हरियाणा में सीकरी के मिलन बैंक्वेट हॉल के वॉशरूम के बाहर छत्रपति शिवाजी महाराज और महारानी पद्मावती की तस्वीरें लगाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो रहा है। यूजर्स ने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज और महारानी पद्मावती का अपमान बताते हुए उनकी तस्वीरों को तुरंत वॉशरूम के दरवाजे से हटाने की मांग की।
वीडियो में देखा जा सकता है कि पुरुषों, महिलाओं के लिए बने वॉशरूम के बाहर भारतीय इतिहास के महानायक छत्रपति शिवाजी महाराज और महारानी पद्मावती (जिन्हें रानी पद्मिनी के नाम से भी जाना जाता है) की तस्वीरें लगाई गई हैं। इनका ऐसा अपमान देखकर यूजर्स काफी आक्रोशित हैं।
सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा फूटा
कई यूजर्स ने इस कृत्य को पूरे देश का अपमान बताया है। उन्होंने हॉल के मैनेजमेंट पर ऐसा कुकृत्य करने पर सवाल उठाया और कहा कि देश के महान लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल इस तरह से कैसे किया जा सकता हैं?, “क्या इन लोगों को यह भी नहीं पता कि देश के लिए बलिदान करने वाले महान लोगों की तस्वीरें कहां लगानी होती है? एक अन्य यूजर ने आक्रोशित होते हुए लिखा कि छत्रपति शिवाजी महाराज स्वराज्य के प्रतीक थे, जबकि रानी पद्मिनी ने जौहर कर भारतीय इतिहास में देवी का दर्जा प्राप्त किया। वॉशरूम के दरवाजों पर उनके चित्रों का इस्तेमाल करना करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। कुछ लोगों ने जानबूझकर ऐसा करने का आरोप लगाया और बैंक्वेट हॉल मैनेजमेंट के खिलाफ सख्त सजा की मांग की। वहीं, कई यूजर्स ने तस्वीरों को तुरंत हटाने और ऐसा करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग भी की।
जान-बूझकर किया गया अपमान
संजीव कजारे लिखते हैं कि यह महाराष्ट्र और उसकी पहचान का जान-बूझकर किया गया अपमान है। यह कुछ लोगों की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है, जिन लोगों ने ऐसा किया है वे भी हमारे लिए देशद्रोही हैं। दिव्या परिहार ने वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि यह असंवेदनशील है, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। छत्रपति शिवाजी महाराज और महारानी पद्मिनी लोगों के लिए पूजनीय हैं। वे बहादुरी, स्वाभिमान और बलिदान के प्रतीक हैं। इस तरह वॉशरूम के बाहर उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल करना गलत है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पर तुरंत स्पष्टीकारण दिया जाए। साथ ही दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। बता दें कि अभी तक बैंक्वेट हॉल के मैनेजमेंट या स्थानीय अधिकारियों की तरफ से इस मामले में कोई भी आधिकारिक जवाब नहीं आया है।
छत्रपति शिवाजी महाराज और देवी पद्मिनी के गौरव का सम्मान करते हुए इस न्यूज में न तो फोटो लगाई जा रही है और न ही वीडियो।

















