भुवनेश्वर: ओडिशा विधानसभा का बजट सत्र मंगलवार को राज्यपाल हरिबाबू कम्भमपाटी के अभिभाषण के साथ प्रारम्भ हुआ। राज्यपाल ने सदन को संबोधित करते हुए राज्य के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक परिवर्तन की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की। अपने भाषण की शुरुआत “जय जगन्नाथ” के उद्घोष के साथ करते हुए उन्होंने राज्य की सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख किया और विकास की दीर्घकालिक दृष्टि सामने रखी।
राज्यपाल ने कहा कि ओडिशा विकसित भारत के “ग्रोथ इंजन” के रूप में उभरने की क्षमता रखता है और राष्ट्रीय स्तर पर विकास के लक्ष्य “विकसित भारत” की प्राप्ति में निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2036 में ओडिशा अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करेगा और राज्य सरकार इस ऐतिहासिक अवसर तक एक समृद्ध और सशक्त ओडिशा के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
अर्थव्यवस्था और विकास लक्ष्य
विजन दस्तावेज़ के अनुसार राज्य का लक्ष्य वर्ष 2036 तक ओडिशा को 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था और वर्ष 2047 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना है। इसके साथ ही राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में राज्य की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्यपाल ने कहा कि बेहतर निवेश क्रियान्वयन और प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग के माध्यम से औसत वार्षिक विकास दर को 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 9.5 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।सामाजिक संकेतकों में सुधार के लिए भी सरकार ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। वर्ष 2047 तक प्रति व्यक्ति आय को ₹1.8 लाख से बढ़ाकर ₹32 लाख तक पहुंचाने, बहुआयामी गरीबी को 5 प्रतिशत से नीचे लाने, महिला कार्यबल भागीदारी को 70 प्रतिशत तक बढ़ाने तथा औसत आयु को 80 वर्ष से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है।

केंद्र के सहयोग और औद्योगिक प्रगति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सहयोग का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ओडिशा को कई बड़े बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाएं मिल रही हैं, जिससे राज्य की आर्थिक गति तेज होगी। “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य का हवाला देते हुए उन्होंने घोषणा की कि ओडिशा सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभर रहा है, जो तकनीकी क्षमता और औद्योगिक विस्तार को नई दिशा देगा।
आधारभूत संरचना और शहरी संपर्क
राज्यपाल ने कहा कि राज्य में व्यापक स्तर पर सड़क आधुनिकीकरण कार्य जारी है, जिससे संपर्क व्यवस्था बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। भुवनेश्वर के व्यस्त जयदेव विहार–नंदनकानन मार्ग पर शीघ्र फ्लाईओवर निर्माण किया जाएगा, जिससे यातायात जाम कम होगा। इसके अतिरिक्त भुवनेश्वर, खुर्दा और कटक को जोड़ने वाली रिंग रोड का निर्माण भी जारी है, जिससे राजधानी क्षेत्र में यातायात दबाव कम होगा और क्षेत्रीय आवागमन सुगम बनेगा। उन्होंने बताया कि चालू वर्ष में 2,711 किलोमीटर लंबाई की 648 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है तथा कई मेगा पेयजल परियोजनाएं भी अंतिम चरण में हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा और औद्योगिक विस्तार
जलवायु दायित्वों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 10 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें सौर, पवन और उन्नत ऊर्जा भंडारण तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वर्ष 2025 में 85 औद्योगिक परियोजनाओं का शिलान्यास या उद्घाटन किया गया, जिनसे लगभग 1.65 लाख रोजगार सृजित हुए। इसके अतिरिक्त वर्ष के दौरान स्वीकृत 343 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट लगभग 4.65 लाख रोजगार सृजन की क्षमता रखते हैं।
इस्पात क्षेत्र में राज्य की मजबूत स्थिति का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने बताया कि ओडिशा में वर्तमान में 55 इस्पात संयंत्र हैं, जिनकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 45 मिलियन टन है, जो देश के कुल इस्पात उत्पादन का करीब 23 प्रतिशत है। सरकार वर्ष 2030 तक इसे 100 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। खनिज क्षेत्र में सुधारों के परिणामस्वरूप पारदर्शिता और राजस्व में वृद्धि हुई है। वर्ष 2022–23 में ₹1,195 करोड़ रहा राजस्व वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹1,776 करोड़ हो गया।“मेक इन ओडिशा” पहल के अंतर्गत ₹2 लाख करोड़ के निवेश वाली 85 परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है, जिनसे लगभग 1.65 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। कुल मिलाकर विभिन्न विकास पहलों से लगभग 4.65 लाख रोजगार सृजन का अनुमान है।
शिक्षा और विद्यालय अवसंरचना
राज्यपाल ने “आकांक्षी गोदाबरिश आदर्श प्राथमिक विद्यालय योजना” की घोषणा की, जिसके अंतर्गत चार वर्षों में ₹12,000 करोड़ खर्च कर 2,200 स्कूलों को आधुनिक कक्षाओं, डिजिटल शिक्षा उपकरणों और खेल सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कक्षा-1 में प्रवेश आयु 6+ वर्ष निर्धारित की गई है। राज्य में 45,000 से अधिक प्री-प्राइमरी “शिशु वाटिका” कक्षाएं शुरू की गई हैं, जिनमें लगभग 3.2 लाख बच्चों का नामांकन हुआ है।
जनवरी 2025 में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार लागू किया गया और 2026–27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 1 से 8 तक नए पाठ्यपुस्तक लागू होंगे।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा
राज्यपाल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 16.42 लाख से अधिक “लखपति दीदी” तैयार की गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। “सुभद्रा” योजना के तहत एक करोड़ से अधिक महिला लाभार्थियों को ₹1,500 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गई है। “ममता” योजना के तहत 68.42 लाख गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ₹3,767 करोड़ की प्रत्यक्ष सहायता दी गई है, जिसे 1 अप्रैल 2025 से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के साथ जोड़ा जाएगा।
वर्ष 2025–26 में एससी, एसटी, ओबीसी और ईबीसी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति हेतु ₹760 करोड़ तथा पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति हेतु ₹532 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
कृषि और ग्रामीण विकास
“समृद्ध किसान योजना” और “सीएम किसान” जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि हुई है और ₹8,000 करोड़ से अधिक की आय सहायता प्रदान की गई है। वर्ष 2024–25 में फसल उत्पादन 150.48 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो वर्ष 2000–01 की तुलना में लगभग तीन गुना है। खाद्य सुरक्षा योजनाओं में 6.40 लाख नए लाभार्थी जोड़े गए हैं, जबकि अंत्योदय अन्न योजना के तहत 12.36 लाख परिवारों को चावल वितरण जारी है।
कानून-व्यवस्था और प्रशासन
राज्यपाल ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में माओवादी गतिविधियों में लगातार कमी आई है — 48 माओवादी मारे गए, 78 गिरफ्तार हुए और 82 ने आत्मसमर्पण किया। अवैध शराब और मादक पदार्थों के विरुद्ध कार्रवाई में हजारों गिरफ्तारियां हुईं।
मुख्यमंत्री शिकायत प्रकोष्ठ ने जून 2024 से दिसंबर 2025 के बीच प्राप्त 94 प्रतिशत शिकायतों का समाधान किया, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही में सुधार दिखाई देता है। अपने अभिभाषण के अंत में राज्यपाल ने पुनः दोहराया कि वर्ष 2036 तक ओडिशा को समृद्ध, आत्मनिर्भर और औद्योगिक रूप से सशक्त राज्य बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले दशकों में ओडिशा भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

















