अप प्रोत्साहन और सेवा क्षेत्र विस्तार जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। पंचम सत्र सुरक्षित ओडिशा – ऊर्जा, खनिज व आपदा लचीलापन में ऊर्जा परिवर्तन, जिम्मेदार खनन और आपदा प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने पर विचार होगा। षष्ठ सत्र सक्षम ओडिशा – शिक्षा, कौशल व युवा सशक्तिकरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, खेल और युवाओं के लिए वैश्विक अवसरों पर विमर्श होगा। सप्तम सत्र ओडिया अस्मिता – विरासत, पर्यटन व सुशासन पर केंद्रित रहेगा, जिसमें सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यटन संवर्धन और डिजिटल प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा की जाएगी।
कार्यक्रम का समापन मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के समक्ष खुली चर्चा और समापन संबोधन के साथ होगा। साथ ही आईसीएसएसआर पूर्व अध्यक्ष के प्रो. पी. कनगासबापति समापन विचार प्रस्तुत करेंगे। आयोजकों का मानना है कि यह पहल भविष्य में शासन परिणामों की नियमित समीक्षा का मंच बन सकती है। प्रशासनिक अनुभव, अकादमिक शोध और जमीनी सहभागिता को जोड़ते हुए “विकास मंथन 1.0” दीर्घकालिक नीति को ठोस परिवर्तन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकता है।

















