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संस्कृति पर साम्यवादी चोट

'दिल्ली क्वियर प्राइड' एक चेतावनी है कि अगर हम चुप रहे, तो फ्रैंकफर्ट स्कूल का सांस्कृतिक मार्क्सवाद हमारी सभ्यता का अंत कर देगा। हमें एकजुट होकर विकृत वामपंथी विचारों का विरोध करना चाहिए। भारत को अपनी जड़ों पर दृढ़ रहना होगा, जहां नैतिकता, परिवार और संस्कृति सर्वोपरि है

Written byडॉ. अभिषेक उपाध्यायडॉ. अभिषेक उपाध्याय
Feb 25, 2026, 08:41 am IST
inविश्लेषण
‘दिल्ली क्वियर प्राइड’ में शामिल युवा

‘दिल्ली क्वियर प्राइड’ में शामिल युवा

हाल ही में दिल्ली में ‘दिल्ली क्वियर प्राइड’ आयोजित हुआ। इससे एक बार फिर पता चला कि कैसे हमारे समाज की नींव को व्यवस्थित रूप से खोखला किया जा रहा है। आगे बढ़ने से पहले क्या है ‘क्वियर प्राइड’, इसे समझना होगा। यह एक ऐसा जुलूस है, जहां लोग अपनी यौन पहचान को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करते हैं, रंग-बिरंगे झंडों के साथ नाचते-गाते सड़कों पर उतरते हैं। लेकिन क्या यह वाकई स्वतंत्रता का उत्सव है? नहीं, यह सांस्कृतिक मार्क्सवाद का उपकरण है, जो हमारे युवाओं को भटकाने के लिए बनाया गया है। ‘दिल्ली क्वियर प्राइड’ ने न केवल अश्लीलता फैलाई, बल्कि हमारी युवा पीढ़ी के मन को भी प्रादूषित किया। इनका एक ही उद्देश्य है युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से काटना।

हालांकि इस आयोजन के समर्थक दावा करते हैं कि यह समानता और अधिकारों की लड़ाई है। लेकिन सचाई यह है कि यह फ्रैंकफर्ट स्कूल के कार्यक्रम का हिस्सा है, जो वामपंथी ताकतों द्वारा प्रायोजित है। विदेशी पैसे से चलने वाले एनजीओ, वामपंथी छात्र संगठनों और वामपंथी मीडिया घराने इसे बढ़ावा देते हैं, ताकि भारत की सनातन संस्कृति को कमजोर किया जा सके। ब्रिटिश शासन ने भी भारत की सनातन संस्कृति पर हमला किया था, और आज यह सांस्कृतिक मार्क्सवाद के रूप में जारी है।

यह आयोजन, जो समलैंगिकता और अन्य गैर-परंपरागत यौन प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता है, न केवल हमारी सनातन संस्कृति पर हमला है, बल्कि परिवार, नैतिकता और राष्ट्र की एकता को भी खतरे में डाल रहा है। यह ‘क्वियर प्राइड’ फ्रैंकफर्ट स्कूल के 11-सूत्री कार्यक्रम और सांस्कृतिक मार्क्सवाद का स्पष्ट प्रतिबिंब है, जो 20वीं शताब्दी में जर्मनी से निकला एक वैचारिक षड्यंत्र है। जब मार्क्सवाद की आर्थिक भविष्यवाणियां गलत साबित हुईं और मजदूरों ने विद्रोह नहीं किया, तो मार्क्सवाद ने एक ‘सांस्कृतिक मोड़’ लिया, और फ्रैंकफर्ट स्कूल के मार्क्सवादी विचारकों, जैसे थियोडोर एडोर्नो और मैक्स हॉर्कहाइमर, ने सांस्कृतिक मार्क्सवाद के माध्यम से पारंपरिक समाज को अंदर से तोड़ने की योजना बनाई।

काल्पनिक और झूठे जातिवाद संबंधी अपराधों का निर्माण, निरंतर परिवर्तन से भ्रम पैदा करना, बच्चों को सेक्स और समलैंगिकता की शिक्षा देना, शिक्षकों के प्रभुत्व को कमजोर करना, बड़े पैमाने पर घुसपैठ से राष्ट्रीय पहचान नष्ट करना, अत्यधिक नशाखोरी को बढ़ावा देना, मंदिरों और धार्मिक आस्थाओं पर कुठाराघात करना, न्याय व्यवस्था को पक्षपाती घोषित करके उसके प्रति अविश्वास पैदा करना, सरकारी योजनाओं पर लोगों की निर्भरता बढ़ाना, मीडिया पर नियंत्रण रखना, परिवार व्यवस्था का विघटन करना-ये काम हैं इनके।

‘दिल्ली क्वियर प्राइड’ के माध्यम से समलैंगिकता और अन्य गैर-परंपरागत यौन प्रवृत्तियों को बढ़ावा देकर परिवार और नैतिक मूल्यों को नष्ट किया जा रहा है। वामपंथी ताकतें भारत जैसे देशों में अपनी विचारधारा थोप रही हैं, ताकि भारत की सनातन संस्कृति कमजोर हो और वैश्विक नियंत्रण आसान बने।

‘दिल्ली क्वियर प्राइड’ में प्रदर्शित अश्लीलता ने समाज की मर्यादाओं को तार-तार कर दिया। आयोजन में भाग लेने वाले लोग अर्धनग्न अवस्था में सड़कों पर नाचते-कूदते दिखे, जहां पुरुष महिलाओं के वेश में और महिलाएं पुरुषों के वेश में अशोभनीय हरकतें कर रही थीं। कुछ प्रतिभागियों ने सार्वजनिक रूप से चुंबन और अन्य यौन-संबंधी इशारे किए, जो बच्चों और परिवारों के सामने अश्लीलता की हद पार कर गए।

रंग-बिरंगे परिधानों के नाम पर वस्त्रहीनता को बढ़ावा दिया गया, और कुछ बैनरों पर ऐसे नारे थे जो पारंपरिक यौन नैतिकता का मजाक उड़ाते थे। ऐसी अश्लीलता न केवल हमारी संस्कृति को कलंकित करती है, बल्कि युवाओं में विकृत विचारों को बोती है, जो अंततः परिवार संस्था के विघटन का कारण बनती है।
(लेखक बी.जे.बी. स्वयंशासित सरकारी महाविद्यालय, भुवनेश्वर में प्रोफेसर हैं)

Topics: पारंपरिक नैतिकतासांस्कृतिक विरासतनैतिक मूल्यसनातन संस्कृतिविकृत वामपंथी विचारसांस्कृतिक मार्क्सवादपरिवार व्यवस्थाCultural Marxismगैर-परंपरागतअश्लीलतालोक-मर्यादापाञ्चजन्य विशेषअत्यधिक नशाखोरीवामपंथी विचारघुसपैठ से राष्ट्रीय पहचानपरिवर्तन का दौरधार्मिक विरासतसांस्कृतिक और सामाजिक
डॉ. अभिषेक उपाध्याय
डॉ. अभिषेक उपाध्याय
लेखक बी.जे.बी. स्वयंशासित सरकारी महाविद्यालय, भुवनेश्वर में प्रोफेसर हैं [Read more]
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