नई दिल्ली : पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पिछले छह वर्षों में पड़ोसी मुल्क में गरीबी दर 21.9 प्रतिशत से बढ़कर 28.8 प्रतिशत हो गई है। यानी पाकिस्तान में लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति गरीब है। पाकिस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स (PIDE) के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. जी एम आरिफ की अगुवाई वाली एक सरकारी समिति ने चौंकाने वाली रिपोर्ट तैयार की है।
आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में गरीबी दर पिछले छह सालों में 6.9 प्रतिशत बढ़ी है। 2018-19 में यह दर 21.9 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 28.8 प्रतिशत हो गई है। पंजाब-सिंध समेत देश के सभी प्रांतों में बढ़ती महंगाई और जीडीपी की धीमी विकास दर के कारण गरीबी दर तेजी से बढ़ी है।
गरीबी बढ़ने मुख्य कारण
जियो न्यूज ने अंग्रेजी अखबार ‘द न्यूज’ के हवाले से बताया कि पाकिस्तान में गरीबी बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण हैं। इनमें पिछले छह सालों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के तीन स्टेबिलाइजेशन प्रोग्राम, कोरोना महामारी का असर और महंगाई शामिल है। इसके अलावा, जीडीपी की धीमी विकास दर, दो सुपर फ्लड और गेहूं के समर्थन मूल्य को खत्म करने जैसे फैसलों ने भी हालात को और खराब कर दिया है। पाकिस्तान में जब पानी का स्तर 9 लाख क्यूसेक से ऊपर जाता है तो इसे सुपर फ्लड कहते हैं।
इन प्रांतों में स्थिति ज्यादा खराब
रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान की तुलना में पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में गरीबी ज्यादा तेजी से बढ़ी है। हालांकि, प्रांतों के हिसाब से अलग-अलग आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं। बताया जा रहा है कि हाल ही में पाकिस्तान में गरीबी कम होने लगी थी, लेकिन 2024-25 में यह उलट गया। यहां 2005-06 में गरीबी दर 50.4 प्रतिशत थी, जो 2018-19 में घटकर 21.9 प्रतिशत रह गई थी।
इस दौरान ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में गरीबी कम हुई थी। गरीबी आकलन समिति के अध्यक्ष डॉ. आरिफ का कहना है कि उन्होंने सरकार को अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंप दी हैं। हालांकि, उन्होंने गरीबी की सटीक दर पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।
बता दें कि पाकिस्तान की सरकार गरीबी की दर पता लगाने के लिए कॉस्ट ऑफ बेसिक नीड्स (CBN) का इस्तेमाल करती है, जिसे सीपीआई-बेस्ड इन्फ्लेशन से एडजस्ट करके लिमिट तय की जाती है।

















