नई दिल्ली (हि.स.) । भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर पहली बार मधुमक्खी गलियारे (बी कॉरिडोर) विकसित करने की घोषणा की है। यह पहल सजावटी पौधों की जगह पर्यावरणीय पौधों को लगाने पर केंद्रित होगी। इन गलियारों में फूलदार पेड़ और पौधे लगाए जाएंगे, ताकि पूरे साल पराग (फूलों के नर भाग यानी पुंकेसर से निकलने वाला एक महीन पाउडर) और रस उपलब्ध रहे और परागण करने वाले जीवों को सहारा मिल सके।
पर्यावरणीय दबाव कम करने करने की पहल
एनएचएआई ने बताया कि इस पहल से मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले जीवों पर बढ़ते पर्यावरणीय दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। इससे कृषि और बागवानी उत्पादकता के साथ-साथ पारिस्थितिक संतुलन भी मजबूत होगा।
देशी पौधों का चयन और सालभर पराग की उपलब्धता
मधुमक्खी गलियारे में पेड़, झाड़ियां, घास और जड़ी-बूटियां लगाई जाएंगी। इनमें नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरीष जैसे देशी पौधे लगाए जाएंगे। पौधों का चयन इस तरह होगा कि अलग-अलग मौसम में फूल खिलते रहें और सालभर पराग उपलब्ध रहे।
2026–27 में तीन मधुमक्खी गलियारे, 40 लाख पेड़ लगाने की योजना
एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय राजमार्गों पर हर 500 मीटर से 1 किलोमीटर की दूरी पर फूलदार पेड़ों के समूह लगाएंगे। साल 2026–27 में कम से कम तीन ऐसे मधुमक्खी गलियारे विकसित किए जाएंगे। इस दौरान एनएचएआई लगभग 40 लाख पेड़ लगाएगा, जिनमें से 60 प्रतिशत मधुमक्खी गलियारे पहल के तहत होंगे।

















