भुवनेश्वर। केन्दुझर जिले में दस साल पूर्व ईसाई मिशनरियों के बहकावे में आकर ईसाईयत अपना चुके एक जनजातीय परिवार के छह लोगों ने में घरवापसी की है। ये लोग हो जनजाति के हैं। गांव के समाज के वरिष्ठ लोग व अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति में उन्होंने घरवापसी की है। घरवापसी करने वाले परिवार के सदस्यों ने ईसाईयत को छोड कर अपने मूल में लौटने के बाद प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि समाज के साथ मिल कर रहेंगे ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार केन्दुझर जिले के आनंदपुर ब्लाक के काठकटा पंचायत के बरगोठ गांव में एक परिवार लगभग दस साल पूर्व ईसाइयत में कनवर्ट हो गया था। गांव की एक महिला नीतिमा हो के पति का दस साल पूर्व देहांत हो गया । इसके बाद नीतिमा टूट गई थी । इसके बाद ईसाई पास्टर उनके घर में आये और नीतिमा को समझाने लगे कि अपने धर्म में बने रहने से जैसे तुम्हारे पति का देहांत हो गया था, इसी तरह तुम्हारे संतानों का भी दहांत हो जाएगा । इसलिए तुम हिन्दू धर्म छोड कर ईसाईयत अपना लो । ईसा के शरण में जाने में तुम और तुम्हारा परिवार सुरक्षित रहेंगे । इसके बाद यह परिवार ईसाइ पादरियों के झांसे में आकर कनवर्ट हो गया था ।

घरवापसी कराने में शहीद बिरसा मुंडा क्लाब के कार्यकर्ताओं ने उन्हें समझा बुझा कर घरवापसी कराने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया । इसके कार्यकर्ता लगातार अनेक सालों से इस परिवार के सदस्यों से निरंतर संवाद बना कर रखा तथा विदेशी मजहब को छोड कर अपने मूल संस्कृति में लौटने के लिए आग्रह करते रहे । उनके इस आग्रह के कारण कनवर्ट हो चुके इस परिवार को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने अपने स्वधर्म में वापसी का निर्णय किया ।
इसके बाद यह कार्यक्रम आयोजित किया गया । शहीद बिरसा मुंडा क्लाक के अध्यक्ष बाईधर बिंधाणी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ईसाई पास्टर लोगों के विभिन्न मानसिक- आर्थिक स्थितियों का लाभ उठा कर उनके ज़डों से काटने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते है । हमारे गांव में भी यही हुआ था । लेकिन हमारे समाज के किसी बंधु को हमारे पूर्वजों से कोई काट कर विदेशी मजहब में ले जाए, यह हमारे लिए दुःखद है । इस कारण हमने कनवर्ट हो चुके परिवारों के सदस्यों के साथ संवाद बना कर उन्हें अपने पूर्वजों की संस्कृति से फिर से जुडने की बार बार आग्रह करते रहे। कई साल के प्रयासों के बाद हमें आज सफलता मिली है । इसलिए हमें अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है।
उन्होंने बताया कि उनके गांव में कुछ अन्य परिवार भी पास्टरों के झांसे में आकर कनवर्ट हुए है । उनकी भी घरवापसी करने के लिए उनका संगठन प्रयासरत है । उन्होंने कहा कि इस पुनीत कार्य में समाज का सहयोग भी अपेक्षित है । हमारे समाज में किसी प्रकार की फूट न हो यह हमें सुनिश्चित करना चाहिए ताकि इसका लाभ कोई बाहर का मजहब न ले सके। घरवापसी करने वाले परिवार के एक सदस्य ने बताया कि ईसाइयत में कनवर्ट होने के बाद वे अपने समाज, संस्कृति व परंपराओं से कट गये थे । यह उन्हें काफी चुभता था । हमें अपने गलती का अनुभव हुआ और इस कारण हम अपने मूल धर्म में वापसी की ।
















